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HIV पीड़ित बच्चे को स्कूल में नहीं मिला दाखिला, सोशल वर्कर ने की मदद

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AdminBy Admin

Published on 29 March 2016 10:14 AM GMT

HIV पीड़ित बच्चे को स्कूल में नहीं मिला दाखिला, सोशल वर्कर ने की मदद
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गाजीपुरः अब तो ये बात अनपढ़ भी जानते हैं कि एचआईवी छुआछुत का रोग नहीं है लेकिन गाजीपुर में एक बच्चे को स्कूल में सिर्फ इसलिए दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि वो एचआईवी पीड़ित है। बच्चे का पूरा परिवार एचआईवी से संक्रमित है।

दुल्लहपुर थाना इलाके के जलालाबाद स्थित मियनाबड़ा गांव में नरेन्द्र चौहान पत्नी और बच्चे के साथ रहते हैं। एचआईवी संक्रमण की जानकारी होते ही नरेन्द्र के माता पिता और परिजनों ने उन्हें अलग कर दिया। इसकी जानकारी जब गांव वालों को हुई तो परिवार से मिलना जुलना बंद कर दिया गया। जब नरेन्द्र अपने बच्चे का दाखिला कराने निजी स्कूल गया तो दाखिला लेने से इनकार कर दिया गया।

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दाखिले के लिए सामाजिक कार्यकर्ता ने की मदद

-सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण दूबे ने दाखिले के लिए मदद की।

-खण्ड शिक्षाधिकारी भी मौजूदगी में दाखिले के लिए स्कूल प्रशासन से बहस की।

-स्कूल प्रशासन बडी मुश्किल से दाखिले के लिए हुआ तैयार।

-पीड़ित परिवार ने दाखिले के लिए डीएम से मदद का आग्रह किया था।

-कहीं से कोई मदद नहीं मिली।

-सामाजिक कार्यकर्ता ने पीड़ित 8 वर्षीय छात्र के साथ शहर में जुलूस निकाला।

-बच्चे के गले में तख्ती थी, जिस पर लिखा था मैं एचआईवी पीड़ित हूं। इसमें मेरा कोई दोष नहीं है ।

-छात्र को आर0बी0सी0 स्‍कूल से बाहर कर दिया गया था।

-छात्र चन्द्रप्रकाश का दाखिला दूसरे क्लास में कराया गया है।

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क्या है पूरा मामला

संक्रमित विकलांग पति-पत्नी नरेन्द्र चौहान व सुनीता को उनके माता-पिता ने ही न केवल अलग कर दिया बल्कि उनके हाथ का कुछ भी खाने-पीने से मना कर दिया। घर में अनाज का एक दाना नहीं था। 2007 में पैदा हुये बेटे चन्‍द्र प्रकाश सहित उसके माता-पिता का इलाज 2011 से ही काशी हिन्‍दू यूनिवर्सिटी में चलने के बाद भी गरीब परिवार को गरीबी रेखा से उपर का राशन कार्ड जारी कर वार्षिक आय 25 हजार रूपये दिखाया गया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के साथ बैठकर भोजन किया और लोगों से कहा कि एच0आई0वी0 संक्रमण की बीमारी नहीं है। सुनीता 2006 में ही गर्भावस्‍था में संक्रमित इन्‍जेक्‍शन लगने के कारण एच0आई0वी0 संक्रमित हो गयी, जिसकी चपेट में गर्भ में पलने वाला बच्‍चा भी आ गया। कुछ दिनों बाद सुनीता का पति नरेन्‍द्र भी संक्रमित हो गया। संक्रमण का पता 2010 में चला। जांच के बाद 2011 से नियमित इलाज पति-पत्‍नी एवं बच्‍चे का काशी हिन्‍दू यूनिवर्सिटी से चल रहा है।

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