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प्रदेश के हजारों गन्ना किसानों का भुगतान होने से कृषकों में फैली खुशी की लहर

इसी क्रम में सहकारी गन्ना समिति, शामली एवं छितौनी में किसानों के अनपेड गन्ना मूल्य के व्यपहरण में लिप्त पाये गये कार्मिकों के विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ-साथ पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। गन्ना समिति, शामली में अभीतक लगभग रू.70.00 लाख की वसूली भी करायी गयी है।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 9 Feb 2019 2:15 PM GMT

प्रदेश के हजारों गन्ना किसानों का भुगतान होने से कृषकों में फैली खुशी की लहर
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लखनऊः गन्ना मूल्य का भुगतान एवं गन्ना किसानों की अन्य सभी समस्याओं का सम्पूर्ण समाधान कराने के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ के निर्णय एवं मा. गन्ना मंत्री, सुरेश राणा के मार्गदर्शन में प्रदेश के गन्ना किसानों के नये सत्र के गन्ना मूल्य के साथ-साथ पूर्व वर्षों के बकाया गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान कराया जाना शासन की प्राथमिकता है।

गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान कराये जाने के क्रम में किसानों का ऐसा बकाया गन्ना मूल्य जो कतिपय कारणों से भुगतान नहीं हो पा रहा था, के भुगतान कराने की दृष्टि से गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों में वर्षों से लम्बित अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान की समीक्षा की गयी। समीक्षा के दौरान प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त द्वारा यह निर्देश दिया गया कि गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों में विशेष अभियान चलाकर वर्षों से लम्बित पड़े अनपेड गन्ना मूल्य का भुगतान प्रत्येक दषा में सुनिष्चित कराया जाय तथा कृषकवार भुगतान का विवरण आगामी एक माह में प्रस्तुत किया जाये।

अब तक 62,040 गन्ना कृषकों के वर्षों से लम्बित पड़े गन्ना मूल्य रू.81 करोड़ का हुआ भुगतान

गन्ना एवं चीनी आयुक्त की मासिक समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देश के क्रम में प्रदेश के सभी गन्ना परिक्षेत्रों में पूरी तन्मयता के साथ गन्ना समितियों में गन्ना किसानों के लम्बित पड़े अनपेड गन्ना मूल्य का कृषकवार विवरण तैयार करने एवं उसे उनके खातों में भेजने हेतु विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि, मेरठ, सहारनपुर मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, देवीपाटन एवं फैजाबाद मण्डल की गन्ना समितियों में हजारों कृषकों की एक बड़ी धनराषि अनपेड गन्ना मूल्य के रूप में पड़ी हुई थी, कृषकों की इतनी बड़ी धनराषि भुगतान हेतु अनपेड के रूप में लम्बित होने के कारणों का पता लगाने पर विदित हुआ कि, विगत सत्रों में कुछ ऐसे कृषकों को गन्ना मूल्य भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है, जिनका बैंक खाता गन्ना समिति में उपलब्ध नहीं है अथवा वास्तविक किसान मृतक हो चुके हैं और उनके वारिस को भी भुगतान नहीं हो सका है।

ऐसे कृषक जिनका बैंक खाता समिति में उपलब्ध नहीं है, उन कृषकों का बैंक खाता विवरण एकत्रित कर तथा ऐसे कृषक मृतक हो चुके हैं, उन कृषकों के वारिसों से उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र प्राप्त कर अनपेड गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों/उत्तराधिकारियों के खातों में आर.टी.जी.एस. अथवा एकाउन्ट पेयी चेक के माध्यम से कराया जाये तथा अनपेड गन्ना मूल्य के व्यपहरण में संलिप्त कार्मिकों के विरूद्ध दण्डात्मक/विधिक कार्यवाही कर व्यपहरित धनराशि की वसूली भी व्यपहरणकर्ताओं से सुनिश्चित की जाये।

ऐसी चीनी मिलें, जो विगत कई वर्षों से सीधे गन्ना किसानों के खातें में गन्ना मूल्य भेज रही हैं तथा उनके द्वारा यह बताया गया है कि उनके यहां कोई अनपेड गन्ना मूल्य शेष नहीं है, ऐसी चीनी मिलें अपने स्तर पर जांच कर यह सुनिष्चित कर लें कि उनके स्तर पर किसी भी कृषक का किसी भी वर्ष का गन्ना मूल्य लम्बित नहीं है, यदि किसी कृषक का भुगतान किन्हीं कारणों से लम्बित है, तो उसका भुगतान प्रत्येक दषा में सुनिष्चित करायें एवं तत्पष्चात भुगतान लम्बित न होने का प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करें।

विभागीय अधिकारियों द्वारा सघन अभियान चलाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 04 परिक्षेत्रों, जिनमें सहारनपुर में 12,631 कृषकों को रू.29.85 करोड़, मेरठ में 13,910 कृषकों को रू.16.87 करोड़, मुरादाबाद में 2,014 कृषकों को रू.2.40.करोड़, बरेली में 9,793 कृषकों को रू.8.56 करोड़ का अनपेड गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। साथ ही लखनऊ परिक्षेत्र में 15,849 कृषकों को रू.17.00 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। वही पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो परिक्षेत्रों फैजाबाद में 5,299 कृषकों को रू.3.81 करोड़, देवीपाटन में 2544 कृषकों को रू.2.43 करोड़, इस प्रकार कुल प्रदेश के 62,040 गन्ना कृषकों को रू.81.00 करोड़ अनपेड गन्ना मूल्य का भुगतान सुनिश्चित कराया गया।

चूंकि उपरोक्तानुसार जिस भुगतान की धनराषि विगत कई वर्षों से गन्ना समितियों/चीनी मिलों में पड़ी होने के कारण गन्ना किसान इसे भूल चुके थे तथा इन्होंने याद भी नहीं था कि हमारे अथवा हमारे परिवारीजनों की कोई गन्ना मूल्य भी धनराषि समिति या चीनी मिल के स्तर पर बकाया है तथा उन्हें गन्ना विभाग खुद ही प्रचार-प्रसार कर इस बकाया पैसे को उपलब्ध करायेगा। समिति/विभाग की सक्रियता के कारण उनका भूला-बिसरा पैसा मिलने से किसानों में हर्ष की लहर फैल गयी तथा गन्ना समितियों के प्रति किसानों का विष्वास और प्रगाढ़ हुआ।

यही नहीं गन्ना किसानों की गन्ना समितियों में पड़ी इस धनराषि पर जिन समिति/चीनी मिल कर्मचारियों ने इस धनराषि को व्यपहरित करने की कोषिष की, तो उसके विरूद्ध सख्त दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए सरकार ने यह संदेष दिया कि गन्ना किसानों की गाढ़ी कमाई पर यदि कोई निगाह डालने का प्रयास करेगा, तो यह अपराध क्षम्य नहीं होगा। इसी क्रम में सहकारी गन्ना समिति, शामली एवं छितौनी में किसानों के अनपेड गन्ना मूल्य के व्यपहरण में लिप्त पाये गये कार्मिकों के विरूद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ-साथ पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। गन्ना समिति, शामली में अभीतक लगभग रू.70.00 लाख की वसूली भी करायी गयी है।

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