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इस डांसर ने प्रेसिडेंट बनने से किया था इनकार, गूगल ने भी मनाया बर्थडे

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AdminBy Admin

Published on 29 Feb 2016 1:26 PM GMT

इस डांसर ने प्रेसिडेंट बनने से किया था इनकार, गूगल ने भी मनाया बर्थडे
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लखनऊ: गूगल ने सोमवार को मशहूर डांसर रुक्मिणी देवी अरुंडेल का 112वां जन्मदिन मनाया। रुक्मिणी देवी को मोरारजी देसाई ने 1977 में प्रेसीडेंट पद की पेशकश की थी, लेकिन उन्‍होंने विनम्रता के साथ इसे अस्वीकार कर दिया था। आईए जानते हैं रुक्मिणी देवी अरुंडेल से जुड़ी बातें।

कौन हैं रुक्मिणी देवी अरुंडेल

-रुक्मिणी देवी अरुंडेल का जन्म ब्राह्मण परिवार में 29 फ़रवरी 1904 को तमिलनाडु के मदुरै जिले में हुआ था।

-वे एक प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना थीं।

-भरतनाट्यम में इन्होंने नृत्य की एक अपनी परंपरा आरम्भ की और इसमें भक्ति भाव भरा।

-1920 के दशक में भरतनाट्यम नृत्य को समाज में अच्छा नहीं माना जाता था, लोग इसका पुरजोर विरोध करते थे।

-उस समय इन्होंने इस नृत्य कला का समर्थन कर इसको अपनाया और लोगों में जागरूकता फैलाई।

जानवरों पर क्रूरता के लिए भी किया जागरूक

-इन्होंने जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए भी अनेक काम किए।

-इन्होंने शाकाहारी भोजन को भी लोगों के बीच प्रमोट किया।

-ये 31 साल तक इंटरनेशनल वेजीटेरियन यूनियन की उपाध्यक्ष रहीं।

राज्यसभा की सदस्य भी हुईं थीं नामित

-1936 में अपने पति के साथ मिलकर इन्होंने डांस एंड म्यूजिक संस्थान "कलाक्षेत्र" भी खोला।

-ये 1952-1956 में दो बार राज्यसभा की सदस्य के तौर पर भी नामित हुईं थी।

-81 साल की उम्र में इनकी मृत्यु 24 फ़रवरी 1986 को चेन्नई में हुई।

इनको मिले सम्मान और पुरस्कार

-1956 में कला के क्षेत्र में पद्मभूषण से सम्मानित ।

-1957 में संगीत नाटक अवार्ड।

-1967 संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप।

-1984 में मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से कालिदास सम्मान।

-Wayne State University (USA) की तरफ से मानद डॉक्टरेट की उपाधि।

-रॉयल सोसाइटी, लंदन की तरफ से जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए क्वीन विक्टोरिया सिल्वर मैडल।

जब ठुकराया राष्ट्रपति पद की पेशकश

-1977 में मोरारजी देसाई ने रुक्मिणी देवी अरुंडेल को राष्ट्रपति पद की पेशकश की थी।

-रुक्मिणी देवी ने विनम्रता के साथ इस पेशकश को अस्वीकार कर दिया।

-उन्‍होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन से ज्यादा महत्व वह अपनी कला को देना चाहती हैं।

-इसलिए वह इस पेशकश को स्वीकार नहीं कर सकती।

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