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अब भारी पड़ेगा यूपी के प्रतीक चिन्ह का दुरूपयोग

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतीक चिह्न (लोगो) का दुरुपयोग करने वालों की अब खैर नहीं होगी। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना हो सकता है।

Dharmendra kumar

By Dharmendra kumar

Published on 29 July 2019 4:44 PM GMT

अब भारी पड़ेगा यूपी के प्रतीक चिन्ह का दुरूपयोग
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतीक चिह्न (लोगो) का दुरुपयोग करने वालों की अब खैर नहीं होगी। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश का राज्य संप्रतीक (अनुचित प्रयोग प्रतिषेध) विधेयक, विधानपरिषद में पारित होने के बाद अब प्रदेश सरकार इसकी नियमावली बना रही है और जल्द ही इसे लागू कर दिया जायेगा।

विधेयक के अनुसार राज्य सरकार के प्रतीक चिह्न का किसी लेटर पैड, विजिटिंग कार्ड आदि पर प्रयोग किया जाना सरकार की गरिमा का द्योतक है। लेकिन प्रदेश में इससे संबंधित किसी तरह का कानून न होने की वजह से प्रतीक चिह्न का अनधिकृत प्रयोग दंडनीय अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। इसीलिए भारत सरकार के राज्य संप्रीतक अधिनियम-2005 की तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यह नियम बनाया है।

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यूपी सरकार बनायेगी नियमावली

विधेयक में कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए नियमावली बनाने के लिए राज्य सरकार को अधिकृत किया गया है। के की लिबन जाने के बाद कोई भी व्यक्ति किसी व्यापार, कारोबार, आजीविका के लिए या किसी पेटेंट के नाम में या किसी व्यापारिक चिन्ह या डिजाइन में यूपी सरकार के प्रतीक चिन्ह को प्रयोग नहीं कर सकेगा।

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ये है दंड

इस नियम के लागू होने के बाद इसका उल्लघंन करने वाले व्यक्ति को दो वर्ष की जेल या पांच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही देना होगा। अगर कोई व्यक्ति इस कानून के तहत एक बार दोषी ठहराया जा चुका है और वह दोबारा इस कानून का उल्लघंन करता है तो दूसरे बार भी उसे दंड के तौर पर कम से कम छह माह और अधिकतम दो साल की जेल होगी।

क्या है उत्तर प्रदेश का लोगो

उत्तर प्रदेश का राजकीय संप्रतीक प्रयागराज स्थित गंगा और यमुना नदियों के संगम, अवध के पूर्व मुस्लिम शासकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए मछली का जोड़ा और राज्य में स्थित अयोध्या में उत्पन्न हुये हिन्दू देवता राम का प्रतिनिधित्व करने के लिए धनुष एवं बाण का चित्रण करने वाले चक्राकार मुद्रा से बना है।

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