गोंडा 2017 : अनुशासन एवं एकता की नसीहतों की जमकर उड़ींं धज्जियां

raghvendra
Published on: 29 Dec 2017 2:32 PM IST
गोंडा 2017 : अनुशासन एवं एकता की नसीहतों की जमकर उड़ींं धज्जियां
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गोंडा : खट्टी-मीठी यादों के साथ साल 2017 की विदाई हो रही है। देश भर में सबसे गंदे शहर का खिताब मिलना जनपद वासियों को आज भी अखर रहा है। सियासी रंगमंच पर यह साल कई मायनों में याद किया जाएगा। जिले में भाजपा और सपा के दो बड़े नेताओं में भी शह-मात का खेल चलता रहा।

राजनीति में अनुशासन एवं एकता की नसीहतों की जमकर धज्जियां उड़ींं। सूबे के सत्ता संग्राम की जद में जिले की राजनीति भी उलझी रही। कई दिग्गजों ने कुर्सी गंवाई तो कई नए चेहरों की ताजपोशी हुई।

भाजपा ने मारी बाजी,सपा हो गयी चित

वर्ष 2017 जिले में खूब राजनीतिक उथल-पुथल रही। सबसे ज्यादा रोमांच विधानसभा चुनाव को लेकर रहा। विधायक बनने के लिए सभी ने पहले दम भरा। इसके बाद पर्दे के पीछे ऐसा खेल चला कि कई चित्त हो गए। जिले की सात विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जहां कमल खिलाया वहीं सपा की साइकिल की रफ्तार थम गयी।

दो राजनीतिक दिग्गजों में साल भर जोर आजमाइश होती रही। मनकापुर के भाजपा विधायक रमापति शास्त्री को कैबिनेट में भी स्थान मिला। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद जिले के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह के भाई नरेंद्र सिंह पंडरी, पाल ब्लाक प्रमुख व पूर्व मंत्री के भाई बबिता सिंह ने नवाबगंज और भतीजे वतन सिंह ने झंझरी ब्लाक प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया।

बाद में इन तीनों ब्लाकों पर भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह के परिजनों व समर्थकों का कब्जा हो गया। कुछ समय बाद पूर्व मंत्री के भतीजे सूरज सिंह की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष श्रद्घा सिंह ने भी इस्तीफा दे दिया। तबसे जिला पंचायत अध्यक्ष/प्रशासक के रूप में जिलाधिकारी जेबी सिंह कार्य कर रहे हैं।

बसपा और कांग्रेस को पूर्व वर्षों की भांति इस साल भी कुछ हासिल नहीं हुआ। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा के लिए साल का अंतिम माह राहत भरा रहा। निकाय चुनाव के परिणाम सपा के पक्ष में रहे। सात निकायों में से चार के अध्यक्ष पद पर सपा का कब्जा हो गया। इससे एक बार फिर सपाइयोंं में उत्साह जगा।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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