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गोरखपुर 2017 : गूगल पर तलाशा जाने वाला सूबे का अव्वल शहर

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raghvendraBy raghvendra

Published on 29 Dec 2017 8:38 AM GMT

गोरखपुर 2017 : गूगल पर तलाशा जाने वाला सूबे का अव्वल शहर
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गोरखपुर : पिछले 12 महीनों में गोरखपुर गूगल पर तलाशा जाने वाला सूबे का अव्वल शहर रहा। ये तमगा यूं ही नहीं मिला है। गोरखपुर में खाते में जहां मुस्कराने की कई वजहें हैं तो वहीं कई मौकों पर इस जिले को उन वजहों से भी सुर्खियां मिलीं जिसे वह पलटकर देखना नहीं चाहता।

गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की कमान मिलना सबसे बड़ा घटनाक्रम था। इसके बाद राज्यसभा सांसद और पूर्व मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को मोदी सरकार में वित्त राज्यमंत्री का दर्जा मिला।

एम्स की सारी बाधाएं दूर

गोरखपुर के लिए विकास की किरण दिखाने वाले साल के रूप में वर्ष 2017 को याद रखा जाएगा। खाद कारखाने की स्थापना से लेकर एम्स का निर्माण अहम कदम है। खाद कारखाना में किस देश के प्लान्ट से यूरिया का उत्पादन होगा, यह अगले सप्ताह तक साफ हो जाएगा। वहीं एम्स की बाउंड्री बनकर तैयार हो गई है। नई दिल्ली में हाल में हुई बैठक में विभिन्न विभागों की बाधाओं को दूर कर दिया गया।

तीन महीने के अंदर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में निवेश को लेकर भी माहौल बना है। स्थानीय उद्यमियों ने 800 करोड़ से अधिक का खाका तैयार किया है। बाबा रामदेव की पतंजलि गीडा में फूड पार्क स्थापित करने की कवायद में जुटी है।

गीडा के विस्तार के लिए अहम परियोजना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए यूपी सरकार ने बजट में प्रावधान भी कर दिया है। नौसढ़ से बाघागाढा तक फोरलेन का निर्माण, सर्किट हाउस से एयरपोर्ट तक फोरलेन, गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन, गोरखपुर-देवरिया फोरलेन के लिए बजट मिलने से निर्माण को रफ्तार मिली है। गोरखपुर से वाराणसी और कालेसर से जंगल कौडिय़ा फोरलेन का निर्माण भी गति पकड़ चुका है।

सर्किट हाउस परिसर में करीब 17 करोड़ से मिनी सचिवालय का निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है। वही चिडिय़ाघर भी धीरे-धीरे स्वरूप लेने लगा है। नौसढ़ से कालेसर तक एलईडी स्ट्रीट लाइट के साथ शहर के 42 हजार पोल में एलईडी बल्ब लगाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां

वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी उपलब्धियां मिली हैं। डीडीयू के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो.चित्तरंजन मिश्र और प्रो.सुरेन्द्र दुबे साहित्य अकादमी के सदस्य बने तो डा.प्रदीप पांडेय, वेद प्रकाश पांडेय, रणविजय सिंह और प्रो.ईश्वर शरण को हिन्दी साहित्य का सदस्य नामित किया गया। वहीं प्रो सदानंद गुप्त हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष बने।

मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने जापान, बैंकाक और मलेशिया के विश्वविद्यालयों के साथ बेहतर शिक्षा और शोध कार्यों को लेकर करार किया है। इस साल पीपीगंज को ब्लाक का दर्जा मिला तो उनवल को टॉउनएरिया का। बांसगांव को नया जिला बनाने की कवायद शुरू हुई तो कैम्पियरगंज को नगरपालिका बनाने की।

जख्म दे गया बीआरडी मेडिकल कॉलेज

गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के चलते दुनिया में चर्चित हुआ। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के चंद महीनों बाद ही 10 और 11 अगस्त को 36 से अधिक मासूमों की मौत से सरकार सवालों के घेरे में आ गई थी।

ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म को भुगतान में लापरवाही और बच्चों की मौत प्रकरण में तत्कालीन प्राचार्य डॉ.राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉ.पूर्णिमा शुक्ला, बाल रोग विभाग के चिकित्सक डॉ कफील समेत छह अन्य लोग जेल भेजे जा चुके हैं। अगस्त महीने में राप्ती, गोर्रा, आमी और घाघरा नदी में नेपाल की नदियों के चलते आए उफान के बाद दर्जनों लोगों की मौत हुई और हजारों एकड़ फसल बर्बाद हुई।

इस दौरान 200 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति हुई थी। मेट्रो परियोजना के शहर में दौडऩे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मानबेला में करीब 400 एकड़ और गीडा के तेनुहारी में 300 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण फंसने से विकास की उम्मीदों पर ग्रहण लगा है। करोड़ों खर्च के बाद सडक़ों को गड्ढा मुक्त करने के दावे पर पीडब्ल्यूडी और नगर निगम पूरी तरह विफल दिख रहे हैं।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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