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कस्तूरबा विद्यालयों की बच्चियां भरेंगी ऊंची उड़ान

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raghvendraBy raghvendra

Published on 31 Jan 2020 5:43 AM GMT

कस्तूरबा विद्यालयों की बच्चियां भरेंगी ऊंची उड़ान
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रतिभान त्रिपाठी

लखनऊ: ‘पढ़ें बेटियां बढ़ें बेटियां’ उत्तर प्रदेश में अब महज स्लोगन नहीं रहा, वरन अमली जामा पहन रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार बेटियों को बड़े सपने दिखाने के साथ ही उनकी तामीर कराने की भी तैयारी कर चुकी है। यहां चल रहे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय इसकी प्रयोगशाला बनने जा रहे हैं, जहां बेटियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कराई जा रही है। इससे वह अपना भविष्य उज्जवल बना सकेंगी। इससे वह अपना उद्यम शुरू करने में समर्थ तो होंगी ही, वैश्विक स्तर की संस्थाओं में भी अपना योगदान दे सकेंगी। विशिष्ट और उच्च स्तरीय शिक्षा की यह योजना आगामी सत्र से शुरू होने जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना का पूरा खाका तैयार किया जा चुका है। प्रदेश के 35 कस्तूरबा विद्यालयों की 2500 बालिकाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कराई जाएगी। यह उच्च स्तरीय पढ़ाई कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की छात्राओं को कराई जाएगी। पहले सत्र में इसे पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा। इसके लिए उन विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जा रही है जो देश विदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में इसका शिक्षण प्रशिक्षण कर चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई शुरू कराने के लिए कई बार उच्च स्तरीय बैठकें करके योजना को अंतिम रूप दे चुके हैं। पाइलट प्रोजेक्ट की समीक्षा के साथ ही पूरे प्रदेश के हर ब्लॉक के कस्तूरबा विद्यालयों में इसे शुरू किया जाएगा, ताकि इनमें पढऩे वाली हर बच्ची कंप्यूटर व डिजिटल शिक्षा का लाभ ले सके, और आगे चलकर वह अपना उद्यम स्वयं शुरू करने में समर्थ हो सके।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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