ओलावृष्टि आपदा पर सरकार का रवैया उदासीन व उपेक्षापूर्ण: अखिलेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को यूपी में हुई ओलावृष्टि की आपदा पर राज्य सरकार का रवैये को उदासीन और उपेक्षापूर्ण करार देते हुए कहा है कि भाजपा सरकार किसान को तुरंत अंतरिम राहत देने के बजाए फसल को हुए नुकसान के आंकलन का बहाना ढूंढ रही है।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को यूपी में हुई ओलावृष्टि की आपदा पर राज्य सरकार का रवैये को उदासीन और उपेक्षापूर्ण करार देते हुए कहा है कि भाजपा सरकार किसान को तुरंत अंतरिम राहत देने के बजाए फसल को हुए नुकसान के आंकलन का बहाना ढूंढ रही है।

सपा अध्यक्ष ने गुरुवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में किसान तो पहले से ही परेशानियों से घिरा था और बेमौसम की बरसात के साथ भीषण ओलावृष्टि से उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसकी गेहूं, सरसों, मटर, चना की फसल चैपट हुई है। आम के बौर टूट गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता में कारपोरेट होने के कारण किसान, गरीब पर उनका ध्यान नहीं जाता है।

अखिलेश ने कहा कि सर्वविदित है कि प्राकृतिक आपदा से त्रस्त किसान की फसल के नुकसान का आंकलन कितना सही-गलत होता है। इसमें लाल फीताशाही की देरी भी लगती है। गरीब किसान को अपनी फसल का मुआवजा समय से मिले तो उसे राहत भी मिले पर भाजपा सरकार तो चाहती ही नहीं है कि किसानों का भला हो। किसान भी भाजपा के इन हथकंडो से परिचित हैं।

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गन्ना किसान के बकाये पर नहीं मिला  ब्याज

सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा ने पहले फसल की लागत का ड्योढा मूल्य देने की घोषणा की थी, वह तो दूर उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पाया। गन्ना किसान के बकाये पर 14 दिनों बाद ब्याज मिलना था, वह किसी को नहीं मिला।

किसान की आय दुगनी करने का फार्मूला भी अभी तक सामने नहीं आया है। कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है। किसान की मुसीबत इन दिनों अन्ना पशुओं ने भी मचा रखी है। बड़ी तादाद में आकर ये खेतों में खड़ी फसल चर जाते है।

अन्ना पशुओं से बचाव के लिए किसान या तो मंहगी फेंसिंग कराता है या फिर खुद किसान चैकीदार बनकर रात-रात खेत की रखवाली करता है। मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास में ओले गिरते नहीं देखते तो शायद वे इस आपदा को भी तुकबंदी में उड़ा देते।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा राज उत्तर प्रदेश के लिए मुसीबत बना हुआ है। इस सरकार ने विकास का कोई काम नहीं किया। शिक्षा, स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं चैपट है, नौजवान बेरोजगारी के शिकार हैं और मंहगाई चरम पर है। प्रदेश को ऐसा नेतृत्व मिला है जो अपनी गलतियां छुपाने, साम्प्रदायिक बयान देकर बहलाने के लिए ‘तुकबंदी‘ का सहारा लेकर निश्चिंत सो जाता है। प्रदेश में जनता तबाह है उसकी समस्याओं के समाधान में उसकी कोई रूचि नहीं है।

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