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Jhansi News: पेयजल ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा, आधे से भी कम मिल रहा लोगों को पानी

Jhansi News : परमार्थ समाज सेवी संस्थान की टीम झांसी शहर के पेयजल संकट ग्रस्त 07 बस्तियो में “पेयजल आंकेक्षण” किया गया।

B.K Kushwaha

B.K KushwahaReporter B.K KushwahaShraddhaPublished By Shraddha

Published on 15 Jun 2021 5:39 PM GMT

महानगर में प्रति व्यक्ति को 55 लीटर जल प्रतिदिन मिलने का अधिकार है।
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 पेयजल ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

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Jhansi News : परमार्थ समाज सेवी संस्थान (Parmarth Social Service Institute) की टीम द्वारा झांसी शहर के अंतर्गत पेयजल (Drinking Water) संकट ग्रस्त 07 बस्तियो (मुहल्लों) में "पेयजल आंकेक्षण" किया गया। इस दौरान बस्ती के संकटग्रस्त 104 परिवारों से टीम द्वारा साक्षात्कार लिया गया। फोकस ग्रुप्स डिस्कसन (focus groups discussion) एवं मौके पर जाकर स्थिति आंकलन के द्वारा जानकारियां प्राप्त कर पेयजल अध्ययन किया गया। इसमें पाया कि महानगर में प्रति व्यक्ति को 55 लीटर जल प्रतिदिन मिलने का अधिकार है। जबकि इससे आधा जल भी प्रति व्यक्ति को प्राप्त नहीं हो रहा है।

भले ही झांसी को बुन्देलखण्ड में सुविधाओं के तौर पर सबसे अच्छे शहर के नाम से जाना जाता हो लेकिन वर्षो से चली आ रही यहां पेयजल संकट की समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई है। जैसे ही फरवरी का माह शुरू होता है, शहर में पेयजल संकट उत्पन्न हो जाता है। महानगर की जनसंख्या 6 लाख के लगभग है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए महानगर में पाइपलान सप्लाई के साथ 29 ट्यूबवेल लगे हैं और 3286 हैंडपंप है। पानी की आवश्यकता 78.51 एमएलडी की है, जबकि पानी की उपलब्धता 65.47 एमएलडी है। एक एमएलडी में 10 लाख लीटर पानी होता है। चूंकि पूरे शहर में पानी की पाइपलाइन नहीं डाली गई है और संकट ग्रस्त क्षेत्र की पाइप लाइन में पानी नहीं आ रहा है।

इसलिए शहर में पेयजल संकट के समाधान के लिए जल संस्थान के द्वारा हैण्डपम्प तो लगाये गये है लेकिन गर्मियों में भूगर्भ जल स्तर का कम होने के कारण एवं हैण्डपम्प से पानी की अधिक खपत होने के कारण हैण्डपम्प भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। ऑडिट में पाया कि 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के अनुसार 674 व्यक्तियों को 37070 लीटर पानी की आवश्यकता है इन लोगो को मात्र 16095 लीटर पानी 43 प्रतिशत प्रतिदिन मिल रहा है जो सरकारी मानक अनुरूप बहुत कम है।

महानगर के पूर्व में वेतवा नदी तथा पश्चिम में पहूज नदी मुख्य रूप से है शहर में मिश्रित और लाल मिट्टी राकड पडुआ, जमींन है। भूमि के अन्दर 60 मीटर तक चिकनी मिटटी और कंकड़ है इसके बाद ग्रेनाईट पत्थर मिलता हैं। क्षेत्र में प्रमुखता से डगवेल और ट्यूबवेल पेयजल के संसाधन है, डगवेल की गहराई 5.50 -25 मीटर और ट्यूबवैल 50 -100 मीटर गहराई पर स्थापित है, जिनमे जल स्तर बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। वर्तमान में महानगर के 20 मुहल्लों (लक्ष्मण गंज, बिसात खाना, दारीगरन, अलीगोल खिड़की बहार, दतिया गेट बहार, उन्नाव गेट बहार, बड़ा गांव गेट बहार, मुकरयाना, बांग्ला घाट, गुदरी, गुमनावारा, नगरा, सीपरी बाजार, मसीहागंज, ग्वाल टोली, चार खम्बा, सराय, राजगढ़, भाड़ेर गेट बाहर,सत्यम कालोनी, अन्नपूर्णा कॉलोनी) में पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। वही असमय टैंकरों का आना लोगों की मुसीबत बना हुआ है।

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