Gyanvapi ASI Survey Report: अयोध्या की राह पर काशी और मथुरा, देखिए क्या-क्या मिला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को

Gyanvapi ASI Survey Report: Newstrack ने विशेष रूप से सर्वेक्षण रिपोर्ट हासिल की है, जिसमें कई तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें हनुमान, गणेश और नंदी जैसे हिंदू देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां दिखाई देती हैं।

Neel Mani Lal
Published on: 27 Jan 2024 12:46 PM GMT (Updated on: 27 Jan 2024 3:19 PM GMT)
Gyanvapi ASI Survey Report
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Gyanvapi ASI Survey Report

Gyanvapi ASI Survey Report: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद पर अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट में वही बातें कहीं हैं जिनके बारे में बरसों बरस से सामान्य रूप से कहा और जाना जा रहा था - यह मस्जिद जिस जगह बनी है वहां कभी मन्दिर हुआ करता था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर के अपने सर्वेक्षण में पाया है कि मौजूदा संरचना के निर्माण से पहले ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान पर एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था।

माना जाता है कि 1669 में औरंगजेब द्वारा एक पुराने शिव मंदिर को ध्वस्त करने के बाद इस मस्जिद का निर्माण करवाया गया था। हिंदू संगठनों का लंबे समय से यह दावा रहा है कि मस्जिद के नीचे हिंदू मंदिर के अवशेष दबे हुए हैं और इस स्थान को उन्हें वापस लौटाया जाना चाहिए।

Newstrack पास एएसआई की रिपोर्ट है।


इसमें बताया गया है कि उस स्थल पर क्या क्या अवशेष पाए गए। Newstrack ने विशेष रूप से सर्वेक्षण रिपोर्ट हासिल की है, जिसमें कई तस्वीरें शामिल हैं, जिनमें हनुमान, गणेश और नंदी जैसे हिंदू देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां दिखाई देती हैं।


तस्वीरों में कई योनिपट्टों (शिवलिंग का आधार) के साथ-साथ एक शिव लिंग का भी पता चलता है, जिसका निचला हिस्सा या आधार गायब है।


रिपोर्ट में अन्य वस्तुओं जैसे सिक्के, फ़ारसी में खुदा हुआ एक बलुआ पत्थर का स्लैब, एक मूसल और अलग-अलग अवस्था में क्षतिग्रस्त मूर्तियों की खोज को भी दर्शाया गया है।


839 पेज की एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में ये पाया गया है कि मस्जिद से पहले वहां हिन्दू मंदिर था। उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी।


एएसआई ने यह पाया है कि हिन्दू मंदिर का स्ट्रक्चर 17वीं शताब्दी में तोड़ा गया है । मस्जिद बनाने में मलबे का उपयोग किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार, दो तहखानों में हिन्दू देवी-देवताओं का मलबा मिला है।


एएसआई की रिपोर्ट में ये पाया गया है कि मस्जिद की पश्चिमी दीवार एक हिन्दू मंदिर का भाग है।


पत्थर पर फारसी में मंदिर तोड़ने के आदेश और तारीख मिली है।


महामुक्ति मंडप लिखा पत्थर भी मिला है। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वह अब वजू खाने के सर्वे के लिए मांग करेंगे।


उन्होंने कहा, "एएसआई ने कहा है कि वहां पर 34 शिलालेख हैं, जहां पर पहले से मौजूद हिंदू मंदिर के थे।


जो पहले हिंदू मंदिर था उसके शिलालेख को पुन:उपयोग कर ये मस्जिद बनाई गई।


इनमें देवनागरी, ग्रंथ, तेलुगु और कन्नड़ लिपियों में शिलालेख मिले हैं।


इन शिलालेखों में जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर जैसे देवताओं के तीन नाम मिलते हैं।


जानकारी के अनुसार इस सर्वे रिपोर्ट में स्वस्तिक के निशान, नाग देवता के निशान, कमल पुष्प के निशान, घंटी के निशान, ओम लिखा हुआ निशान, टूटी हुई विखंडित हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां भारी संख्या में मिली हैं।


इसके साथ ही मंदिर के टूटे हुए खंभों के अवशेष मिले हैं.


वहीं जीपीआरएस द्वारा जो सर्वे हुआ है उसमें विखंडित शिवलिंग मिले हैं।


सभी साक्ष्य वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर संकलित किए गए थे।


स्ट्रक्चर के तीनों गुंबद के ऊपर भी जांच टीम ने जांच की थी।


एएसआई की टीम अपने उपकरणों के जरिये परिसर में मिली कलाकृतियों और मूर्ति के कालखंड का पता लगाया था।


रिपोर्ट में कही गई प्रमुख बातें इस प्रकार हैं-

- गलियारों में खंभों और प्लास्टरों का सूक्ष्म अध्ययन बताता है कि वे मूल रूप से एक पूर्व-मौजूद हिंदू मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें वर्तमान संरचना में फिर से इस्तेमाल किया गया।

- कमल पदक के दोनों ओर नक्काशीदार व्याल आकृतियों को क्षत-विक्षत कर दिया गया था और कोनों से पत्थर का द्रव्यमान हटाने के बाद, उस स्थान को पुष्प डिजाइन से सजाया गया था।


- यह अवलोकन पश्चिमी कक्ष के उत्तरी और दक्षिणी दीवारों पर अभी भी मौजूद दो समान प्लास्टरों द्वारा समर्थित है।

- जहां जांच की गई उस परिसर से हिंदू देवी-देवताओं से संबंधित बहुत सारी टेराकोटा, पत्थर और कांच की वस्तुएं मिली हैं।


- मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था।

- जांच के दौरान विभिन्न प्रकार की टेराकोटा वस्तुएं बरामद की गईं, जिनमें देवताओं की मूर्तियां, नर और मादा आकृतियां, ईंटें और टाइलें, स्लिंग बॉल आदि शामिल हैं।


- पश्चिमी दीवार क्षेत्र में मलबे से हनुमान और गणेश की खंडित आकृतियाँ मिलीं।

- विभिन्न प्रकार की पत्थर की वस्तुएं मिलीं, जिनमें देवी-देवताओं की मूर्तियां, मूसल, खुदा हुआ स्लैब आदि शामिल हैं।


- शिव लिंग, विष्णु, कृष्ण, हनुमान, गणेश आदि की मूर्तियां मिली हैं।

- दो कांच की वस्तुएं, एक पेंडेंट और एक टूटा हुआ शिव लिंग मिला है।


- परिसर से विभिन्न कालखंडों के सिक्के बरामद किए गए हैं।


- तीन सिक्कों पर फ़ारसी में किंवदंतियाँ थीं और ये सिक्के शाह आलम द्वारा जारी किए गए थे।


- ब्रिटिश शासनकाल के भी सिक्के पाए गए। ये सिक्के ईस्ट इंडिया कंपनी, महारानी विक्टोरिया, एडवर्ड सप्तम और जॉर्ज पंचम के थे और कुछ सिक्के जंग के कारण पहचानना मुश्किल थे।


- माधव राव सिंधिया का एक तांबे का सिक्का भी मिला था।

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