चार दिन में शहर को स्वच्छ करके दें रिपेार्ट, गलत रिपोर्ट पर होगा मुकदमा

कोर्ट ने सभी अफसरों को  चेताया है कि यदि हलफनामा झूठा पाया जायेगा तो उनके खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी। केार्ट ने यह भी कहा कि यदि हलफनामें नहीं दाखिल किये जाते तो जिम्मेदार ठेेकेदारों  व अफसरों  का वेतन रेाक दिया जायेगा।

लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शहर की साफ सफायी करने व अन्य नगरीय सुविधाओं केा बढ़ाने में समय देने के बाद बावजूद कोई सुधार न होने पर नगर निगम , एलडीए व आवास विकास को आड़े हाथों  लेते हुए उनके जिम्मेदार अफसरेां को चार दिन के भीतर शहर की साफ सफायी सुनिश्चित करके 20 मई को अपने अपने हलफनामें पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने नगर निगम को सफायी का काम देख रहे ठेकेदारों व उनके काम का निरीक्षण करने वाले सुपरवाइजरों के हलफनामें भी दाखिल करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने सभी अफसरों को  चेताया है कि यदि हलफनामा झूठा पाया जायेगा तो उनके खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी। केार्ट ने यह भी कहा कि यदि हलफनामें नहीं दाखिल किये जाते तो जिम्मेदार ठेेकेदारों  व अफसरों  का वेतन रेाक दिया जायेगा। कोर्ट ने जिलाधिकारी व एसएसपी को भी नेाटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि वे अवैध डेयरियों व गंदगी मचाने वाले ठेलेवालों के खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं करते हैं।

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-हाई केार्ट ने दिखायी सख्ती कहा शहर की साफ सफायी की गत बुरी है,

-सफायी का ठेका उनका है जिनके दामन पर हैं भ्रष्टाचार के दाग साफ सफायी की खराब हालत,

-जगह जगह गंदगी इकटठा होने, पालीथीन के उपयेाग पर रेाक न लगने, अवारा जानवररों  की धड़ पकड़ में ढिलायी,

-शहर में चल रही दूध डेयरियेां पर कोर्ट ने दिखाया गुस्सा कहा कि जब जनता के पैसे से इन कामों के लिए दिया जा रहा है फंड तो क्यों नहीं हेा रहा है काम नगर निगम, एलडीए, आवास विकास से मांगा हलफनामा

यह आदेश जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी व जस्टिस सौरभ लवानिया की बेंच ने नगर निगम की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। याचिका पर सुनवायी के बाद कोर्ट ने शहर की नगरीय सुविधाओं की दुर्दशा को देखते हुए स्वयं मामले का संज्ञान ले लिया है और शहर की हालत सुधारने के लिए याचिका के जरिये अफसरों के काम काम की मानीटरिंग आरम्भ कर दी है। कोर्ट ने पूर्व में नगर निगम, एलडीए व आवास विकास से उनकी कार्ययोजना मांगी थी कि शहर को साफ सुथरा व नगरीय सुविधाओं युक्त बनाने के लिए योजना है ।

पूर्व आदेश के अनुपालन में नगर निगम ने ठेकेदारेां व एजेंसियों  की सूची पेश की जिनको  साफ सफायी का जिम्मा दिया गया है । साथ ही सुपरवाइजरों की सूची भी दी गयी। सूची को रिकार्ड पर लेने के बाद कोर्ट ने कहा कि शहर की समस्याओं में कोई सुधार नही हुआ है। कोर्ट ने कहा कि ठेकेदारों  व एजेंसियेां के सुपरविजन की जिम्मेदारी उन पर हैं जिन पर स्वयं भ्रष्टाचार की छींटे हैं।

नालियों की सफायी के बाद कूड़ा रोड  पर क्यों 

केार्ट ने कहा कि नालियों  का कूड़ा साफ कर उसे रोड  पर ढेर कर दिया जाता है जो कि फिर से बरसात में नाली में जाकर उसे चेाक कर देता है तो फिर ऐसी सफायी का मतलब क्या है।

ठेलेवालों पर गंदगी मचाने पर लगाम क्यों नहीं-

केार्ट ने कहा कि लोग ठेलों  से सामान खरीदतें हैं और गंदगी वहीं  फेंक देते हैं। केार्ट ने कहा कि ठेलों से पेनाल्टी वसूलने के अनुपात में कूड़ा कही अधिक फैला दिखायी देता है।

अवारा जानवरों को पकड़कर कान्हा उपवन क्यों नहीं पहूंचाते –

अवारा पशुओ के सड़केां पर घूमने पर और उनके द्वारा दुर्घटनायें कारित करने पर खासी नाराजगी जताते हुए केार्ट ने नगर निगम के चीफ एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को ऐसेा अवारा पशुओं पर कार्यवाही करके हलफनामा देने का आदेश दिया है।

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प्रतिबंध के बावजूद कैसे हो रहा है पालीथीन का उपयेाग-

कोर्ट ने कहा कि तय मानदंड से अधिक माइके्रान की पालीथीन का धड़ल्ले से उपयेाग हो रहा है जिसको  खाकर जानवर मर रहे हैं। ऐसे में अधिकारी पालीथीन पर रेाक लगाकर हलफनामा दें।

शहर में चल रही डेयरियों  पर कार्यवाही क्यों नहीं-

कोर्ट ने कहा कि जब डेयरियों को नगरीय क्षेत्रों में चलाने पर रेाक है तेा जिम्मेदार उन पर कार्यवाही क्यों  नहीं करते।
केार्ट ने सभी समस्याओं पर चार दिन के भीतर कार्यवाही कर रिपेार्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवायी 20 मई को होगी।