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पिछली सरकार में आतंकवादियों के मुक़दमे वापस हुए: ब्रजेश पाठक

वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष अपनी सरकार में वापस लिए गए मुकदमों का उल्लेख न करके सवाल का जवाब देने से बच रही है। इसके बाद दोनो पक्षों की तरफ से कई तरह के सवाल जवाब होते रहे

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 2 March 2021 10:45 AM GMT

पिछली सरकार में आतंकवादियों के मुक़दमे वापस हुए: ब्रजेश पाठक
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पिछली सरकार में आतंकवादियों के मुक़दमे वापस हुए: ब्रजेश पाठक (PC: social media)
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज मुकदमों की वापसी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोपों का दौर चला जिसके चलते सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। जहां सत्ता पक्ष की तरफ से कहा गया कि इस सरकार में दलगत भावना से अलग हटकर राजनीतिक मुकदमों को वापस लिया गया है जबकि पिछली सरकार में आतंकवाद से जुड़े लोगों के मुकदमें वापस लिए गए थें।

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सरकार में वापस लिए गए मुकदमों का उल्लेख न करके सवाल का जवाब देने से बच रही है

वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष अपनी सरकार में वापस लिए गए मुकदमों का उल्लेख न करके सवाल का जवाब देने से बच रही है। इसके बाद दोनो पक्षों की तरफ से कई तरह के सवाल जवाब होते रहे जिसके कारण पूरा सदन अव्यवस्थित हो गया। विधानसभा अध्यक्ष हदयनारायण दीक्षित के हस्तक्षेप के बाद ही सदन व्यवस्थित हो सका। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल के दौरान बहुजन समाज पार्टी के सदस्य श्याम सुंदर शर्मा ने सवाल किया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद से जुलाई 2020 तक राज्य सरकार द्वारा किन किन व्यक्तियों के मुकदमें वापस लिए गए और इनमें से कितने मुकदमें राजनैतिक श्रेणी के हैं।

पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में काफी अंतर है

इस पर सरकार की तरफ से जवाब देते हुए न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने सदन को सूचित किया कि राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल, 2017 से 20 जुलाई, 2020 तक 670 मुकदमें वापस लिये जाने की संस्तुति जनहित में की गयी है। यह मुकदमें सामान्यतः राजनेताओं एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं से संबंधित है। भारतीय दण्ड संहिता एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत राजनीतिक श्रेणी के मुकदमों को परिभाषित नहीं किया गया है। उन्होने कहा कि इस सरकार और पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में काफी अंतर है। यह सरकार दलगत भावना के आधार पर काम नहीं करती है। हमारी सरकार ने केवल राजनीतिक मुकदमों को वापस लेने का काम किया है जबकि पिछली सरकार में आतंकवादियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया गया।

समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए शोरशराबा शुरू कर दिया

विधि एवं न्याय मंत्री के इतना कहते ही समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए शोरशराबा शुरू कर दिया। इसके चलते सदन की कार्यवाही पूरी तरह से अव्यवस्थित हो गयी। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष हदयनारायण दीक्षित ने कहा कि आप लोग अपना आसन ग्रहण कर शांति से अपनी बात रखें पर समाजवादी पार्टी के विधायक उत्तेजित होकर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थें। शोर शराबे और हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष रामगोबिन्द चौधरी ने कहा कि बसपा सदस्य श्याम सुंदर शर्मा ने जो सवाल किया उसका उत्तर न देकर सदन को गुमराह किया जा रहा है।

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इस सरकार के कामकाज की बात हो रही है पिछली सरकार की नहीं

बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने नेता प्रतिपक्ष रामगोबिन्द चौधरी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि यहां इस सरकार के कामकाज की बात हो रही है पिछली सरकार की नहीं। इसलिए सदन में जो सवाल पूछा गया है उसका ही उत्तर दिया जाना चाहिए। इस पर कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि इस सरकार में एक प्रक्रिया के तहत ही मुकदमों की वापसी हुई है जबकि पिछली सरकार में वाराणसी बिजनौर गोरखपुर और लखनऊ में आतंकवाद से जुड़े अपराधियों के मुकदमें वापस लेने काम किया गया। इस पर सदन मे शोरशराबा एक बार फिर बढ़ गया और दोनो तरफ से एक दूसरे के खिलाफ जमकर आरोप लगाए गए।

रिपोर्ट- श्रीधर अग्निहोत्री

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