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UP News: बुलडोजर एक्शन में गिराए गए घर फिर बनेंगे, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सुनाया ये फैसला

UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रभावित लोगों को अपने खर्च पर घर दोबारा बनाने की अनुमति दे दी है।

Newstrack          -         Network
Published on: 25 March 2025 9:05 AM IST
UP News: बुलडोजर एक्शन में गिराए गए घर फिर बनेंगे, जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सुनाया ये फैसला
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UP News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रभावित लोगों को अपने खर्च पर घर दोबारा बनाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं।

जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने दलील दी थी कि उनके घरों को गैंगस्टर अतीक अहमद से जुड़ा मानकर ध्वस्त कर दिया गया, जबकि उनका उससे कोई संबंध नहीं था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार बिना उचित प्रक्रिया अपनाए इस तरह की कार्रवाई नहीं कर सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता तय समय में अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करते हैं और वह स्वीकार हो जाती है, तो वे अपने घर फिर से बना सकते हैं। लेकिन यदि अपील खारिज हो जाती है, तो उन्हें अपने ही खर्च पर घर को दोबारा गिराना होगा।

राज्य सरकार को फटकार

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामला खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही उनके घर गिरा दिए। अधिकारियों ने शनिवार रात को नोटिस दिया और अगले ही दिन कार्रवाई कर दी, जिससे वे कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं कर सके।

राज्य सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को पहले ही 8 दिसंबर 2020 को नोटिस भेज दिया गया था, और बाद में जनवरी व मार्च 2021 में भी नोटिस दिए गए। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नोटिस उचित तरीके से नहीं दिए गए थे और प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला।

कोर्ट ने कहा कि सरकार यह तर्क नहीं दे सकती कि यदि किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक घर हैं, तो उसके कानूनी अधिकारों की अनदेखी की जा सकती है। हर नागरिक को कानून के दायरे में ही न्याय मिलना चाहिए।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं ने खुद को जमीन का वैध पट्टेदार बताया और कहा कि उन्होंने इस जमीन को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए आवेदन किया हुआ था। उनका कहना था कि उन्हें 1 मार्च 2021 को नोटिस जारी हुआ, लेकिन इसकी जानकारी 6 मार्च को मिली और 7 मार्च को प्रशासन ने उनके घर गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी।

उन्होंने दलील दी कि उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट की धारा 27(2) के तहत उन्हें इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें ऐसा करने का मौका ही नहीं दिया।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशानिर्देश

सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस तरह की कार्रवाई को लेकर दिशानिर्देश जारी कर चुका है। नवंबर 2024 में कोर्ट ने कहा था कि बिना पूर्व नोटिस के किसी भी मकान को ध्वस्त नहीं किया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद प्रभावित व्यक्ति को कम से कम 15 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वह अपना पक्ष रख सके या कानूनी विकल्प अपना सके।

इसके अलावा, ध्वस्त करने का अंतिम आदेश जारी होने के बाद भी 15 दिन की मोहलत दी जाएगी, ताकि संबंधित व्यक्ति अपने रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर सके या फिर फैसले के खिलाफ अपील कर सके।

बुलडोजर कार्रवाई पर कोर्ट का संदेश

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि मनमाने ढंग से की जाने वाली बुलडोजर कार्रवाई पर अब सख्ती बरती जाएगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार को कानून का पालन करते हुए काम करना होगा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। इस आदेश के बाद अब याचिकाकर्ता अपने घरों का पुनर्निर्माण कर सकेंगे, लेकिन उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

Sonali kesarwani

Sonali kesarwani

Content Writer

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