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Flood Control Preparation: सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- बाढ़ से प्रभावित होने वाले 24 जिलों के लिए विशेष सर्तकता बरती जाए

Flood Control Preparation: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कहा कि आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करने से बाढ़ के खतरे (flood hazards) को न्यूनतम करने में सफलता मिली है।

Shreedhar Agnihotri
Updated on: 29 Jun 2022 3:19 PM GMT
CM Yogi Adityanath said- special vigilance should be taken for 24 districts affected by floods
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ-बाढ़ नियंत्रण एवं राहत: photo - social media

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Lucknow: हर साल की तरह शुरू होने वाली बरसात को लेकर राज्य सरकार (State Government) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। बाढ़ की दृष्टि से प्रदेश के दो दर्जन जिलों में इससे निबटने के लिए अधिकारियों से कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने कहा कि आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग करने से बाढ़ के खतरे (flood hazards) को न्यूनतम करने में सफलता मिली है। इससे राज्य में बाढ़ की संवेदनशीलता कम हुई है। बाढ़ के प्रति अतिसंवेदनशील जनपदों की संख्या में कमी आयी है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि बाढ़ नियंत्रण एवं जल जमाव (flood control and water logging) से क्षेत्र को मुक्त रखने के सभी कार्यों को 30 जून, तक पूरा कर लिया जाए।

जल जमाव रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जाएं- मुख्यमंत्री

उन्होंने कहा कि बाढ़ के साथ-साथ हर जनपद व नगर निकाय में जल जमाव रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जाएं। नालों एवं नालियों की सफाई, सिल्ट को निकालना तथा उसका समय से निस्तारण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ की दृष्टि से 24 जिले अति संवेदनशील श्रेणी के हैं। इसमें महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोण्डा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी शामिल हैं।

जबकि सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर और कासगंज संवेदनशील प्रकृति के हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आपात स्थिति हेतु पर्याप्त रिजर्व स्टॉक की व्यवस्था कर ली जाए। बाढ़ की सर्वाधिक आशंका वाले स्थलों पर बाढ़ से बचाव एवं राहत के लिए टीम तैनात कर ली जाए। सभी 875 बाढ़ सुरक्षा समितियां निरन्तर सक्रिय रहकर कार्य करें।

बाढ़ नियंत्रण एवं राहत के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण एवं राहत (Flood Control & Relief) के लिए राज्य स्तर और जिला स्तर पर, कोरोना काल खण्ड में गठित कंट्रोल रूम की तर्ज पर, कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए। यह कंट्रोल रूम 24 घण्टे संचालित रहें। बाढ़ से बचाव एवं प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन, गृह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद, राजस्व एवं राहत कृषि, राज्य आपदा प्रबन्धन, रिमोट सेन्सिंग प्राधिकरण द्वारा पारस्परिक समन्वय के माध्यम से कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ सहित किसी भी आपदा से बचाव के लिए जनपदों को स्वावलम्बी होना चाहिए। इसके लिए सभी जनपदों की आपदा प्रबन्धन की अपनी ठोस कार्ययोजना होनी चाहिए। इस सम्बन्ध में सभी जनपदों के पास अपना प्रशिक्षित मानव संसाधन होना चाहिए। इसके लिए एनडीआरएफ, एस0डी0आर0एफ0 के सहयोग से युवाओं को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय समन्वय एवं कन्वर्जन के माध्यम से प्रदेश ने सफलतापूर्वक कई चुनौतियों का सामना किया है। कई उपलब्धियां हासिल की हैं। जनपद स्तर पर आपदा प्रबन्धन कार्यक्रम को विभागीय समन्वय एवं कन्वर्जन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए।

प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पर सतत नजर रखी जाय

योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पर सतत नजर रखी जाए। नदियों के जलस्तर की सतत मॉनीटरिंग की जाए। नौकाएं, राहत सामग्री आदि के प्रबंध समय से कर लिया जाए। बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को प्रारम्भ करने में देरी न हो। प्रभावित होने वाले परिवारों को हर जरूरी मदद तत्काल उपलब्ध कराई जाए। प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीए0 तथा आपदा प्रबंधन टीमें किसी भी स्थिति में हस्तक्षेप के लिए 24 घण्टे तैयार रहें। इन्हें विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जाए। बाढ़ आपदा की स्थिति में स्थापित राहत कैम्पों में रहने वाली महिलाआ एवं किशोरियों को डिग्निटी किट उपलब्ध कराए जाएं। डिग्निटी किट में सैनेटरी पैड, साबुन, तौलिया, डिस्पोजे़बल बैग, बाल्टी, मास्क आदि शामिल हों।

योगी आदित्यनाथ कहा कि बाढ़ के दौरान और बाद में बीमारियों के प्रसार (prevent the spread of diseases) की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लोरीन की गोलियों, ओआरएस, बुखार आदि की दवाओं की विशेष स्वास्थ्य किट तैयार करके जनपदों में पहुंचा दी जाए। कुत्ता काटने की स्थिति के लिए एण्टी रैबीज तथा सांप काटने की स्थिति के लिए एण्टी वेनम इंजेक्शन की उपलब्धता, सीएचसी एवं जिला अस्पतालों में सुनिश्चित की जाए। बाढ़ के दौरान एवं बाद में होने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए।

Shashi kant gautam

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