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साम्प्रदायिक सौहार्द की ज्योति जला रहे जेल में मुस्लिम और हिंदू कैदी

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Published on 9 Jun 2016 8:48 AM GMT

साम्प्रदायिक सौहार्द की ज्योति जला रहे जेल में मुस्लिम और हिंदू कैदी
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मुजफ्फनगर:देश में छोटी सी बात पर साम्प्रदायिक दंगे हो जाया करते हैं। यूपी का मुजप्फरनगर वैसे भी साम्प्रदायिक रूप से काफी संवेदनशील है जहां 2013 में हुए दंगे ने विभाजन के दौरान हुए दंगों की याद दिला दी थी। लेकिन साम्प्रदायिक सौहार्द की एक बड़ी मिसाल मुज़फ्फरनगर जेल में देखने को मिली है। यहाँ तीन दिन पहले शुरू हुए रमजान के महीने में मुस्लिम बंदियों के साथ हिन्दू बंदी ने भी रोज़ा रख कर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है।

दरअसल 2013 के दंगो के बाद दोनों समुदाय के बीच पड़ी खाई को भरने के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द के कई काम किये गए। लेकिन मुज़फ्फरनगर जेल से सांप्रदायिक सौहार्द की जो ज्योति यहाँ के बंदी जला रहे है उसकी हर ओर चर्चा है।

जेल अधीक्षक राकेश सिंह के अनुसार रमजान के पहले दिन कुल 1165 बंदियों ने रोजा रखा जिनमे 101 हिन्दू बंदी शामिल है। इन हिन्दू बंदियों में एक महिला भी रोज़ा रख रही है। जेल अधीक्षक के अनुसार दूसरे दिन भी इन बंदियों का रोज़ा रखना जारी है और लगातार रमजान में रोज़ा रख कर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे है।

जेल प्रशासन की और से सभी रोजदारो की इफ्तारी के लिए दूध ,दही और फलों का इंतज़ाम किया गया है। साथ बैठ कर इफ्तारी करना सौहार्द की मिसाल है ।जेल अधीक्षक का कहना है कि मेरी नौकरी में पहला मौका है जो इतनी बड़ी तादाद में हिन्दुओ बंदी ने रोजा रखा है।

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