जेल में बंद डॉ. कफील को जान का खतरा बता पत्नी ने HC से लगाई गुहार

अपने पत्र में श्रीमती खान ने डॉ. कफील खान की महाराष्ट्र से की गई गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाये है। उन्होंने लिखा है कि बीती 13 फरवरी को उनके पति को न्यायालय की अवमानना करते हुए विधि विरूद्ध तरीके से मथुरा के जिला कारागार में निरूद्ध रखा गया है।

लखनऊ: नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के सिलसिले में मथुरा जिला कारागार में कैद निलंबित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान की पत्नी डा. शाबिस्ता खान ने यूपी के अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिख कर अपने पति जेल में हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए जेल में उनकी सुरक्षा और विशेष बैरक की मांग की है।

अपर मुख्य सचिव गृह को लिखे पत्र में शाबिस्ता खान ने लिखा है कि उनके पति कफील खान ने उन्हे बताया है कि उन्हे जेल में बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया जा रहा है। इस पत्र की कापी उन्होंने डीजी जेल, यूपी डीजीपी और मुख्य न्यायधीश, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद को भी भेजी है।

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जेल में पति के साथ किया जा रहा अमानवीय व्यवहार

उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। साथ ही मानव गरिमा के विरूद्ध जाकर उनके साथ व्यवहार किया जा रहा है।  उन्होंने आशंका जताते हुए लिखा है कि जैसा कि आजकल यूपी की जेल के अंदर भी हत्या आम बात हो गई है इसलिए उन्हे भय है कि उनके पति की हत्या भी जेल कें अंदर करवाई जा सकती है और किसी निर्दोष कैदी को फर्जी तरीके से फंसा कर प्रशासन अपना पल्ला झाड़ लेगा।

अपने पत्र में श्रीमती खान ने डॉ. कफील खान की महाराष्ट्र से की गई गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाये है। उन्होंने लिखा है कि बीती 13 फरवरी को उनके पति को न्यायालय की अवमानना करते हुए विधि विरूद्ध तरीके से मथुरा के जिला कारागार में निरूद्ध रखा गया है। इतना ही नहीं महज एक ही दिन में सरसरी तौर पर कार्यवाही करते हुए उनके पति के ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगा दी गई है।

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नागरिकता कानून को लेकर की थी भड़काऊ बयानबाजी

दरअसल, पिछले साल 12 दिसबंर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान डा. कफील ने कथित तौर पर भड़काऊ बयानबाजी की थी।

जिसके कारण उनके खिलाफ अलीगढ़ के सिविल लाइन्स थाने में मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले वर्ष 2017 में भी डा. कफील खान को गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से हुई दर्जनों बच्चों की मौत के मामले में भी उन्हे गिरफ्तार किया गया था लेकिन दो साल चली जांच के बाद डॉ. कफील खान को इस मामले में सभी प्रमुख आरोपों में क्लीनचिट मिल गई थी।

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