Top

ई-रिक्‍शा चलाकर बेटियों को इंग्लिश स्‍कूल में पढ़ाने वाली मां को सलाम

suman

sumanBy suman

Published on 8 May 2016 4:26 AM GMT

ई-रिक्‍शा चलाकर बेटियों को इंग्लिश स्‍कूल में पढ़ाने वाली मां को सलाम
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

कानपुर- मां तो बस मां होती है। जितना प्यार और दुलार उसके दिल में अपने बच्चों के लिए होता है, वो शायद किसी और के दिल में नहीं बच्चों की खुशी के लिए वो अकेले ही दुनिया से लड़ जाती है। न जाने कौन कौन सी परेशानियां भी झेल जाती है, पर अपने बच्चों पर आंच तक नहीं आने देती है। मदर्स डे पर newztrack आपको एक ऐसी मां से मिलाएगा, जो अपनी मासूम बच्चियों के लिए रिक्शा चलाकर उनका पालन-पोषण करती है।

सड़क के किनारे तिरपाल डाल कर रहने वाली इस जज्बा देखिए, जो अपनी बच्चियों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही है। उनके इस जज्बे को देखकर पूरा एरिया उसे सलाम करता है। लेकिन सड़क के किनारे रहने और उसकी जिंदगी बर्बाद करने में उसके अपनों का हाथ है, लेकिन जिन्दगी को कैसे जीना है, यह सीखना है, तो इस महिला को देखिए।

d

नौबस्ता थाना क्षेत्र के आवास विकास हंसपुरम इलाके में सड़क के किनारे रहने वाली शीलू कश्यप (26) दो बेटियों वंसिका (08) और परी (05) के साथ तिरपाल डाल कर जिन्दगी काट रही हैं। वह दिन रात रिक्शा चलाकर कर दो वक्त की रोटी और बच्चों की पढ़ाई के लिए रूपए जमा करती हैं। ताकि उसने जो दिन देखे हैं, वह दिन उसकी बेटियों को नही देखना पड़े। शीलू के इस जज्बे को देख कर पूरा क्षेत्र उसका कायल है।

जानिए क्‍या है शीलू की कहानी

शीलू के मुताबिक उसके पैरेंट्स मूल रूप से एमपी के बिलग्राम के थे, लेकिन जब वह ढाई साल की थी, तभी उसके पैरेंट्स की मौत हो गई थी। इसके बाद वह अपने भाई रामू के साथ कानपुर के पटकापुर में रहने लगी।

mbm

सास और पति ने करवा दिया था अबॉर्शन

शीलू ने बताया कि रामू का एक फ्रेंड नरेश कश्यप था। उसने रहने के लिए एक कमरा दिया था। 13 साल की उम्र में नरेश ने मेरे साथ जबरन रेप किया था और प्रेग्नेंट होने के बाद जब इसकी भनक मेरे भाई व पूरे मोहल्ले को हो गई, तो नरेश ने मंदिर में मुझसे शादी कर ली थी। लेकिन उसके पैरेंट्स राजी नहीं थे। लेकिन शादी के कुछ महीने बाद उसके घर वालों ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन मेरी सास व पति ने सातवें माह में मेरा एबॉर्शन जबरन करा दिया था। इसके बाद एक बेटी हुई, जिसका नाम पलक है। वह अपने पिता के साथ रहती है।

czczsहफतों नहीं देते थे खाना

बेटी होने के बाद भी पति व सास ससुर का अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा था। वह आए दिन मेरे साथ मारपीट करते थे। एक-एक हफ्ते तक खाना नहीं देते देते थे। कमरे में बंद करके रखते थे, लेकिन मेरे पड़ोसी चोरी छिप कर मुझे रोटियां दे जाते थे।

शीलू ने बताया कि जब तीसरी बार प्रेग्नेंट हुई, तो फिर से बेटी हुई। इस बार सास ने तो रहना ही मुश्किल कर दिया। इस बात से नाराज पति ने बेटी के जन्म के बाद उसकी जमकर पिटाई कर दी थी।

nfghnf

बच्‍चों के लिए दो साल तक चलाया पैडल वाला रिक्‍शा

जब सबसे छोटी बेटी परी को होना था, तो उन्होंने मुझे घर से बाहर निकाल दिया था, जिससे मैंने उसे कब्रिस्तान में जन्म दिया था। लेकिन इसके बाद उन लोगों ने मुझे घर में नहीं घुसने दिया। 20 साल की उम्र में वंसिका और परी को लेकर नौबस्ता क्षेत्र में टेंट लगा कर रहने लगी। बच्चों को पालने के लिए दो साल तक मजदूरी की इसके बाद पैडल वाला रिक्शा चलाया ताकि अपने बच्चियों के लिए खाना जुटा सकूं।

फैक्‍ट्री में काम के दौरान मिला ई रिक्‍शा

इसके दादा नगर में एक फैक्ट्री में नौकरी की। उसी दौरान मेरी मुलाकात गोमती शुक्ला नाम की महिला से हुई। उनको जब आपबीती बताई, तो उन्होंने नौ महीने पहले ही मुझे एक ई रिक्शा दिलाया है। जिसको चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हूं।

vmn

दोनों बच्चियां पढती हैं इंग्लिश मीडियम स्‍कूल में

शीलू के मुताबिक अपनी दोनों बच्चियों का एडमिशन एमएसआरडी इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराया है। यह स्कूल खाड़ेपुर में है। बच्‍चों को लेने और ले जाने के लिए स्कूल वैन आती है। शीलू का कहना है कि मैं एक मां हूं। मैंने जिस तरह की समस्याओं का सामना किया है, मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटियां भी उनका सामना करें। वह पढ़-लिख कर आगे बढ़े। उनको पढ़ाने के लिए मैं दिन रात मेहनत करती हूं। बच्चों की स्कूल फीस दो हजार रूपए महीने है। इसके साथ ही अभी मैं रिक्शे की किश्‍तें भी भर रही हूं।

d

बेटी वंसिका को है अपनी मां पर प्राउड

शीलू ने बताया कि मैं एक लड़की होकर रिक्शा चलती हूं। तो लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं। लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं क्योंकि मैं अपनी बच्चियों के लिए यह सब कर रही हूं। सर्दी, बरसात, गर्मी हम सब एक साथ इसी तिरपाल के नीचे ही काटते हैं। लेकिन मुझे खुशी इसी बात की है कि मेरे बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं। वंसिका का कहना है कि my mother is great mother , मुझे प्राउड है कि मैं उनकी बेटी हूं।

suman

suman

Next Story