आलू पर धांसू प्लान: बर्बादी को ऐसे रोकेगी सरकार, जानें क्या है स्कीम

बताया जाता है कि इसी आलू से मल्टीनेशनल कम्पनियां चिप्स तथा आलू से बने कई अन्य उत्पादों का निर्माणकरते हैं। अर्न्तराष्ट्रीय आलू केन्द्र की स्थापना होने से आसपास के किसानों को काफी सुविधा होगी और उन्हे अपनी फसल का उचित लाभ मिल सकेगा।

लखनऊ: आए दिन होने वाली आलू की बर्बादी को अब रोका जा सकेगा, क्योंकि प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार के सहयोग से आगरा मेंं अर्न्तराष्ट्रीय आलूकेन्द्र की स्थापना के बाद इसे बचाया जा सकता है। आलू किसानों की यह मांग काफीपुरानी है। दरअसल आगरा के आलू की मुख्य मांग दक्षिण भारत के अलावा कर्नाटक,तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना महाराष्ट्र, मप्र, राजस्थान, पंजाब,हरियाणा में भी आलू भेजा है। जबकि निर्यात नेपाल, भूटान, वर्मा, बांग्लादेश,श्रीलंका तक होता है।

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बताया जाता है कि इसी आलू से मल्टीनेशनल कम्पनियां चिप्स तथा आलू से बने कई अन्य उत्पादों का निर्माणकरते हैं। अर्न्तराष्ट्रीय आलू केन्द्र की स्थापना होने से आसपास के किसानों को काफी सुविधा होगी और उन्हे अपनी फसल का उचित लाभ मिल सकेगा। इस केंद्र की स्थापना होने से आलू की पैदावार करने वाले किसानों को काफी लाभ मिलेगा। यूपीमें प्रति हेक्टेयर आलू उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हर साल करीबन 155 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा किया जाता है

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साथ ही प्रसंस्करण से संबंधित प्रजातियों मेंवृद्धि होगी। इससे आलू का निर्यात बढ़ेगा। बतातें चले कि सूबे में में करीब 7 लाख हेक्टेयर जमीन में आलूका उत्पादन किया जाता है। इस तरह हर साल करीबन 155 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा किया जाता है। वहीं देश के कुल उत्पादन का करीब 30 फीसदी आलू की पैदावार उत्तरप्रदेश मेंकी जाती है। अगर तुलना की जाये, तो आलूके उत्पादन में दुनिया के 4-5 देश ही उत्तरप्रदेश से आगे हैं। जबकि प्रदेश मेंसबसे ज्यादा आलू आगरा मंडल में होता है।

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प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र स्थापना होने के बाद इसे इंटरनेशनल सेंटर ऑफ पोटैटो (सीआईपी) के नाम दिया जाएगा। इसका मुख्यालय भीबनकर तैयार है, जोकि पेरू के राजधानी शहर लीमा की तर्ज पर बनाया गया है। पिछले सप्ताह ही प्रदेश के उद्यान राज्यमंत्री श्रीराम चौहान की केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से वार्ता हुई जिसमें केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकारको इसके लिए अपनी सैद्वान्तिक सहमति दे दी।