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सीएम ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर किया मल्यार्पण, कहा- रहेंगे हमेशा याद

सीएम अखिलेश ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में समाज और गरीबों का पूरा ख्याल रखा। वह हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

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Published on 23 Dec 2016 6:31 AM GMT

सीएम ने चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर किया मल्यार्पण, कहा- रहेंगे हमेशा याद
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लखनऊः पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की जयंती पर यूपी सीएम अखिलेश यादव और राज्यपाल राम नाईक ने विधानसभा में स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि चौधरी जी एक युग पुरूष थे। उन्होंने अपने जीवन काल में समाज और देश हित में काम किया। उनके योगदान को देश हमेशा याद करता रहेगा।

सीएम अखिलेश ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में समाज और गरीबों का पूरा ख्याल रखा। वह हम सबके दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।

कौन हैं चौधरी चरण सिंह

भारत की आजादी के बाद देश की राजनीति में चौधरी चरण सिंह की छवि एक कद्दावर किसान नेता के रूप में हुई। वह एक समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी थी थे। उन्हें ‘जाट नेता’ के तौर पर जाना गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज भी उनके नाम पर राजनीति की जाती है।

कहां हुआ था जन्म

चौधरी चरण सिंह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के नूरपुर गांव में एक जाट परिवार में 1902 में जन्म लिया। वह देश के चौथे प्रधानमंत्री भी बने। लेकिन वह इस पद पर महज़ पांच महीने और 17 दिन ही रह सके। वह अकेले ऐसे पीएम हैं जिन्होंने एक दिन भी लोकसभा का सामना नहीं किया।

स्वतंत्रता आंदोलन से राजनीति में आने वाले चौधरी चरण सिंह देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू के विरोध के कारण जाने जाते थे। श्री सिंह ने किसानों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। उन्हें आज भी एक किसान नेता के तौर पर जाना जाता है। 1967 तक कांग्रेस में रहने के बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बना ली थी।

चौधरी चरण सिंह का 1987 में निधन हो गया। दिल्ली में यमुना के किनारे उनकी समाधि है जिसे किसान घाट के तौर पर जाना जाता है। श्री सिंह के निधन के बाद लोक दल का नया अध्यक्ष उनके बेटे अजित सिंह को बनाया गया। इसी लोक दल के सहारे उनके बेटे आज राजनीति के मैदान में हैं।

लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट को भी चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कहा जाता है। मेरठ में भी उनके नाम से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय बना है।चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत केवल परिवार तक सिमट कर रह गई। पश्चिमी यूपी के छह जिलों में जाटों की खासी तादाद है और राजनीतिक नफा नुकसान के लिए चरण सिंह का नाम लिया जाता है।

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