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अब कोई नहीं छीन सकेगा यूपी बोर्ड के प्राइवेट इंटर काॅॅलेज, जानेंं कैसे

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NewstrackBy Newstrack

Published on 26 Jun 2016 8:36 AM GMT

अब कोई नहीं छीन सकेगा यूपी बोर्ड के प्राइवेट इंटर काॅॅलेज, जानेंं कैसे
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Yogesh Mishra Yogesh Mishra

लखनऊ: अगर आपके स्कूल में प्रबंधन को लेकर कोई विवाद है तो यह खबर आपके लिए बेहद राहत देने वाली हो सकती है। सीएम अखिलेश यादव ने इंटरमीडिएट काॅॅलेजों के प्रबंधकीय विवाद को खत्म करने के लिए इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में व्यापक परिवर्तन कर दिए हैं। अब आपके प्रबंधन में तीन चौथाई लोग आप के साथ हों तो आप अपने विद्यालय को विवाद से मुक्ति दिला सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव जीतेंद्र कुमार की अगुवाई में किए गए इस बदलाव के आदेश बीते 15 जून को जारी कर दिए गए हैं।

क्या हुआ बदलाव

इस बदलाव के तहत 12वीं तक का अगर कोई भी विद्यालय संचालित हो रहा है तो सरकार ने यह सुविधा उसके प्रबंधन को मुहैया कराई है कि वो चाहे तो वह विद्यालयों को ट्रस्ट में परिवर्तित कर सकते हैं। नियमों में किए गए बदलाव के तहत सोसायटी से ट्रस्ट बनाने के लिए प्रबंधन समिति के तीन चौथाई सदस्यों की सहमति अनिवार्य बनाई गई है।

इसके लिए प्रबंधन को थोड़ी सी मेहनत जरूर करनी होगी कि यदि वह अपने विद्यालय को सोसायटी की जगह ट्रस्ट के तहत चलाना चाहते है तो विद्यालय का भूखंड उन्हें ट्र्स्ट के नाम फिर से रजिस्ट्री करना होगा। इसके लिए उन्हें नया स्टाम्प शुल्क देना होगा। पर यह नियम आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों द्वारा आवंटित भूखंडों पर संचालित होने वाले अथवा संचालित किए जाने वाले विद्यालयों पर भी लागू होगा।

गौरतलब है कि अभी तक माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालय सिर्फ सोसायटी के तहत ही चलाए जा सकते थे। बीते दिनों सरकार ने यह पाया कि हर शहर में ऐसे विद्यालयों को लेकर तमाम प्रबंधकीय विवाद चल रहे है। इनसे निजात पाने के लिए अखिलेश यादव सरकार ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है।

क्या होता था विवाद, कैसे होगा बदलाव

सोसायटी के तहत संचालित किए जाने वाले विद्यालयों में धनराशि चाहे जिसकी लगी हो पर मालिकाना हक में कभी भी कोई भी बदलाव किया जा सकता है। एक सदस्य के आवेदन पत्र पर प्रबंधन के विवाद को शिक्षा और रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी विभाग के अधिकारी सुनवाई शुरू कर देते है। जिसका असर रखरखाव और विद्यालय के शैक्षिक स्तर पर पड़ता है।

ट्रस्ट के माध्यम से चलने वाले विद्यालय के बाद जो भी अपने पैसे लगाकर विद्यालय खोलेगा उसके उत्तराधिकारी का अधिकार सुरक्षित बना रहेगा। प्रबंधन के एक दो लोगों की शरारत के चलते जिन भी विद्यालयों में यह विवाद होगा उन्हें भी इस नियम का फायदा मिलेगा।

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