सात सीटों पर 15 दागीः हत्‍या व बलात्‍कार के आरोपितों को चुनने की मजबूरी

चुनाव प्रक्रिया में शुचिता और पारदर्शिता के लिए काम करने वाली संस्‍था एसोसिएशन फॉर डेमो‍क्रेटिक रिफार्मस ने चुनाव आयोग से मिली जानकारी के आधार पर उपचुनाव के प्रत्‍याशियों का कच्‍चा –चिठठा जारी किया है। जो कि आंखें खोल देने वाला है।

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दागियों को चुनना मजबूरी (फोटो सोशल मीडिया)

अखिलेश तिवारी

लखनऊ। जिन राजनीतिक दलों के भाषणों को सुनकर आप उत्‍तम प्रदेश और विश्‍व गुरु भारत निर्माण का सपना देख रहे हैं वह हत्‍या, बलात्‍कार जैसे गंभीर मामलों के आरोपितों को ही प्रतिनिधि चुनने के लिए आपको मजबूर कर रहे हैं। प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपितों को ही प्रत्‍याशी बनाया है।

कुल सात सीटों पर निर्दलीय समेत 15 दागी छवि वाले प्रत्‍याशी मैदान में उतरे हैं।

ये है कच्चा चिट्ठा

चुनाव प्रक्रिया में शुचिता और पारदर्शिता के लिए काम करने वाली संस्‍था एसोसिएशन फॉर डेमो‍क्रेटिक रिफार्मस ने चुनाव आयोग से मिली जानकारी के आधार पर उपचुनाव के प्रत्‍याशियों का कच्‍चा –चिठठा जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2020 को सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वह प्रत्‍याशी चयन में अपराधिक छवि व आरोपितों का ख्‍याल रखें और ऐसे लोगों को चुनाव में प्रत्‍याशी न बनाएं। सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी करते हुए प्रदेश विधानसभा की सात सीटों पर हो रहे उपचुनाव में राजनीतिक दलों ने जमकर दागियों को मौका दिया।

दो दलों के पांच-पांच दागी

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने पांच –पांच दागियों को मैदान में उतारा है। एडीआर के अनुसार बहुजन समाज पार्टी ने कुल सात प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं जिसमें से पांच प्रत्याशी ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि समाजवादी पार्टी ने छह प्रत्याशी उतारे हैं और उसमें से पांच पर आपराधिक मामले दर्ज हैं ।

कांग्रेस के 6 प्रत्याशियों में से एक प्रत्याशी ऐसा है जो क्रिमिनल मामलों में आरोपित है और 22 निर्दलीय प्रत्याशियों में से तीन प्रत्याशी क्रिमिनल मामलों के आरोपित भी हैं.

अपराधियों का बोलबाला

विधानसभा के उपचुनाव में 21% अट्ठारह प प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें 15 प्रत्याशी ऐसे हैं जिन पर गंभीर अपराधों में मामला दर्ज हो रखा है। एटीआर के अनुसार समाजवादी पार्टी का प्रतिशत आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों में सर्वाधिक 83 प्रतिशत है और गंभीर आपराधिक मामलों वाले प्रत्‍याशियों में भी प्रतिशत सर्वाधिक 83 ही है।

दूसरा नंबर बहुजन समाज पार्टी का है जिसमें 71% अपराधी छवि के हैं और सभी पर गंभीर किस्म के मामले दर्ज हैं । कांग्रेस ने जिन प्रत्याशियों को उतारा है उसमें केवल 17% ऐसे हैं जिनके ऊपर आपराधिक मामले दर्ज हैं और गंभीर आपराधिक मामलों वाला कोई भी प्रत्याशी नहीं है।

 भारतीय जनता पार्टी ने जिन प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है उनमें से किसी पर भी अपराधिक मामले दर्ज नहीं है। अपराधिक छवि वाले निर्दल प्रत्याशियों में 14% ऐसे हैं जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि 9% पर गंभीर मामले हैं.

दुष्कर्मी भी सत्ता की दौड़ में

गंभीर आपराधिक मामलों में मामलों में भी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के पांच पांच प्रत्याशी शामिल हैं जबकि 22 निर्दलीय विधायक प्रत्याशियों में दो अप्रत्याशित अपराध गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल है.

इन सभी प्रत्‍याशियों में एक प्रत्याशी ऐसा भी जिस पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म का मामला भी दर्ज है जबकि हत्या का आरोपित भी एक प्रत्याशी है। इसी तरह 4 प्रत्याशी ऐसे हैं जिन पर हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं.

विधानसभा उपुचनाव में दो सीट ऐसी हैं जिन्‍हें रेड अलर्ट वाली सीट घोषित किया गया है चुनाव आयोग ने ऐसी सीट उन्हें माना है जिन पर कम से कम अपराधी छवि वाले 3 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हो.

सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का राजनीतिक दलों पर कोई असर नहीं हुआ है उन्होंने पहले की तरह ही इस बार भी अपराधी छवि वाले प्रत्याशियों को मौका दिया है और ऐसे प्रत्याशियों की संख्या तादाद 21 प्रतिशत है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश सभी राजनीतिक दलों के लिए हैं कि वह अपराधी मामलों में लिप्त लोगों को चुनाव मैदान में उतारे 13 फरवरी 2020 का यह आदेश है जिसमें कहा गया है कि अगर राजनीतिक दल अपराधी छवि वाले प्रत्‍याशी चुनते हैं  तो इसका कारण बताएं कि उन्होंने क्यों ऐसे लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है और क्यों उन लोगों का चयन नहीं किया जो अपराधी मामलों में लिप्त नहीं है.

मेरिट बतानी होगी

राजनीतिक दलों को बताना होगा कि उन्होंने किस मेरिट के आधार पर ऐसे लोगों का चयन किया है उनकी शैक्षिक योग्यता क्या है उनकी उपलब्धियां क्या है। एडीआर के अनुसार सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है वह बड़ी सतही है।

सभी ने लगभग यही कहा है कि जिन अपराधी छवि वालों को प्रत्याशी बनाया गया है उसकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है सामाजिक कार्यों में वह शामिल है और जो अपराधिक मामले हैं वह सब राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं इससे पता चलता है कि कानून तोड़ने वालों को बचाने में कानून बनाने वाले शामिल हैं.

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