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सीएम योगी व आठ अन्य के प्रकरण में दाखिल याचिका खारिज

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RishiBy Rishi

Published on 1 Feb 2018 2:20 PM GMT

सीएम योगी व आठ अन्य के प्रकरण में दाखिल याचिका खारिज
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इलाहाबाद : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के आदेश 28 जनवरी 2017 के विरूद्ध दाखिल याचिका को खारिज कर दिया, जिसके तहत उन्होंने निचली अदालत द्वारा गोरखपुर दंगा मामले में संज्ञान लेने के आदेश को रद्द करते हुए नये सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया था।

मालूम हो कि इस प्रकरण में सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ आठ अन्य अभियुक्तों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गयी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति बी.के नारायन ने वादी राशिद खान की याचिका पर दिया है। वादी की तरफ से अधिवक्ता एसएफए नकवी व राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, विनोदकांत एवं अपर शासकीय अधिवक्ता ए.के सण्ड ने तर्क रखे।

ज्ञातव्य हो कि याची राशिद खान ने गोरखपुर जिले के कोतवाली थाने में भा.द.सं की धारा 147, 153 ए, 435, 295 506, 379 के तहत 27 जनवरी 2017 को योगी आदित्यनाथ व आठ अन्य लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपियों द्वारा दिये गये भड़काऊ भाषण से गोरखपुर जिले में अराजकता व्याप्त हो गयी थी। विवेचना के उपरांत दो जून 2009 को सभी आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। लेकिन धारा 153 ए के तहत अभियोजन स्वीकृति न होने की दशा में आरोप पत्र नहीं दाखिल किया गया। निचली अदालत द्वारा दोनों आरोप पत्र पर 13 अक्टूबर व 28 नवम्बर 2009 को संज्ञान लिया गया था।

इन दोनों संज्ञान लेने के आदेश के विरूद्ध एक अभियुक्त महेश खेमका ने आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की थी। जिस पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश, गोरखपुर ने 28 जनवरी 2017 को अभियोजन स्वीकष्ति सक्षम अधिकारी द्वारा न दिये जाने के आधार पर संज्ञान लेने के आदेश को निरस्त करते हुए नये सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था। अपर जिला सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के इस आदेश को वादी द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी जिसे हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दिया।

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अप्रशिक्षित टीचरों को प्रशिक्षण देने की माँग वाली याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षण देने की माँग में दाखिल उप्र बेसिक शिक्षक संघ की जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अध्यापक छूट गया है तो वह व्यक्तिगत कोर्ट में आकर केस कर सकता है। नेशनल इंस्टीटयूट आफ ओपेन स्कूलिंग (एन.आई.ओ.एस.) द्वारा एक लाख 72 हजार से अधिक अध्यापकों को प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत कर लिया है। ऐसे में कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने उप्र बेसिक शिक्षक संघ की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एन. सिंह राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पाण्डेय व भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन राज्य सरकार ने नहीं किया है। राज्य सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण देने की सूचना नहीं दी जिससे हजारों अध्यापक एन.आई.ओ.एस. में पंजीकरण कराने से वंचित रह गए हैं।

सरकार का कहना था कि एक लाख 82 हजार अध्यापकों में से एक लाख 72 हजार अध्यापकों से अधिक ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करा लिया है। 9 हजार अध्यापकों ने पंजीकरण नहीं कराया है। दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत अध्यापकों को 18 माह में प्रशिक्षण दिया जाना है। अब पंजीकरण कराने का समय नहीं बचा है। केंद्र सरकार ने कहा है कि 31मार्च 2019 तक जो अध्यापक प्रशिक्षित नहीं होंगे उन्हें एक अप्रैल से हटा दिया जाएगा।

झूंसी जमीन घोटाले की सीबीआई जांच के लिए दाखिल याचिका निस्तारित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झूंसी में रेलवे की जमीन बिल्डरों को देने तथा बेचने के मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग में दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि याची चाहे तो अपनी शिकायत जांच एजेंसी से करे तथा जांच एजेंसी उस पर उचित कार्रवाई करेगी।

दिवाकरनाथ त्रिपाठी की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले एवं न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने सुनवायी की। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि विवादित भूमि को रेलवे को वापस कर दिया गया है। इस मामले में लोगों की संलिप्तता को देखते हुए क्राइम ब्रांच इसकी जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच ने कई अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। कुछ अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से रोक लगी है।

पूर्व एसडीएम फूलपुर राजकुमार द्विवेदी को सस्पेंड कर दिया गया है और कुछ लोगों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट दाखिल किया है। याची का कहना था कि मामले की जांच सही तरीके से नहीं हो रही है। पुलिस ने किसी भी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या याची ने किसी अधिकारी को पक्षकार बनाया है। याची का कहना था कि तत्कालीन जिलाधिकारी संजय प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई न होने की बात याचिका में लिखी गयी है।

बड़े फायदे के लिए थोड़ी परेशानी सहें वकीलः चीफ जस्टिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीआईएस सिस्टम से वकीलों व वादकारियों को हो रही परेशानी को देखते हुए चीफ जस्टिस डी.बी.भोसले ने बृहस्पतिवार को वकीलों के सामने अपनी बात रखी। बार में आकर चीफ जस्टिस ने वकीलों को समझाया कि बड़े फायदे के लिए थोड़ी बहुत दिक्कतें सहनी पड़ती है।

सीआईएस सिस्टम से हाईकोर्ट की वेबसाइट में बहुत बड़ा परिवर्तन होगा। ढेर सारी सूचनाएं वकीलों को बड़ी आसानी से मिल जायेगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि वकीलों को परेशानी न हो इसके लिए सभी जजों के साथ मीटिंग की गयी है तथा वकील की गैर हाजिरी में कोई विपरीत आदेश पारित नहीं होगा। जस्टिस दिलीप गुप्ता ने सीआईएस सिस्टम की खूबियां बतायी और कहा कि एक्सपर्ट की टीम दिन रात काम कर रही है। सिस्टम बहुत जल्दी पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगा। इस दौरान वकीलों को यदि कोई दिक्कत है तो वह अपनी परेशानी लिखकर बार को दे। उनकी समस्या का समाधान किया जायेगा। बार के अध्यक्ष आई.के.चतुर्वेदी ने जजों को वकीलों की समस्या से अवगत कराया।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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