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Lucknow: SGPGI में डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने किया ऑक्सीजन प्लांट व न्यूरो फिजियोलॉजी लैब का उद्घाटन

Lucknow: यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने रायबरेली रोड़ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र एवं न्यूरो फिजियोलॉजी लैब का लोकार्पण किया।

Shashwat Mishra
Updated on: 2022-07-06T17:33:32+05:30
Deputy CM Brajesh Pathak inaugurated Oxygen Plant and Neuro Physiology Lab at SGPGI
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उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक: Photo - Newstrack

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Lucknow: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (UP Deputy CM Brajesh Pathak) ने रायबरेली रोड़ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र एवं न्यूरो फिजियोलॉजी लैब का लोकार्पण किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक (Health and Medical Education Minister Brajesh Pathak) ने कहा कि अब इससे न्यूरो के मरीज़ों के इलाज में आसानी होगी।

साथ ही, पीजीआई में एक और ऑक्सीजन संयंत्र लगने से अब इसकी भी कोई कमी नहीं रह गई। इस मौके पर पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमन (Professor RK Dhiman, Director of PGI) ने और अन्य संकाय सदस्यों की मौजूदगी में ब्रजेश पाठक ने फीता काट कर उद्घाटन किया।


'रोगी को ध्यानपूर्वक सुनने से पीड़ा कुछ हद तक कम हो सकती है'

इस मौके पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि यहां प्रत्येक रोगी को समान संवेदना और सेवा भाव से देखा जाता है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों को मंदिरों के समकक्ष रखा और चिकित्सक को ईश्वर की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, "कभी-कभी भर्ती के लिये बिस्तर की अनुपलब्धता एक समस्या हो सकती है, पर यदि रोगी को ध्यान पूर्वक सुन लिया जाए, तो उसकी पीड़ा कुछ हद तक कम हो जाती है और यहाँ जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिस्तरों की संख्या को भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।"


नसों, मासपेशियों व मिर्गी का इलाज व जांच सम्भव

क्लीनिकल न्यूरोफिजियोलॉजिकल लैब (Clinical Neurophysiology Lab) में मस्तिस्क, मेरुदण्ड (Spinal Cord), नसों व मासपेशियों की बीमारियो से ग्रसित मरीजों की जाँच करने हेतु कई प्रकार की मशीनों का प्रयोग किया जाता है, इसमें मिर्गी की बीमारी से ग्रसित मरीजों का मूल्यांकन और इलाज के लिए video electroencephalogram (EEG) द्वारा दिमाग से उत्पन्न बिजली की तरंगों का विशलेषण करके, मिर्गी के प्रकार का पता किया जाता है। 15 से 20 प्रतिशत मिर्गी के मरीज जो कि दवा से ठीक नही हो पाते, उनके लिए शल्य चिकित्सा के लिए भी video electroencephalogram (EEG) अहम भूमिका रहती है। इसके अलावा नसों से संबंधित मरीजों के लिए मशीन द्वारा रोगी के नसों में विघुत प्रवाह के माध्यम से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इसी प्रकार मांसपेसियों से उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म विद्युत तरंगों की जांच के लिए भी विभिन्न प्रकार की तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। जिससे मांसपेसियों की बिमारियां जैसे मांसपेशीय दुर्विकास (muscular dystrophy) और विभिन्न प्रकार की Myopathy का विश्लेषण किया जाता है।


मरीज़ों को बिना दवा के किया जा सकता है ठीक

मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (Magnetic stimulation) के द्वारा सर दर्द के मरीजों को बिना दवा के ठीक किया जाता है। मस्तिस्क की धमनियों में खून के प्रवाह में रूकावट के लिये भी Transcranial Doppler का उपयोग भी क्लीनिकल न्यूरोफिजियोलॉजिकल लैब (Clinical Neurophysiology Lab) में किया जाता है।


1000 एलपीएम की क्षमता का है ऑक्सीजन प्लांट

संस्थान में 1000 एलपीएम (Litre per minute) क्षमता का आक्सीजन पी०एस०ए० प्लान्ट 'Doctors for you' संस्था (NGO) के सौजन्य से स्थापित किया गया है। इस प्लान्ट की सप्लाई एवं स्थापना पर होने वाला सारा व्यय उपरोक्त संस्था द्वारा ही वहन किया गया है। यह प्लान्ट PSA technology (pressure swing adsorption) पर कार्य करता है। जिसमें हवा से आक्सजीन को अलग कर 93 से 94 प्रतिशत की शुद्धता के साथ आक्सीजन प्राप्त होती है, जिसको सेंट्रल पाईप लाईन सिस्टम द्वारा अस्पताल मे मरीज़ों तक पहुंचाया जाता है।

Shashi kant gautam

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