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बाबू कहे जाने पर नाराज IAS, 800 करोड़ के भ्रष्‍टाचारी से किया किनारा

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NewstrackBy Newstrack

Published on 4 May 2016 7:33 AM GMT

बाबू कहे जाने पर नाराज IAS, 800 करोड़ के भ्रष्‍टाचारी से किया किनारा
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लखनऊ: ब्यूरोक्रेसी और मीडिया के बीच सास-बहू सरीखी बनी तल्खी थमने का नाम नहीं ले रही है। अभी बीते महीने कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा आईएएस अफसरों को 'बाबू' कहे जाने के बाद उठा विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि इसी बीच आंध्र प्रदेश के ट्रांसपोर्ट विभाग के डिप्टी ​कमिश्नर ए. मोहन का भ्रष्टाचार उजागर होने के साथ नया विवाद खड़ा हो गया है।

ए. मोहन के ठिकानों पर छापेमारी की खबरों में उसे भ्रष्टाचारी आईएएस बताए जाने पर एक बार फिर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात आईएएस अमृत अभिजात ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली है और इसे बेकार बताया है।

ए. मोहन परिवहन विभाग से हैं, आईएएस नहीं

आईएएस अमृत अभिजात ने अपने फेसबुक एकाउंट पर डिप्टी ​कमिश्नर के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पाई गई 800 करोड़ की संपत्ति की खबर का जिक्र करते हुए कहा है कि निश्चित रूप से यह अधिकारी परिवहन विभाग से हैं और भारतीय प्रशासनिक सेवा से नहीं है।

भ्रष्टाचारियों को बचाइए मत लेकिन तथ्य सही रखिए

अमृत अभिजात ने लिखा है कि जब हमारी गल्ती नहीं है तो कृपया हम पर दया करें और छोड़ें। यह पीत पत्रकारिता है और उसके आगे कुछ नहीं। यह बेकार है! आगे अभिजात ने लिखा है कि उन्होंने सोचा होगा कि इस तरह वह शायद समाचार पत्र की कुछ अधिक प्रतियां बेच देंगे। पर इतना नीचे कैसे उतर सकते हैं।

'बाबू' कहने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ छेड़ी थी मुहिम

इसके पहले अमृत अभिजात ने आईएएस अफसरों को 'बाबू' कहकर संबोधित करने वाले मीडिया संस्थानों के​ खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहीम छेड़ी थी और इस तरह के मीडिया संस्थानों का बायकॉट करने की बात कही गई थी। जिसके समर्थन में कई आईएएस अफसर आए थे। उनका कहना था कि आईएएस अफसरों को अपमानित करने के इरादे से लगातार उन्हें 'बाबू' लिखकर मजाक उड़ाया जा रहा है।

डिप्टी ​कमिश्नर के ठिकानों पर छापेमारी में पाई गई थी 800 करोड़ की संपत्ति

दरअसल बीते दिनों आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के परिवहन उपायुक्त ए. मोहन के कई राज्यों में फैले ठिकानों पर एसीबी ने छापेमारी की। जिसमें 800 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति सामने आई है। यह छापेमारी तीन राज्यों-तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में की गई।

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