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Hapur: जनपद में पैदा हुए फूलों की विदेशों तक फैल रही महक, किसानों की बढ़ी आमदनी
Hapur: जनपद में फूलों की खेती लगातार बढ़ती जा रही है। यहाँ पैदा हो रहे फूल कई प्रदेशों के साथ ही विदेशों तक अपनी खुशबू फैला रहा है।
Hapur News: जनपद में फूलों की खेती लगातार बढ़ती जा रही है। यहाँ पैदा हो रहे फूल कई प्रदेशों के साथ ही विदेशों तक अपनी खुशबू फैला रहा है। इस वर्ष फूलों की खेती करने वाले किसानों को अच्छे दाम मिल रहे है। जिसके कारण किसानों का फूलों की खेती की तरफ रुझान बढ़ रहा है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर फूलों की आपूर्ति हो रही है।
450 हेक्टेयर में की जा रही है फूलों की खेती
जनपद में फूलों की खेती किसानों के लिए आमदनी का अच्छा स्रोत बन रही है।यहाँ के किसानों के द्वारा उगाए गए विभिन्न प्रकार के फूल पैकिंग करने के बाद देश के कई राज्यों के साथ ही विदेशों तक भेजे जा रहे है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष फूलों के दाम अच्छे मिलने के कारण किसानों में खुशी का माहौल है। जनपद के विभिन्न गांवों में इस वर्ष 450 हेक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है।
इन फूलों की रहती है सबसे ज्यादा डिमांड
इस समय ग्लेडरर्स, ग्लेडियोलस, गुलाब, गुलदावरी, जिप्सोलस, रजनीगंधा की फूलों की खेती अधिक हो रही है। इन फूलों को गाज़ीपुर की मंडी के साथ ही तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, मिजोरम, दिल्ली, मध्यप्रदेश के साथ ही रूस, कनाडा तक भेजा जा रहा है। करीब 20 एकड़ में फूलों की खेती करने वाले श्रद्धानद प्रधान ने बताया कि उनकी गाजीपुर में आढ़त है। जहाँ वह अपने खेतों में उगने वाले फूलों की रूस सहित कई देशों में बेचते है।
उन्होंने बताया कि जिप्सोफिला फूल की सबसे अधिक मांग है। इसका इस्तेमाल वरमाला और महिलाओं द्वारा गजरे में लगाने में किया जाता है। लेकिन कई बार मांग नही होने पर किसानों को काफी नुकसान हो जाता है। किसान ओमवीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष के फूलों से उनको अच्छी आय प्राप्त हुई है।दीपावली के बाद से फूलों के रेट में काफी इजाफा है।
यह है थोक बाजार में फूलों की स्थिति
गुलाब का प्रति फूल 13 रुपये
गुलदावरी कट फ्लावर 06 रुपये
गेंदा प्रति किलो 125 रुपये
जिप्सोफिला प्रति फूल 55 रुपये
फूलों की खेती को दिया जा रहा है बढ़ावा
जिला उद्यान अधिकारी डॉक्टर हरित कुमार ने बताया कि फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। फूलों की खेती के लिए विभाग द्वारा अनुदान भी दिया जाता है।