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श्रीलंका में कैद 8 बंधक लौटे अपने वतन, फूल-मालाओं से हुआ स्‍वागत

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AdminBy Admin

Published on 27 April 2016 5:59 AM GMT

श्रीलंका में कैद 8 बंधक लौटे अपने वतन, फूल-मालाओं से हुआ स्‍वागत
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मुजफ्फरनगर: श्रीलंका में काम के नाम पर बंधक बनाए गए मुजफ्फरनगर और बिजनौर के 8 युवक आज प्रशासन और केंद्र सरकार के प्रयास से बंधन मुक्त कराए गए । जिनमें से सात युवक आज अपने घर मुजफ्फरनगर पहुंचे। गांव वालों ने बंधन मुक्त किए गए युवकों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। मजदूरी के नाम पर इन लोगों को झांसा देकर श्रीलंका भेजा दिया गया था। जहां इन लोगों को वहां के एक ठेकेदार द्वारा कई दिनों से बंधक बनाकर रखा गया। पीड़ित परिजनों द्वारा पुलिस में शिकायत करने पर आज ये लोग अपने देश लौट आये हैं।

क्‍या है पूरा मामला

-मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव सूजडू के सात और बिजनौर के एक युवक को लगभग तीन महीने पहले एक एजेंट ने ठग लिया।

-अच्छी नौकरी के सपने दिखाते हुए विदेश भेजने के नाम पर उससे एक लाख पचास हजार रूपए लेकर श्रीलंका भेज दिया था।

-युवकों को वहां पर एक फैक्टरी में मजदूरों की तरह बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था।

-एक युवक के द्वारा अपने घर फोन कर इस बात की जानकारी दी गई ।

-जिस पर युवक जाहिद, वाज़िद, इनामुल, हसीन, विष्णु कुमार शाह आलम, अख्तर के परिजनों ने भी पुलिस के आलाधिकारियों को मामले की जानकारी दी।

Untitled-1पुलिस ने की कार्रवाई

-पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।

-एजेंट आसिफ के खिलाफ संगीन धाराओ में मुकदमा दर्ज कर युवकों को बंधक मुक्त करने के प्रयास शुरू किए।

-जिसके चलते केंद्र सरकार और जिला प्रशासन की मेहनत रंग लाई।

-आज सभी 8 युवकों के वापस आने पर उनका फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया।

-युवकों के घर वापस लौटने पर युवकों के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

क्‍या है वहां से लौटे लोगों का कहना

-श्रीलंका से लौटे अख्तर ने बताया है कि हम वहां काम के सिलसिले से गए थे।

-वहां जाकर हम काम करने लगे, तो हमें समय पर खाना नहीं मिल रहा था।

-जब हम पैसे मांगते, तो बोलते थे कि एजेंट को पैसा दिया हुआ है।

-अगर तुम्हें अपने घर जाना है, तो चले जाओ ।

-वह बताते हैं कि हमें आसिफ ने श्रीलंका भेजा था और हम 7 लोग गए थे।

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-वहां के मालिक ने आसिफ को वीजा और हमारी सैलरी के पैसे पहले ही दिए हुए थे ।

-वहां हमसे जबरदस्ती काम कराया गया।

-बोलते थे कि हमारा पैसा उतारो काम कर के, तब जाओगे।

-हमने उनसे कहा कि हम तो डेढ़ लाख रूपये देकर आए हैं, पर वो हमारी एक नहीं सुनते थे।

-लेकिन अब हम अपने वतन आकर बहुत खुश हैं।

क्‍या है सिटी सीओ का कहना

-वही इस मामले में सीओ सिटी तेजबीर सिंह ने बताया है कि ये प्रकरण जैसे ही हमारे संज्ञान में आया था।

-हमने तत्काल उन लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी थी, जिन्‍होंने इन लोगों को यहां से भिजवाया था।

-उनके खिलाफ कार्यवाई की गई थी और उन्हें निर्देशित भी किया गया था कि बंधक बनाए गए लोगों को वापस लाने का प्रयास करें।

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-साथ ही उच्च अधिकारियों के द्वारा श्रीलंका में एक मैसेज भी भिजवाया था कि यहां के कुछ लोग वहां फंसे हुए हैं।

-इनको वापस भेजा जाए।

-उन्हीं सब प्रयासों से ये सभी वापस लौट आये हैं।

-जिन लोगों ने इन्हें वहां भेजा था, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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