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Chitrakoot News: कैसे बुझेगी आग, जब खुद ठंडा पड़ा है अग्निशमन विभाग

Chitrakoot News UP : मुख्यालय में ही आग लगने की किसी भी घटना पर फायर ब्रिगेड को पहुंचने में घण्टों लग जाते हैं तो सुदूर ग्रामीण इलाकों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रतिवर्ष आग के कहर से लाखों के जानमाल का नुकसान हो जाता है।

Zioul Haq

Zioul HaqReport Zioul HaqShivaniPublished By Shivani

Published on 22 Jun 2021 9:03 AM GMT

Chitrakoot News: कैसे बुझेगी आग, जब खुद ठंडा पड़ा है अग्निशमन विभाग
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Chitrakoot News UP: तापमान की चढ़ती जवानी ने आग में घी का काम करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाके खेत खलिहान आग की लपटों के निशाने पर हैं, जरा सी चिंगारी उठी नहीं कि आग का विकराल रूप देखने को मिल जाता है। पानी की कमी से जूझते बुन्देलखण्ड में वैसे भी गर्मी का मौसम कई दृष्टिकोणों से मुसीबत का पैगाम लेकर आता है, जिनमें आग लगने की घटनाएं प्रमुख हैं। दूसरी तरफ इस आग पर काबू पाने के लिए जि़म्मेदार अग्निशमन विभाग (Fire Department) खुद ठण्डा है, विभाग की दमकल गाडिय़ां (Damkal in Hindi) पानी मांग रही हैं तो वहीं कर्मचारियों (Fire Fighters Shortage) की कमी ने काढ़ में खोज का काम कर दिया है।

फायर ब्रिगेड देर से पहुंचती है मौके पर

मुख्यालय में ही आग लगने की किसी भी घटना पर फायर ब्रिगेड को पहुंचने में घण्टों लग जाते हैं तो सुदूर ग्रामीण इलाकों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रतिवर्ष आग के कहर से लाखों के जानमाल का नुकसान हो जाता है। आग लगने की घटनाओं की दृष्टि से पूरा बुन्देलखण्ड संवेदनशील माना जाता है क्योंकि अधिकांश इलाके ग्रामीण क्षेत्रों में आते हैं और जंगलों पहाड़ों के बीच स्थित हैं। जंगलों में तो प्रतिवर्ष अज्ञात कारणों के चलते भीषण आग लगती रहती है जिससे अमूल्य वन सम्पदा नष्ट हो जाती है लेकिन आज तक इस विषय पर कभी गहराई से मन्थन चिंतन नहीं किया गया।

दूसरी तरफ आबादी बाहुल्य इलाकों में तो आग का क्रोध प्रतिवर्ष इस तरह बरपता है कि न जाने कितने गरीबों की गाढ़ी कमाई जलकर खाक हो जाती है। बेजुबान भी हर साल आग की लपटों का शिकार हो जाते हैं। हालांकि लोग खुद अपनी जान बचाने में खुशकिस्मत साबित होते आए हैं।


आग पर काबू पाने के लिए फायरब्रिगेड बुलाना पीडि़तों के साथ बेईमानी साबित होती है। दूर दराज के इलाकों में दो से तीन घण्टे में जब तक दमकल गाड़ी पहुंचती है तब तक सब कुछ नष्ट हो चुका होता है। वाहनों की स्थिति खटारा श्रेणी में होने से यह समय लगना लाजिमी है। बरगढ़ मऊ राजापुर मानिकपुर मारकुंडी बहिलपुरवा भरतकूप थाना क्षेत्रों के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में तो बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ता है पीडि़तों को।

आग बुझाने के लिए छोटे-बड़े कुल पांच वाहन मौजूद

व्यवस्था तो वैसे भी माशाल्लाह है उसपर से कर्मचारियों की कमी से भी अग्निशमन विभाग संघर्ष कर रहा है। विभाग में अधिकारियों कर्मचारियों के लगभग दो दर्जन से अधिक पद सृजित हैं जिसके सापेक्ष कर्मचारियों की संख्या कम है।

चित्रकूट में सिर्फ 10 फायरमैन

जानकारी के मुताबिक सेकेण्ड अफसर के दो पदों में से एक, लीडिंग फायरमैन के तीन पदों में से एक और चालक के चार पदों में से दो पद और फायरमैन के 21 पदों के सापेक्ष सिर्फ 10 फायरमैन ही मौजूद हैं। यदि एक साथ दो या तीन या चार स्थानों पर आग लगने की घटना हो जाए तो उस पर कैसे काबू पाया जाएगा यह इस समीकरण को समझकर समझा जा सकता है।

इस पूरी व्यवस्था अव्यवस्था पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि जनपद के राजापुर मऊ और मानिकपुर थाना क्षेत्र में फायर यूनिट स्थापित करने के लिए जमीन स्वीकृत हो चुकी है और इस बावत फायर सर्विस मुख्यालय को जानकारी भी भेजी गई है, लेकिन ऊपर से कुछ कमियों के चलते काम शुरू नहीं हो पा रहा है। यदि इन तीनों संवेदनशील क्षेत्रों में यूनिट स्थापित हो जाए तो काफी सहूलियत हो जाएगी घटनाओं पर काबू पाने में।


Shivani

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