रंग लाया भारत सरकार का प्रयास, चीन में फंसे भारतीयों की हुई घर वापसी

एटा जनपद की तहसील जलेसर निवासी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आशीष व उनकी पत्नी नेहा को भारतीय दूतावास के विशेष विमान ने पिकअप हिन्दुस्तान के चाइना में फंसे…

Published by Deepak Raj Published: February 27, 2020 | 9:48 pm
Modified: February 27, 2020 | 9:52 pm

एटा। एटा जनपद की तहसील जलेसर निवासी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आशीष व उनकी पत्नी नेहा को भारतीय दूतावास के विशेष विमान ने पिकअप हिन्दुस्तान के चाइना में फंसे 76 भारतीयों को स्वदेश वापस ले आने से खुशी का माहौल है।

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दिल्ली में अपनी स्कैनिंग करा रहे आशीष ने बताया कि दिल्ली में जांच हो जाने के बाद ही हम अपने घर परिवार के सदस्यों से मिलने पहुंचेंगे हमें अपने देश आजाने की बहुत खुशी है हम भारत सरकार साथ ही प्रधानमंत्री जी के बहुत आभारी हैं जिनके प्रयास से ही हम वापस लौट सके है।

भारतीय दूतावास की मदद वहां फंसे भारतीयों तक पहुंच गई

आखिरकार संकट की घड़ी टल गई। वुहान में कोरोना वायरस के कहर की कैद में फंसे जलेसर के यादव दंपती को आखिरकार रिहाई मिल ही गई। विशेष विमान से दंपती अपने देश वापस आ गये। चीन सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भारतीय दूतावास की मदद वहां फंसे भारतीयों तक पहुंच गई।

अब विमान उन्‍हें लेकर दिल्‍ली पहुंच गया। यहां उन्‍हें आइसोलेशन सेंटर में जांच के लिए रखा जाएगा। इसके बाद जलेसर स्थित अपने घर पहुंचेंगे। चीन के वुहान वुहान टेक्सटाइल यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आशीष और उनकी पत्‍नी नेहा कोरोना वायरस के कारण वहां घर में कैद होकर रह गए थे।

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आशीष एटा जनपद के जलेसर के मूल निवासी हैं। उनके माता पिता लगातार केंद्र सरकार से अपने बच्‍चों की वापसी की गुहार लगा रहे थे। पिछले दिनों सांसद प्रो एसपी सिंह बघेल ने भी विदेश मंत्रालय जाकर दंपती को वापस लाने की बात की थी।

पिछले कुछ दिनों से उम्‍मीद बन रही थी कि एटा के दंपती अब वापस आ जाएंगे लेकिन चीन सरकार की अनुमति न मिलने के कारण भारतीय दूतावास का चीन में फंसे भारतीयों की मदद करना संभव नहीं हो पा रहा था। बुधवार को चीन सरकार की मंजूरी मिलने के बाद दोपहर 4:00 बजे (भारतीय समय के अनुसार 1:30 बजे) उन्हें भारतीय दूतावास से भेजे गए वाहन द्वारा घर से पिकअप कर दिया गया।

फंसे भारतीयों के वाट्सएप ग्रुप पर संदेश भेजा था

मंगलवार को भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने फंसे भारतीयों के वाट्सएप ग्रुप पर संदेश भेजा था। जिसमें बुधवार को विमान के भारत के लिए उड़ान भरने की उम्मीद जताई थी। संदेश में कहा गया था कि दूतावास के अधिकारी चीन सरकार के संपर्क में हैं और बुधवार को उन्हें विमान के उड़ान भरने की अनुमति मिल सकती है।

इस संदेश के बाद एक माह से यूनिवर्सिटी कंपाउंड में बने अपने फ्लैट में कैद होकर रह गए यादव दंपती ने राहत की सांस ली। वे कोरोना के डर के घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। मंगलवार को डॉ. आशीष ने फोन पर बताया कि दूतावास के अधिकारियों ने कहा है कि लौटने की स्थिति स्पष्ट होते ही वो चार घंटे पहले सूचित करेंगे।

ये मिला था संदेश

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

हम अपनी उड़ान की मंजूरी के संबंध में चीन के अधिकारियों के संपर्क में हैं। कल शाम वुहान से उड़ान के प्रस्थान के लिए निकासी पर प्रगति हो सकती है। हालांकि, कृपया ध्यान दें कि हमारे पास अभी तक मंजूरी नहीं है। जैसे ही हमारे पास मंजूरी होगी हम आपको बताएंगे और निकासी के रसद के बारे में और निर्देश देंगे। हम आपको पिकअप के लिए वाहनों के आने से पहले तैयार होने के लिए कम से कम चार घंटे का नोटिस देंगे।

इस पूरे क्रम के बाद आखिरकार 76 भारतीयों को स्वदेश वापसी मिल ही गयी। इसी क्रम में एटा के निवासी डा आशीष व उसकी पत्नी नेहा के भारत आ जाने पर आशीष के पिता भंवर सिंह व परिजनों ने देश के प्रधानमंत्री को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया है तथा कहा कि अगर हमारे देश के नेता नहीं चाहते तो मेरे पुत्र व पुत्रवधू वापस नहीं आ पाती।

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