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बलात्कार की शिकार किशोरी के अनचाहे गर्भ का मामला हाई कोर्ट की दहलीज पर

कोर्ट ने मामले की संवदेनशीलता को देखते हुए केजीएमयू के वाइस चांसलर को चार डाक्टरों का एक मेडिकल बेार्ड गठित कर पीड़िता की हालत के बाबत जांच करके 18 जुलाई को रिपेार्ट तलब की है।  कोर्ट ने कहा कि बोर्ड अपनी जाचं में यह देखेगा कि पीड़िता और उसके पेट में पल रहे 21 हपते के बच्चे की शारीरिक हालत क्या है। केार्ट ने बोर्ड से कहा है कि वह अपनी रिपेार्ट में यह भी स्पष्ट करे कि यदि पीड़िता बच्चे को जन्म देती है तो उसकी मानसिक हालत क्या होगी।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 16 July 2019 4:14 PM GMT

बलात्कार की शिकार किशोरी के अनचाहे गर्भ का मामला हाई कोर्ट की दहलीज पर
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21 और 22 फरवरी को अधिवक्ताओं की गैर मौजूदगी में नहीं होगा प्रतिकूल आदेश 
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विधि संवाददाता। लखनऊ

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दुराचार पीड़िता एक नाबालिग ने 21 सप्ताह के अपने गर्भ को गिराने की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की है।

कोर्ट ने मामले की संवदेनशीलता को देखते हुए केजीएमयू के वाइस चांसलर को चार डाक्टरों का एक मेडिकल बेार्ड गठित कर पीड़िता की हालत के बाबत जांच करके 18 जुलाई को रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड अपनी जाचं में यह देखेगा कि पीड़िता और उसके पेट में पल रहे 21 हपते के बच्चे की शारीरिक हालत क्या है। कोर्ट ने बोर्ड से कहा है कि वह अपनी रिपेार्ट में यह भी स्पष्ट करे कि यदि पीड़िता बच्चे को जन्म देती है तो उसकी मानसिक हालत क्या होगी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने केा कहा है कि गर्भपात करने केा लेकर पीड़िता व उसकी माता पिता की क्या राय है। यह आदेश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय व जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने नाबालिक पीड़िता के पिता की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया।

याचिका में कहा गया कि पीड़िता के साथ उसके पिता की उम्र के व्यक्ति ने दुराचार किया जिसके बाद वह गर्भवती हो गयी है। इस बारे में पीड़िता के पिता ने अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी भी लिखायी है।

कहा गया कि पीड़िता 21 सप्ताह से गर्भवती है अतः कानूनन उसका गर्भपात नहीं कराया जा सकता है । याची की ओर से कोर्ट में कहा गया कि विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अदालत उसे गर्भपात करने की अनुमति प्रदान करे।

याचिका पर सुनवायी करते हुए कोर्ट ने केजीएमयू के वाइस चांसलर को मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता की मानसिक व शारीरिक जांच करने के आदेश दियें हैं। कोर्ट ने पीड़िता को बुधवार को केजीएमयू में उपस्थित रहने को कहा है।

दरअसल मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट की धारा 3 के तहत 20 हपते तक के भू्रण का नियमानुसार गिराया जा सकता है । उससे ज्यादा की इजाजत एक्ट के तहत नहीं है।

राम केवी

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