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पंचायत चुनाव: DPRO पर पैसे लेकर आरक्षण सूची बदलने का आरोप, मामला दर्ज

पंचायत चुनाव से पहले जारी किए गए क्षेत्र पंचायत के आरक्षण में DPRO पर रुपये लेकर सीटें बदलने का आरोप लगा है

Ashiki Patel

Ashiki PatelPublished By Ashiki PatelKanpur Dehat Manoj SinghReport Kanpur Dehat Manoj Singh

Published on 7 April 2021 12:19 PM GMT

UP Panchayat Chunav
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photos (social media)

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कानपुर देहात: कानपुर देहात में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जारी किए गए क्षेत्र पंचायत के आरक्षण में डीपीआरओ पर रुपये लेकर सीटें बदलने का गम्भीर आरोप लगा है। हाईकोर्ट ने 2015 के आरक्षण पर चुनाव कराने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत को निर्देशित किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने यूपी के सभी जनपदों में 2015 की आरक्षण सूची जारी कर चुनाव कराने के लिये निर्देश दिया।

डीपीआरओ ने बदल दी आरक्षण सूची

जिसके बाद कानपुर देहात में आरक्षण जारी हुआ, लेकिन जनपद के मलासा ब्लाक से बीडीओ द्वारा जारी की गई आरक्षण सूची को डीपीआरओ ने बदल दिया और अंतिम आरक्षण सूची जारी कर 39 गांवों का आरक्षण बदल दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि आखिर आरक्षण सूची जारी करने में डीपीआरओ के साथ जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सभी के हस्ताक्षर होते है किसी को आरक्षण बदलने की भनक तक नही लगी या फिर आरक्षण बदलने में सभी ने सहयोग किया है।

डीपीआरओ द्वारा आरक्षण सूची बदलकर जारी करने की पुष्टि का मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी ने 3 लोगो को सस्पेंड कर दिया है वही डीपीआरओ की भूमिका की जांच के लिये मुख्य विकास अधिकारी को जांच सौंपी है । अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आरक्षण सूची जारी करने में डीपीआरओ के साथ साथ जिलाधिकारी , मुख्य विकास अधिकारी सभी ने हस्ताक्षर किए है तो इस मामले तो सभी लोग दोषी है । जनपद के मलासा ब्लाक का ये हाल है अगर इसी तरह जनपद के सभी ब्लाकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़ा मामला सामने आने की उम्मीद है।

वहीं ऐसे मामले में मुख्य विकास अधिकारी को जांच कराने का क्या मतलब है अगर मामले की निष्पक्ष जांच करानी है तो राज्य निर्वाचन से होनी चाहिये और जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिये। गलत आरक्षण जारी करने के बाद मामला तूल पकड़ते देख जनपद के डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह मीडिया के सवालों से बचने के हुए आफिस छोड़कर चले गए। डीपीआरओ आफिस में खाली कुर्सी पड़ी है। फिलहाल अब उन लोगो का क्या होगा जो गलत तरीके से अंतिम आरक्षण सूची जारी होने पर क्षेत्र पंचायत के पर्चे खरीद चुके है और ब्लाक में आज भी पर्चे बेचे जा रहे हैं।

शिकायत दर्ज

डीपीआरओ द्वारा मलासा ब्लाक के 39 गांवों की आरक्षण सूची बदलकर जारी करने के मामले को शिकायत कर्ता भानु प्रताप सिंह ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायत दर्ज करायी है। शिकायत कर्ता की माने तो जनपद के डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह भ्रष्टाचार में लिप्त है। मलासा ब्लाक के क्षेत्र पंचायतो में रुपये लेकर अंतिम आरक्षण सूची जारी की है। वहीं शिकायत कर्ता ने राज्य निर्वाचन आयोग से शिकायत में ये भी कहा है कि डीपीआरओ पर पूर्व जनपदों में तैनाती के दौरान भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जनपद में डीपीआरओ के रहते निष्पक्ष चुनाव होने की आशंका जता इन्हें हटाने की मांग की थी। वही शिकायत कर्ता भानु प्रताप ने कहा कि वो इस मामले को लेकर हाईकोर्ट भी जाएंगे।

आरक्षण मामले पर जब मलासा ब्लाक की बीडीओ उषा देवी से बात की गई तो बीडीओ ने बताया कि मेरे द्वारा आरक्षण सूची सही जारी की गई थी अंतिम सूची प्रकाशन में कैसे गड़बड़ी कर दी गयी उन्हें नही पता । ये उच्चाधिकारियों का मामला है फिलहाल गलत हुआ है।

जनपद के अपर जिलाधिकारी प्रशासन पंकज वर्मा से बात की गई तो पंकज वर्मा ने बताया कि मलासा ब्लाक की अंतिम आरक्षण सूची बदलकर जारी की गई है आरक्षण सूची बदलने की पुष्टि पाये जाने पर 3 लोगो को सस्पेंड किया गया है डीपीआरओ के भूमिका की जांच के लिये सीडीओ को जांच दी गयी है।

Ashiki

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