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Mahoba News: महिला कॉन्स्टेबल की दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध मुस्लिम समाज ने निकाला कैंडिल मार्च

महिला कांस्टेबल की दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के विरोध में मुस्लिम समुदाय ने सजा दिलाने की मांग की।

Imran Khan

Imran KhanReport Imran KhanRaghvendra Prasad MishraPublished By Raghvendra Prasad Mishra

Published on 3 Sep 2021 5:56 PM GMT

Candle March
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महिला कांस्टेबल को इंसाफ दिलाने के लिए मुस्लिम समाज के लोगों ने निकाला कैंडल मार्च (फोटो-न्यूजट्रैक)

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Mahoba News: देश की राजधानी दिल्ली में एक मुस्लिम महिला कांस्टेबल की दुष्कर्म के बाद जघन्य हत्या किए जाने के विरोध में मुस्लिम समुदाय द्वारा कैंडिल मार्च निकालते हुए आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की गई। सूफी इस्लामिक बोर्ड के पदाधिकारियों के नेतृत्व में निकाले गए इस कैंडल मार्च में मृतका की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए सरकार से हैवानियत करने वाले आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग की जा रही है।

दरअसल आपको बता दें की दिल्ली में बीते दिनों एक मुस्लिम महिला कांस्टेबल साबिया ड्यूटी करने के बाद वापस अपने घर नहीं लौटी और बाद में उसका शव पड़ा मिला। मुस्लिम महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुष्कर्म कर चाकू से गोदकर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात से पूरे प्रदेश के लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है तो वहीं बुंदेलखंड के महोबा में भी इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज में खासा आक्रोश है।


सूफी इस्लामिक बोर्ड के पदाधिकारियों ने महोबा शहर के आल्हा चौक में इकठ्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए कैंडल मार्च निकाला। आल्हा चौक पर सभी ने कैंडल जलाते हुए मृतका की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की साथ ही इस मामले में दोषी सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही करते हुए फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है। कैंडिल मार्च के रहे लोगों का कहना है कि निर्भया कांड के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा मामला है, जिसमें महिला के साथ हैवानियत कर जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया।


फिलहाल दरिंदगी की यह घटना पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। लोगों में दुष्कर्मियों के प्रति काफी गुस्सा देखा जा रहा है। लेकिन हैवानों पर इसका कोई असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा। क्योंकि घटना के बाद लोगों में आया उबाल थम भी नहीं पाता तब तक दूसरी घटना कहीं न कहीं से सामने आ जाती है। इससे यह साफ हो जाता है कि समाज में पल रहे ऐसे अपराधी सुधरने को तैयार नहीं हैं।

Raghvendra Prasad Mishra

Raghvendra Prasad Mishra

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