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क्या आपके फेवरिट रेस्टोरेंट आपकी जिंदगी को आग के हवाले कर रहे हैं

Mayank Sharma
Updated on: 3 Feb 2020 10:15 AM GMT
क्या आपके फेवरिट रेस्टोरेंट आपकी जिंदगी को आग के हवाले कर रहे हैं
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मुंबई। आपको याद होगा कि 29 जनवरी, 2017 को कमला मिल कम्पाउंड के एक रेस्टोरेंट में आग लग गई थी और 14 लोगों की मौत हो गई। काफी लोग जख्मी भी हुए थे। इसके पहले सायन के एक रेस्टोरेंट में भी ऐसी ही घटना हुई थी और वहां भी कई लोग जलकर मर गए थे। पिछले दिनों सूरत के एक कोचिंग संस्थान में भी इसी प्रकार की घटना हुई थी जिसमें 2 दर्जन के आस पास छात्रों की मौत हो गई थी।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के नवीनतम उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में सार्वजनिक और आवासीय दोनों प्रकार के भवनों/इमारतों में लगी आग की विभिन्न घटनाओं के कारण देशभर में 17,700 लोगों की मौत हुई, जो यह बताने के लिये पर्याप्त है कि अग्नि सुरक्षा को लेकर हम कितने गंभीर हैं और इस मामले में हमारा रिकॉर्ड बेहद निराशाजनक प्रतीत होता है। भारत में अग्निशमन सेवाएँ संविधान के अनुच्छेद 243W के प्रावधानों के अंतर्गत संविधान की 12वीं अनुसूची के तहत आती हैं तथा 12वीं अनुसूची में सूचीबद्ध कार्यों के ज़िम्मेदारी नगरपालिकाओं के अधिकार क्षेत्र में आती है।

मुंबई में मनमानी

अतः मुंबई में जो भी रेस्टोरेंट्स या होटल्स "This Restaurant having Fire Complaint" का एक बोर्ड चस्पा कर बेखौफ चलाये जा रहे हैं, उनके खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका की जिम्मेदारी भी बनती है। आज भी अगर आप मुंबई के होटल्स एवं रेस्टोरेंट्स में जायें, तो आप उनमें से बहुत से स्थानों पर बाहर या भीतर यह बोर्ड पायेंगे। हम अपनी जान हथेली पर लेकर इनमें आराम से खाते, पीते या रहते हैं और ये कानून को धता बताकर बिंदास धंधा करते रहते हैं।

जिम्मेदार कौन

क्या बृहन्मुंबई महानगरपालिका या बीएमसी की जिम्मेदारी मात्र एक नोटिस चस्पा करवाकर ख़त्म हो जाती है। रही बात हम भारतीय उपभोक्ताओं की तो हम यह सब कुछ देखते हुए भी आँख पर पट्टी बाँध लेते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि ऐसे सभी रेस्टोरेंट या होटलों का उपभोक्ता भी बायकॉट करें।

दिल्ली का उपहार सिनेमा काण्ड कितना भयावह था आपको याद ही होगा। आज तक उपहार सिनेमा के पीड़ितों को पूर्ण इन्साफ नहीं मिल सका है। जब भी ऐसा कोई काण्ड होता है तो हम बहुत जोश में बहुत कुछ किये जाने की बात करते हैं और फिर एक दो दिन बाद ही सब कुछ भूल जाते हैं। हमारे न्यायालयों को ऐसे मामलों में नगरपालिकाओं एवं फायर डिपार्टमेंट की कार्यवाही के सन्दर्भ में भी सज्ञान लेना चाहिए। सिर्फ एक नोटिस भेजकर और अंडर द टेबल अपनी जेब गर्म कर आप अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन को भी इस सन्दर्भ में अपने सदस्यों को जागरूक भी करना चाहिए और उन्हें कानूनों के पालन के लिए भी बाध्य करना चाहिए।

Newstrack की यह स्टोरी करते हुए हमने बीएमसी एवं होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के लोगों से इस सन्दर्भ में बात करनी की भी कोशिश की। कोई भी ऑन द रिकॉर्ड कुछ बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन ऑफ द रिकॉर्ड सब महसूस करते हैं कि इसमें सभी लोगों की मिली भगत है।

भारत में अग्नि सुरक्षा नियमन

भारतीय भवन निर्माण संहिता (National Building Code of India), 2016: इस संहिता के भाग-4 का शीर्षक है- अग्नि तथा जीवन सुरक्षा (Fire & Life Safety)। इसमें भवनों में आग लगने की घटनाओं तथा उनसे बचाव के आवश्यक उपायों का उल्लेख किया गया है।

इस संहिता में रहवासियों (भवन में रहने वालों) के आधार (Occupancy-wise) पर वर्गीकरण, रचनात्मक पहलू, आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सुरक्षा विशेषताओं की जानकारी दी गई है, जो कि आग से होने वाली जन-धन की हानि तथा खतरों को कम करने के लिये आवश्यक है।

इसमें अग्नि क्षेत्रों (Fire Zone) का सीमांकन, प्रत्येक फायर ज़ोन में इमारतों/भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध, रहवासियों के आधार पर भवनों का वर्गीकरण, संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक घटकों के अग्नि प्रतिरोधी होने के अनुसार भवन निर्माण के प्रकार तथा इमारतों को खाली करने से पहले आग, धुएँ, लपटों या आग से जीवन को होने वाले खतरे को कम करने के लिये आवश्यक उपायों का ज़िक्र है।

संहिता के प्रमुख प्रावधान

आग से बचाव: इसमें इमारतों के डिज़ाइन और निर्माण से संबंधित आग की रोकथाम के पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें विभिन्न प्रकार की इमारतों की निर्माण सामग्री और उनकी फायर रेटिंग का भी वर्णन किया गया है।

जीवन सुरक्षा: इसमें आग और इसी तरह की आपातस्थिति में जीवन सुरक्षा प्रावधानों को कवर करने के साथ ही निर्माण और रहवास सुविधाओं के बारे में जानकारी है, जो आग, धुएँ, लपटों या आग से जीवन को होने वाले खतरे को कम करने के लिये आवश्यक हैं।

अग्नि सुरक्षा: इसमें वर्गीकरण और इमारत के प्रकार के आधार पर भवन/इमारत की अग्नि सुरक्षा के लिये सही प्रकार के उपकरणों को चुनने में सरलता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण उपकरणों (सहायक उपकरण भी) और उनके संबंधित घटकों और दिशा-निर्देशों को शामिल किया गया है।

इस संहिता के भाग-4 में ही ऊँची इमारतों के लिये फायर ड्रिल और निकासी के लिये दिशा-निर्देश भी निर्दिष्ट हैं। इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि महत्त्वपूर्ण भूमि उपयोग के लिये एक दक्ष अग्निशमन अधिकारी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।

मॉडल भवन उपनियम, 2003: अग्नि-संबंधित किसी भी प्रकार की स्वीकृति के लिये बिंदुवार ज़िम्मेदारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी को दी गई है। इसमें यह व्यवस्था की गई है कि भवनों के संबंध में स्वीकृति प्राप्त करने के लिये संबंधित विकास प्राधिकरण भवन/इमारत योजनाओं को मुख्य अग्निशमन अधिकारी के पास भेजेगा। पूर्ण हो चुके किसी भी भवन या इमारत को कुछ आवश्यक अनुमोदनों की आवश्यकता होती है। इनके अभाव में पूर्णता (Completion) प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदान नहीं किया जाएगा तथा भवन या इमारत को इस्तेमाल में लाने की अनुमति नहीं होगी।

वर्तमान संरचना

देश में शहरों का स्वरूप बहुत तेज़ी से बदल रहा है...बिलकुल क्रिया की प्रतिक्रया की तरह यानी श्रृंखला प्रतिक्रिया...तेज़ी से बढ़ती आबादी के लिये शहरों में लोगों के रहने के लिये अधिक स्थान यानी घरों/भवनों/ इमारतों की ज़रूरत है। इसके परिणामस्वरूप शहरों में समय के साथ-साथ आवासीय और व्यावसायिक इमारतों का विस्तार और घनत्व बढ़ता जा रहा है।

ऐसा होने यानी स्थिति विकट हो जाने के बावजूद फायरमास्टर योजना को अपडेट नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा भारत में केवल 30% शहरों में ही कोई मास्टर प्लान है।

अधिकांश कमर्शियल और आवासीय भवन, विशेषकर ऊँची इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन होते देखा जा सकता है।

इन इमारतों से व्यवसाय चलाने वाले अधिकांश व्यवसायी या सोसाइटीज़ अपनी इमारतों में लगी अग्नि निवारक/रोधक प्रणालियों का नियमित रखरखाव नहीं करते।

Mayank Sharma

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