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गुजरात का कहर पहुंचा यूपी, शुरू किये गए बचाव के उपाय

प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी संजय आर. भूसरेड्डी ने गुजरात राज्य में टिड्डी के प्रकोप की खबरों के दृष्टिगत प्रदेश में गन्ने की फसल को इन कीटों से बचाने के लिये किसानों में जागरूकता अभियान चलाने के लिये सभी विभागीय अधिकारियों एवं गन्ना शोध केन्द्र के वैज्ञानिकों को निर्देश जारी किये हैं।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 12 Jan 2020 3:25 PM GMT

गुजरात का कहर पहुंचा यूपी, शुरू किये गए बचाव के उपाय
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लखनऊ। गुजरात का कहर काफी भयावह है। वहां टिड्डियों के आक्रमण से किसानों का करोड़ों का नुकसान हुआ है। अब उत्तर प्रदेश में भी टिड़्डियों के आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार इस खतरे को भांप कर सतर्क हो गई है और किसानों को इस आपदा से बचाव के तरीकों का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।

पिछले दिनों खबर आई थी कि गुजरात के बनासकांठा, महेसाणा, पाटन जिले में टिड्डी का कहर खत्म नहीं हो रहा है। टिड्डी दल के हमले से किसान परेशान हैं, टिड्डी के आतंक ने किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। अचानक टिड्डियों के हमले से क्षेत्र के किसानों में हड़कंप मच गया है। किसान टिड्डियों को भगाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। किसान कहीं ताली बजाकर टिड्डियों को उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं तो कहीं हाथों में बंदूक लेकर टिड्डियों पर ही गोलियां चला रहे हैं।

प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एवं चीनी संजय आर. भूसरेड्डी ने गुजरात राज्य में टिड्डी के प्रकोप की खबरों के दृष्टिगत प्रदेश में गन्ने की फसल को इन कीटों से बचाने के लिये किसानों में जागरूकता अभियान चलाने के लिये सभी विभागीय अधिकारियों एवं गन्ना शोध केन्द्र के वैज्ञानिकों को निर्देश जारी किये हैं।

सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लगातार गॉवों का भ्रमण करके उक्त कीट के संभावित आक्रमण को विफल करने के लिए किसानों को सजग रहने और जागरूक रहने को कहा गया है। इसके लिए पम्पलेट्स, हैंडबिल का वितरण करने, कीट से बचाव के उपायों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिये गये हैं।

बचाव ही सुरक्षा का उपाय

चूंकि टिड्डियां बहुत अधिक संख्या में एक साथ आक्रमण करती हैं और बहुत कम समय में फसल को चट कर जाती हैं अतः इनका आक्रमण होने के बाद फसल को बचाना बेहद मुश्किल होता है, ऐसी स्थिति में पूर्व से ही तैयारी करके इनसे बचाव किया जा सकता है।

कम पानी, सूखा व ग्रीष्म की दशा में उनकी सक्रियता और बढ़ जाती है। अतः अभी से किसानों को जागरूक करने तथा टिड्डियों से बचाव के उपायों से अवगत कराने को गन्ना विकास विभाग का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।

गन्ना आयुक्त, ने बताया कि टिड्डियों से बचाव के लिये खेत की मेड़ों से घास को साफ सफाई करना आवश्यक है, क्योंकि ये घास में ही अंडे देती है। टिड्डियां शोर होने से डर जाती हैं। अतः इनका व्यापक प्रकोप होने की दशा में ढोल, थाली आदि बजाना चाहिए ताकि वे डर कर भाग जाएं।

राम केवी

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