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राहत नहीं, सूखे का पता लगाने बुंदेलखंड के दौरे पर फिर आई केंद्रीय टीम

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Published on 23 May 2016 10:32 AM GMT

राहत नहीं, सूखे का पता लगाने बुंदेलखंड के दौरे पर फिर आई केंद्रीय टीम
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लखनऊ: अखिलेश सरकार केंद्र सरकार पर लगातार यूपी को राहत पैकेज की धनराशि देने में उपेक्षा का आरोप लगाती रही है। अभी हाल ही में बुंदेलखंड के सात जिलों सहित कानपुर नगर को रबी की फसलों के मद्देनजर सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। अब इन्हीं जिलों में सूखे के हालात का पता लगाने के लिए केंद्रीय टीम यूपी के दौरे पर है। इसी सिलसिले में सोमवार को केंद्रीय टीम के सदस्यों ने चीफ सेक्रेटरी आलोक रंजन से मुलाकात भी की।

केंद्रीय टीम का तीन दिनी दौरा शुरू

कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक डॉ. एके. सिंह की अगुवाई में 10 सदस्यीय दल सोमवार से यूपी के 8 जिलों के तीन दिनी दौरे पर है। इन जिलों को यूपी सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित किया है और केंद्र सरकार से राहत धनराशि की मांग की है। यह दल 23 से 25 मई तक सूखा प्रभावित जिलों का दौरा करेगी।

पांच सीजन से झेल रहे प्रकृति की मार

-यूपी के किसान लगातार पांच सीजन से प्रकृति की मार झेल रहे हैं।

-वर्ष 2013-14 में मूसलाधार बारिश से 15 जिलों के ​किसान प्रभावित हुए।

-वर्ष 2010-14 में सूखे की वजह से 58 जिलों में खरीफ की फसलों को नुकसान हुआ।

-वर्ष 2014-15 में फिर अधिक बारिश की वजह से 73 जिले प्रभावित हुए।

-वर्ष 2015 में सूखे से 50 जिलों की खरीफ की फसलों का नुकसान हुआ।

-वर्ष 2015-16 में बारिश से 12 जिलों की रबी की फसलें प्रभावित हुईं।

बुंदेलखंड हमेशा रहा है प्रभावित

बीते पांच सीजन में आई प्राकृतिक आपदा में बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, ललितपुर और झांसी जिले हमेशा प्रभावित रहे हैं।

बुंदेलखंड के बारे में कुछ खास बातें :

-यहां की कुल जनसंख्या 96.6 लाख है।

-इसमें 17.28 लाख परिवार शामिल हैं।

-इसमें 57 फीसदी सीमांत किसान हैं।

-जबकि 22.2 फीसदी छोटे किसान हैं।

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