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बुलडोजर एक्शन और बच्ची का एक ऐसा वीडियो, बदल गया SC का फैसला

Supreme Court: आज सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में पांच घरों पर चले अवैध बुलडोजर एक्शन पर कार्यवाही की जिसमे कोर्ट ने जमकर खरी खोटी सुनाई।

Newstrack          -         Network
Published on: 1 April 2025 3:37 PM IST
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Supreme Court: आज सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में पांच घर गिराए जानें मामले को लेकर बड़ी सुनवाई की। कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण को यह आदेश कि जिन पांच घरों को अवैध घोषित करके उनपर बुलडोजर चलाया गया उन पांच पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रूपए हर्जाने का भुगतान किया जाए।

आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उस वीडियो पर भी टिप्पणी की जिसमे बुलडोजर एक्शन के समय एक बच्ची अपने हाथों में किताब लेकर दौड़ती नजर आई है।

बच्ची की वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जवल भुईयां ने यूपी के आंबेडकर नगर की 24 मार्च की घटना का जिक्र करते हुए उसे अतिक्रमण विरोधी अभियान करार दिया। कोर्ट ने कहा कि एक तरफ झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था तो दूसरी तरफ एक 8 साल की बच्ची अपनी किताब लेकर भाग रही थी। इस तस्वीर ने सबको शॉक्ड कर दिया था। कोर्ट ने आगे कहा कि यह हमारी अंतरात्मा को झकझोरता है। राइट टू शेल्टर नाम की कोई चीज होती है। उचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है। उसका पालन होना चाहिए।

जानकरी के लिए बता दें कि प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफ़ेसर और तीन अन्य घरों को ध्वस्त करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाया हुई। सुनवाई के दौरान आज अदालत ने घर गिराने की प्रक्रिया को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि पांचों पीड़ितों को 10 - 10 लाख रूपये हर्जाने का भुगतान करें।

कोर्ट के फैसले का अखिलेश यादव ने किया स्वागत

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का ये आदेश स्वागत योग्य है कि प्रयागराज में 2021 में हुए एक बुलडोज़र एक्शन पर सभी 5 याचिकाकर्ताओं को प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा 6 सप्ताह में 10-10 लाख मुआवज़ा दिया जाए। इस मामले में कोर्ट ने नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर मकान गिरा देने की कार्रवाई को अवैध घोषित किया है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सच तो यह है कि घर केवल पैसे से नहीं बनता और न ही टूटने का जख्म केवल पैसों से भरा जा सकता है। परिवारवालों के लिए तो घर एक भावना है और उसके टूटने पर जो भावनाएं आहत होती हैं। उनका न तो कोई मुआवज़ा दे सकता है न ही कोई पूरी तरह पूर्ति कर सकता है। परिवारवाला कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Sonali kesarwani

Sonali kesarwani

Content Writer

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