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सोनभद्र खदान हादसे में बड़ा खुलासा: 18 अगस्त से शुरू होना था खनन, बारिश के बावजूद पहले ही शुरू कर दी ब्लास्टिंग
सोनभद्र खदान हादसे में बड़ा खुलासा: 18 जुलाई को यहां खनन करने के लिए अनुमति जारी हुई थी लेकिन खनन कार्य बारिश के बावजूद पहले ही शुरू कर दिया गया।
सोनभद्र: खदान हादसे में बड़ा खुलासा 18 अगस्त से शुरू होना था खनन
Sonbhadra News: चोपन थाना क्षेत्र (Chopan police station area) के डाला पुलिस चौकी (dala police post) अंतर्गत लंगड़ा मोड़ के पास स्थित खदान में गत रविवार की शाम जो हादसा हुआ, उसको लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। 18 जुलाई को यहां खनन करने के लिए अनुमति जारी हुई थी लेकिन खनन कार्य एक माह बाद यानी 18 अगस्त से शुरू किया जाना था लेकिन इसे खान महकमे के लोगों की सरपरस्ती कहें या स्थानीय प्रशासन की उदासीनता या फिर सहयोग..। अनुज्ञा पत्र मिलते ही, खनन कार्य शुरू कर दिया गया।
दिलचस्प मसला है कि इसके लिए ब्लास्टिंग सामग्री की आपूर्ति भी शुरू हो गई। हादसे के दिन बारिश होने के बावजूद, ऊंचाई पर पोकलेन लगाकर मिट्टी कटाई कराने का जोखिम लिया गया। अब जब सारा मामला डीएम चंद्रविजय सिंह के संज्ञान में आ गया है तो इसको लेकर जहां प्रशासन स्तर से मामले की आंतरिक जांच शुरू हो गई है। वहीं खदान की स्थिति और हादसे को लेकर कार्रवाई के लिए, मौके की जांच करने आए डीजीएमएस वाराणसी की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
मिट्टी के मलबे में दबकर पोकलेन आपरेटर और खलासी की मौत हुई थी
बताते चलें कि लंगड़ा मोड़ के पास स्थित खदान में गत रविवार की शाम हुए हादसे में, दरकी मिट्टी के मलबे में दबकर पोकलेन आपरेटर और खलासी की मौत हो गई थी। इसको लेकर लेकर जहां परिवारीजनों और उसके साथ के लोगों ने आधी रात के बाद तक बवाल काटा था। वहीं अगले दिन यानी सोमवार को, मिट्टी के मलबे के चपेट में आए पोकलेन को खदान में नीचे गिराए जाने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप की स्थिति बन गई थी। अब जानकारी सामने आई है कि संबंधित खदान में खनन कार्य के लिए हाल ही में जरूरी औपचारिकताओं की पूर्ति की गई थी। पिछले 18 जुलाई को खनन के लिए अनुज्ञा यानी अनुमति दी गई लेकिन एक माह बाद ही खनन कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
बावजूद खनन और बारिश के समय कथित सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर कराए गए कार्य के चलते असमय हुई दो मौतों ने सारी पोल खोलकर रख दी। उधर, डीएम चंद्रविजय सिंह का कहना है कि मामले में उनके सामने जो जानकारी आई है उसके मुताबिक खदान संचालकों को पिछले 18 मई को परमिशन मिली थी। उसमें काम शुरू करने के लिए एक माह का समय होता है। उसमें समय से पहले, बारिश का सीजन देखने के बावजूद, खनन का काम शुरू कर दिया गया। प्रथमदृष्ट्या खदान संचालकों की गलती सामने आई है। इसको लेकर डीजीएमएस वाराणसी से आई टीम, किसके स्तर से गलती है, इसकी जांच कर रही है। कार्रवाई के लिए डीजीएमएस की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
22 सालों में बदल गया बिल्ली-बाड़ी का भूगोल, ढेरों मजदूरों-कामगारों की दफन हो गई जिंदगी, डीजीएमएस स्तर से सुधारात्मक खनन की आड़ में मिल जाती है अनुमति
ओबरा-डाला खनन क्षेत्र यानी बिल्ली-बाड़ी का इलाका..। यहां खनन के दौरान हादसा कोई बड़ी बात नहीं रह गई है। हर साल बारिश के समय इस एरिया में कई मजदूरों-कामगारों की जिंदगियां दफन हो जाती हैं। 22 साल जहां उंचे पहाड़ और हरियाली इस एरिया की पहचान थी। वहीं अब इस एरिया की पहचान, मौत की खाईं में तब्दील हो चुकी दर्जनों फीट गहरी खदानें, प्रदूषण मापन के अधिकतम स्तर को भी पार करता यहां का प्रदूषण और खदानों के बीच के टीलों पर, मौत के डर के बीच झोपड़ों में जीवन गुजारती हजारों जिंदगियां.. बन चुकी हैं। दिलचस्प मसला यह है कि सब कुछ खुली आंखों के सामने है। कभी खदान की दिवार दरकने पर एक साथ 11 जिंदगियां दफन हो जाती हैं।
डीजीएमएस वाराणसी की नजर में यहां की खदानें अभी भी सेफ जोन में
वहीं ब्लास्टिंग सामग्री के असुरक्षित भंडारण के चलते आठ से नौ मजदूरों के एक साथ चिथड़े उड़ जाते हैं। एक-दो मौतें तो जैसे यहां के लिए सामान्य बात हो चुकी है। दिलचस्प मसला है कि डीजीएमएस वाराणसी की नजर में यहां की खदानें अभी भी सेफ जोन में हैं। अलबत्ता जब भी हादसा होता है या सवाल उठता है तो सुधारात्मक कार्य का निर्देश देकर, बाद में खनन की अनुमति दे दी जाती है। सुधारात्मक कार्य किस रूप में होता है, यह खनन क्षेत्र की तस्वीरें बयां करने के लिए काफी हैं। बता दें कि किसी खदान में खनन कार्य करने योग्य स्थितियां हैं या नहीं हैं। यह जिला प्रशासन नहीं बल्कि डीजीएमएस की रिपोर्ट तय करती है।