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जल निगम: दस वर्षों में बने एसटीपी के कैपिसिटी यूटिलाइजेशन की जांच होगी

यूपी में पिछले 10 वर्षों में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट (एसटीपी) की क्षमता के यूटिलाईजेशन की जांच होगी। देखा जाएगा कि यह एसटीपी अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं या नहींं। अगर यह एसटीपी अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे होंगे तो उन्हें पूरी क्षमता के साथ शुरू कराया जाएगा।

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priyankajoshiBy priyankajoshi

Published on 1 Oct 2017 1:17 PM GMT

जल निगम: दस वर्षों में बने एसटीपी के कैपिसिटी यूटिलाइजेशन की जांच होगी
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लखनऊ: यूपी में पिछले 10 वर्षों में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट (एसटीपी) की क्षमता के यूटिलाईजेशन की जांच होगी। देखा जाएगा कि यह एसटीपी अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं या नहींं। अगर यह एसटीपी अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल रहे होंगे तो उन्हें पूरी क्षमता के साथ शुरू कराया जाएगा।

अगर किसी परियोजना का रिवाइज इस्टीमेट पेश किया जाता है तो उस योजना के पूरा होने में देरी के कारणों की भी जांच होगी। मुख्य सचिव राजीव कुमार ने शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में जल निगम के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

चीफ सेक्रेटरी ने मांगी जानकारी

चीफ सेक्रेटरी ने जल निगम के अफसरों से परियोजनाओं के पूरा होने में लगने वाले समय की जानकारी मांगी है। उन्हें चरणवार इसकी टाइमलाइन बना कर देनी होगी। इसके अलावा शासन स्तर पर हर सप्ताह सीवेज और पेयजल परियोजनाओं की समीक्षा होगी। मुख्य सचिव अपने स्तर पर हर 15 दिन पर किए गए कामों की प्रगति का खुद जायजा लेंगे। वर्तमान में अमृत, नमामि गंगे, स्टेट सेक्टर और जायका सहायतित परियोजनाओं के 21000 करोड़ रुपए के काम प्रस्तावित हैं। यह सभी काम अधूरे हैं। चीफ सेक्रेटरी ने इन कामों को 2020 तक पूरा कराने को कहा है। मगर मुश्किल यह है कि यूपी के 41 शहरों में एसटीपी बने हैं, लेकिन वह पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। शहर का गंदा पानी अब भी नालों और नदियों में जा रहा है।

समय से काम न पूरा होने पर ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्टेड

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत लम्बित परियोजनाएं समय से पूरी नहीं होती है। ऐसी दशा में यदि रिवाइज इस्टीमेट प्रस्तुत किया जाता है तो विलंब के कारणों की जांच कराई जाए। संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय हो। समय से काम नहीं पूरा करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्टेड किया जाए।

केंद्र को भेजे गए हैं सात परियोजनाओं के प्रस्ताव

नमामि गंगे परियोजनाओं के तहत केंद्र सरकार को 7 परियोजनाओं-मुरादाबाद, बरेली, बुलंदशहर के नालों की टैपिंग, कानपुर, वाराणसी एवं मिर्जापुर के एसटीपी के अपग्रेडेशन का कार्य कराने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। उसे स्वीकृत कराने की कोशिश की जाए। निर्माणाधीन परियेाजनाओं की थर्ड पार्टी इन्सपेक्शन कराया जाए। सम्बन्धित अधिकारियों का रिफ्रेशर कोर्स भी कराया जाए।

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इन्होंने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत नई दिल्ली में एनडीटीवी से की। इसके अलावा हिंदुस्तान लखनऊ में भी इटर्नशिप किया। वर्तमान में वेब पोर्टल न्यूज़ ट्रैक में दो साल से उप संपादक के पद पर कार्यरत है।

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