जिले में कोरोना का कहर जारी, तेजी से बढ़ रही मरीजों की संख्या

प्रवासी श्रमिकों के आगमन के बाद जहां बाहरी इलाकों में संक्रमण बढ़ रहा था। वहीं 22 मई के बाद से महानगर के भीतर संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

झाँसी: लॉकडाउन के अनलॉक होने के बाद से वीरांगना नगरी झाँसी में नोवल कोरोना वायरस संक्रमण की न केवल रफ्तार लगातार बढ़ती ही जा रही है बल्कि अब तक पूरे बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा 17 लोगों की मौत भी झाँसी में हुई है। कोरोना संक्रमण के शुरुआती दिनों में वीरांगना नगरी काफी सुरक्षित समझी जा रही थी। काफी समय तक यहां कोई संक्रमित नहीं मिला था। यहां 27 अप्रैल को पहला मामला सामने आया था। इसके बाद मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ परंतु संक्रमण की रफ्तार काबू में रही और 12 मई को जिला कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया था।

जिले में बढ़ा कोरोना संक्रमण

लेकिन जिला ज्यादा दिन तक कोरोना मुक्त नहीं रह सका और इस खुशखबरी के मात्र दस दिन बाद ही 22 मई को कोरोना के जानलेवा संक्रमण ने एक बार फिर जिले का रुख किया और मरीजों की संख्या बढ़नी शुरु हुई। अनलॉक होने के बाद तो हालत इतनी खराब हुई कि सोमवार की रात संदिग्ध नमूनों की जांच में से 16 की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। जिले में अब मरीजों की संख्या 185 हो गई है। जिसमें से 17 की मौत हो चुकी है और 67 ठीक हो चुके हैं। जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या 102 है। प्रवासी श्रमिकों के आगमन के बाद जहां बाहरी इलाकों में संक्रमण बढ़ रहा था। वहीं 22 मई के बाद से महानगर के भीतर संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

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इतना ही नहीं पूरे बुंदेलखंड में कोरोना से होने वाली मौतों के सर्वाधिक आंकड़ा भी झाँसी में ही है। यहां संक्रमण से 17 लोगों की मौत हो चुकी हैं। झाँसी में संक्रमण की लगातार भयावह होती स्थिति के बीच अगर महानगर में अनलॉक के बाद सोशल डिस्टेंसिंग और चेहरे को मास्क से ढ़कने के नियम की बात करें तो लोग इसकी अनदेखी तो कर ही रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं प्रशासन भी इसके लिए कड़ाई बरतने को उत्सुक नजर नहीं आ रहा है। बाजारों में और भीड़ भरे इलाकों में पुलिस या निगरानी टीमों की अनुपस्थिति इन नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों को और बल दे रहीं है। इन्हीं सब का नतीजा है कि संक्रमण महानगर में तेजी से फैलता जा रहा है।

पूरे बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा मौतें झांसी में

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ जीके निगम ने महानगर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या में वृद्धि के लिए सीधे-सीधे लोगों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। डॉ निगम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग दिन रात कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर नियंत्रण करने के लिए काम कर रहा है। लेकिन लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने के नियम की लोग पूरी तरह से अनदेखी कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार जिले में तेजी पकड़ रही है। जालौन में कुल मरीजों की संख्या तो 168 है लेकिन मरने वालों की संख्या सात है।

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बांदा में कोरोना मरीजों की संख्या 39 लेकिन इसके कारण कोई मौत नहीं हुई है। हमीरपुर में कुल मरीज 70 हैं और दो की मौत हुई है। महोबा में कुल मरीज 54 और एक की मौत हुई है। चित्रकूट में कुल मरीजों की संख्या 92 है और कोरोना संक्रमण से तीन लोगों की जान गई है। संक्रमितों की संख्या के हिसाब में सर्वाधिक सुकून देने वाले आंकड़े ललितपुर के हैं, जहां कुल संक्रमितों की संख्या मात्र आठ है लेकिन दो लोगों की मौत हो चुकी है और सक्रिय मरीजों की संख्या छह है।

रिपोर्ट- बी के कुशवाहा

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