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पति-पत्नी को ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फाँसी और उम्र कैद की सजा, हाईकोर्ट से हुए दोष मुक्त

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला देने में गलती की है।अभियुक्तों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य संदेह से परे साबित नहीं हो सके है। मामले के अनुसार कानपुर नगर के ग्वालटोली थाने में आनंद प्रकाश ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि वह फरहत इंटेरप्रिज़ेस में काम करता है।

Shivakant Shukla

Shivakant ShuklaBy Shivakant Shukla

Published on 18 May 2019 2:04 PM GMT

पति-पत्नी को ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फाँसी और उम्र कैद की सजा, हाईकोर्ट से हुए दोष मुक्त
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प्रतीकात्मक फोटो
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने तीन लोगो की हत्या के आरोपी कानपुर के राशिद और उसकी पत्नी शकीला को राहत देते हुए उनको दोष मुक्त कर दिया है। ट्रायल कोर्ट कानपुर ने राशिद को फाँसी और शकीला को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। दोनों की अपील और फाँसी के रेफरेंस पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला देने में गलती की है।अभियुक्तों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य संदेह से परे साबित नहीं हो सके है। मामले के अनुसार कानपुर नगर के ग्वालटोली थाने में आनंद प्रकाश ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि वह फरहत इंटेरप्रिज़ेस में काम करता है। वहाँ सैंडल बनाई जाती है।

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6 मार्च2013 को जब वह फैक्टरी पंहुचा उसी समय मालिक कामरान भी आ गया। ताला खोल कर भीतर जाना था पर वहाँ तीन लाशें पड़ी थी । इसमें से एक लाश महिला की थी और दो पुरुषो की। फैक्ट्री का चौकीदार राशीद और उसकी पत्नी शकीला मौके से गायब थे। बाद में पता चला की तीनों लाशें राशिद की सास ज़ैनब और सालो रियाज़ और इब्राहिम की थी।तीनो का गला काट कर हत्या की गई थी।

अभियोजन ने राशिद और शकीला पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। अपराध साबित करने के लिए राशिद के नाबालिक साले को चश्मदीद गवाह के तौर पर पेश किया गया जो घटना के समय वहाँ मौजूद था। अन्य गवाह भी पेश किये गए। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की गवाही अन्य साक्ष्यो से मेल नही खाती है। एक ही व्यक्ति ने तीन लोगो की हत्या अकेले कर दी इसे साबित करने के लिए सही साक्ष्य नहीं है। हाईकोर्ट ने दोनों की सजा माफ़ करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है।

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