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Lalitpur news: किसानों ने जाम की सड़क, किया प्रदर्शन, खाद के लिए मारा मारी

Lalitpur news: खाद के संकट से आक्रोशित किसानों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया और उन्होंने तालबेहट के पुराने पेट्रोलपम्प तिराहा मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया।

Akhilesh Jain
Published on 17 Nov 2021 8:07 AM GMT
Lalitpur news
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किसानों ने जाम की सड़क (फोटो : सोशल मीडिया )

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Lalitpur news: जनपद ललितपुर की तहसील तालबेहट (Talbehat) में इस समय खाद की भारी किल्लत (khad ki killat) है, किसान रोजाना भोर से लेकर सायं तक लाइनों में लग रहे हैं, ताकि उन्हें खाद मिल सके। यहाँ तक कि महिलाएं भी घर के काम-काज छोड़कर सुबह से ही खाद के लिए काफी मशक्कत कर रही हैं। किसान परेशान है, प्रशासन भी किसानों को खाद दिलाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहा है।

खाद के संकट से आक्रोशित किसानों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया और उन्होंने तालबेहट के पुराने पेट्रोलपम्प तिराहा मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन (kisano ka pradarshan) किया। जिससे आवागमन अवरुद्ध हो गया। सूचना पाकर तालबेहट उप-जिलाधिकारी एसपी सिंह (Deputy DM SP Singh) व कोतवाल संजय गुप्ता पुलिसबल के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने किसानों को समझाकर शांत कराया और जाम हटवाया। तब कहीं जाकर आवागमन सुचारू हो सका।

किसानों ने जाम की सड़क (फोटो : सोशल मीडिया )

गेहूं की बुवाई के समय पर जिले में डीएपी की किल्लत से अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ गई है। धरतीपुत्र एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान हैं। भोर से सांय तक लाइन में खड़े होने के बाद उन्हें मायूसी हाथ लग रही है। सुबह चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाएं डीएपी के लिए लाइन में खड़ी हो जा रही हैं। उनका कहना है कि एक दिन भूख रहने से पूरे साल के लिए उपज का इंतजाम हो जाएगा, इस लिए लाइन में लग रही हैं। सरकार को खाद की किल्लत पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर यही हालत रहे तो कई किसानों की फसल की बुवाई कैसे होगी और कैसे अच्छी पैदावार हो पाएगी? यह सवाल किसानों को परेशनी में डाले हुए है।

किसानों ने जाम की सड़क (फोटो : सोशल मीडिया )

किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पा रही

ये सच है कि किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल पा रही है। खाद की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी (khad ki kalabazari) भी हो रही है। जबकि सरकारी अधिकारी डीएम से लेकर छोटे अफसर तक ये मानने को तैयार नहीं दिखते कि खाद की वास्तव में किल्लत है। अगर समय रहते किसानों को खाद नहीं मिली तो अगले सीजन में खाद्यान्न की किल्लत होना तय है।

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Monika

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