Top

STF का बड़ा खुलासा, 500 फर्जी बीमा पालिसियों से बटोरे दो करोड़

हेल्थ इंश्योरेंश कराकर, डॉक्टरों, अस्पताल कर्मियों व बीमा कम्पनियों के कर्मियों की मदद से कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी नाम पते पर खोले गये बैंक खातों में लगभग 500 फर्जी बीमा पॉलिसियों में लगभग 2 करोड़ रूपये का क्लेम लेकर ठगी करने वाले गैंग के सरगना सहित चार अभियुक्त गिरफ्तार किये गए हैं।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 7 Jan 2020 3:46 PM GMT

STF का बड़ा खुलासा, 500 फर्जी बीमा पालिसियों से बटोरे दो करोड़
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

लखनऊ। STF ने हेल्थ इंश्योरेंश कराकर, डॉक्टरों, अस्पताल कर्मियों व बीमा कम्पनियों के कर्मियों की मदद से कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी नाम पते पर खोले गये बैंक खातों में लगभग 500 फर्जी बीमा पॉलिसियों में लगभग 2 करोड़ रूपये का क्लेम लेकर ठगी करने वाले गैंग के सरगना सहित चार अभियुक्त गिरफ्तार किये हैं।

एसटीएफ उत्तर प्रदेश को, काफी समय से हेल्थ इंश्योरेंश कराकर, डॉक्टरों, अस्पताल कर्मियों व बीमा कम्पनियों के कर्मियों की मदद से कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से फर्जी नाम पते पर खाते खोलकर बैंक खातों में क्लेम लेकर ठगी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचनायें प्राप्त हो रही थीं।

इसके बाद एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव नरायण मिश्र के निर्देशन व अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ लखनऊ विशाल विक्रम सिंह के पर्यवेक्षण मे एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम को लगाया गया था।

ऐसे में मिले क्लू

टीम को सूचना मिली कि एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंश कम्पनी लि., नोयडा गौतमबुद्व नगर के वरिष्ठ प्रबन्धक डा. बलराम सोनी, ने एक मुकदमा पंजीकृत कराया है कि अलग-अलग स्वास्थ्य बीमा धारकों के इश्योरेंश क्लेम एक ही बैंक खाते मे लिये गये हैं। कम्पनी द्वारा जांच करने पर पता चला है कि एक बैंक खाते के चेक पर अलग अलग धारकों के नाम अंकित पाये गये हैं। इन बैंक खातो में कई अन्य इंश्योरेंश कम्पनियो से भी फर्जी तरीके से क्लेम कराये गये हैं।

इसके अतिरिक्त आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, लाइफ इंश्योंरेंश कम्पनी के वरिष्ठ प्रबन्धक हिमांशु शर्मा द्वारा भी उपरोक्त गैंग के विरूद्व थाना जनकपुरी, दिल्ली में शिकायत दर्ज करायी गयी थी। इस सूचना पर काम करते हुए साइबर टीम मंगलावार को थाना सेक्टर-20, जनपद गौतमबुद्व नगर से अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरोह सरगना का खुलासा

पूछताछ में गिरोह के सरगना अमित त्यागी ने बताया कि उसने वर्ष 2014-2015 मे ई-4-ई हेल्थ केयर कम्पनी मे एग्जीक्यूटिव के पद पर ज्वाइन किया था। जहां उसकी मुलाकात प्रदीप शर्मा से हुई। जो कम्पनी मे एग्जीक्यूटिव ही थे। उन्होंने मेरे नाम पर बीमार हुए बिना ही हॉस्पिटल से एक फर्जी बिल बनवाकर मेड एसिस्ट इंश्योरेंश कम्पनी से रू 42000/ का क्लेम दिलवा दिया और बताया कि 30 प्रतिशत देकर हम लोग इस तरह से क्लेम करवा सकते हैं।

रुपया कमाने के लालच उतरा धंधे में

इसके बाद अमित त्यागी ने सोचा कि नौकरी से कुछ नही होगा और नौकरी छोड कर रूपये कमाने के लालच में 2016 से खुद ही यह काम करने लगा। वह अपने साथियों के साथ मिलकर ‘‘माया हॉस्पिटल’’, हापुड के डॉक्टर जितेन्द्र कंसल, ‘‘पवनी हॉस्पिटल/चतुर्भुज हॉस्पिटल’’, नोयडा के मालिक डॉक्टर राकेश, ‘‘विश्वकर्मा हॉस्पिटल’’ सेक्टर-117, नोयडा के मालिक डॉक्टर राजेश व ‘‘केएम हॉस्पिटल एण्ड ट्रामा सेंटर’’, हापुड के डॉक्टर मो. इकबाल के माध्यम से हॉस्पिटल के फर्जी बिल बनवा लेता था। इसके अतिरिक्त अन्य हॉस्पिटलों से, जिनसे सीधे सम्बन्ध नही थे, उनसे डॉक्टर जितेन्द्र कंसल ‘‘माया हॉस्पिटल’’, हापुड व अजय राणा, इश्योरेंश इवेस्टीगेटर, निवासी शास्त्री नगर, मेरठ इनके लिए सम्पर्क कर फर्जी बिल व भुगतान की प्रक्रिया मे मदद करते थे, जिसके लिए क्लेम मे उनका अपना हिस्सा निर्धारित था।

ऐसे की जाती थी जालसाजी

अमित त्यागी ने अपने साथियों के साथ मिलकर हेल्थ इंश्योरेंश का डाटा खरीदकर उस डाटा से दिल्ली एनसीआर के आसपास के लोगों से, जिनका स्वाथ्य बीमा होता था, सम्पर्क कर व कुछ लोगों का खुद ही आनलाइन बीमा कराकर कुछ दिन बाद उनको बीमार दिखाकर उपरोक्त अस्पतालों व डॉक्टरों की मदद से व कभी-कभी खुद ही अस्पतालों के लेटर हेड का प्रयोग कर बिल बनाकर उस पर मोहर लगाकर व हस्ताक्षर बनाकर क्लेम के लिए कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अपने द्वारा खुलवाये गये बैंक खाते मे क्लेम लेने के लिए बिल कम्पनियों मे भेज देते थे। कभी-कभी कम्पनियों को किसी पालिसी मे शक हो जाता था तो उसकी जांच कराती थी, तब ये कम्पनी की तरफ से जांच करने आये इनवेस्टीगेटर को 10 प्रतिशत देकर सेट कर लेते थे। ये लोग बीमित व्यक्ति व फर्जी बिल बनाने वाले डॉक्टरों को 30-30 प्रतिशत देते थे व बचा हुआ 40 प्रतिशत आपस मे बांट लेते थे।

अपना हेल्थ स्टार अस्पताल भी खोल लिया

अमित त्यागी ने बताया कि ये लोग फर्जी बिल बनवाकर अब तक लगभग 500 लोगों के नाम पर लगभग 2 करोड़ रूपये का क्लेम ले चुके है। इन्ही रूपयों से अपना खुद का अस्पताल ‘‘हेल्थ स्टार’’ नाम से जनपद हापुड मे खोला है। अमित त्यागी के पास से बरामद अस्पतालों के लेटर हेड व मोहरें कुछ अस्पतालों से लिये गए हैं व कुछ इन लोगों ने स्वयं ही अपने अस्पताल मे तैयार कर लिये है। इनका प्रयोग ये लोग फर्जी बिल बनाने में करते है। त्यागी ने बताया कि इनके सम्पर्क मे इंश्योरेंश कम्पनियों के कुछ इनवेस्टीगेटर भी है, जो कम्पनी से जांच करने आते है। इस काम में डॉक्टर, अस्पताल, इंश्योरेंश कम्पनियों के इनवेस्टीगेटर, बीमा धारक सब का अपना अपना हिस्सा निर्धारित है। प्रकाश मे आये कई अस्पतालों, डॉक्टरों, इंश्योरेंश कम्पनियों के इनवेस्टीगेटरों व बीमा धारकों के बारे मे जानकारी प्राप्त कर गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है।

लगाई गईं ये धाराएं

गिरफ्तार अभियुक्तों को मु0अ0स0 682/19 धारा 420/467/468/471 भा0द0वि थाना सेक्टर-58, जनपद गौतमबुद्व नगर में दाखिल किया गया है तथा 66 आई0टी0 एक्ट की बढ़ोत्तरी की जा रही है। अग्रिम विधिक कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।

सरगना सहित पकड़े गए अभियुक्त

पकड़े गए अभियुक्तों में अमित त्यागी पुत्र श्री यशवीर सिंह म0न0 214 ब्लाक 2 हस्तिनापुर, थाना हस्तिनापुर, जनपद मेरठ (पूर्व कर्मचारी ई 4 ई हेल्थ केयर कम्पनी) (गैंग लीडर), अंकुर त्यागी उर्फ अंकुर शर्मा पुत्र स्व0 विनोद त्यागी निवासी ग्राम हरदेपुर भंडोला, थाना भोजपुर, मोदी नगर, जनपद गाजियाबाद, हर्ष मिश्रा पुत्र स्व0 सुशील मिश्रा निवासी ई 270 बी, सेक्टर 22, थाना सेक्टर 20, जनपद गौतमबुद्व नगर, सौरभ भण्डारी पुत्र जसवंत सिंह निवासी जी 64, सेक्टर 22, थाना सेक्टर 20, जनपद गौतमबुद्व नगर शामिल हैं।

ये चीजें की बरामद

पकड़े गए अभियुक्त के पास से 18 क्रेडिट/डेबिट कार्ड, दो निर्वाचन कार्ड, तीन पैन कार्ड, चार आधार कार्ड, 11 मोबाइल फोन मय सिम, छह सिम कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक आरसी पुलिस वेरीफिकेशन कार्ड, दो लैपटाप, दो कलर प्रिंटर, 96 मोहरें ( विभिन्न डॉक्टरों, हॉस्पिटलों व पैथ लैब के नाम की), चार बैंक चेक बुक, नौ बैंक कैंसिल चेक, दस बैंक सादे चेक, सात हास्पिटल के कूट रचित बिल, 4500 लेटर हेड (विभिन्न हॉस्पिटलों के), 50 बुकलेट रिसिप्ट/एडमिशन शीट, 21 क्लेम फार्म, एक डोंगल वाईफाई, एक अदद डायरी, 35 हॉस्पिटल पंजीकरण के दस्तावेज, दो अदद चार पहिया वाहन (स्विफ्ट डिजायर न. डीएल 2 सीएटी-8803, होण्डा सिटी डीएल 2 सीएडब्लू -7823), 3485 रू नकद बरामद हुए हैं।

राम केवी

राम केवी

Next Story