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Kaushambi News: लोकीपुर स्वास्थ्य केंद्र 'राम भरोसे', डॉक्टर नदारद, रात भर नौटंकी देख सोए रहते हैं फार्मासिस्ट

Kaushambi News: कौशांबी जिले के मूरतगंज ब्लॉक के लोकीपुर स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की हालत दयनीय है। यहां नियुक्त डॉक्टर अकसर अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं।

Ansh Mishra
Updated on: 5 Aug 2022 3:20 PM GMT
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कौशांबी जिले के मूरतगंज ब्लॉक के लोकीपुर में स्वास्थ्य केंद्र पर सोता फार्मासिस्ट

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Kaushambi News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार स्वास्थ्य महकमे को चुस्त-दुरुस्त रखने के भले ही लाख दावे करती रही हो, मगर कौशांबी जिले के स्वास्थ्य केंद्र की हालत सच्चाई बयां कर रही है। कौशांबी जिले (Kaushambi District) के लोकीपुर स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त डॉक्टर मिलते ही नहीं हैं। यहां डॉक्टर के अभाव में मरीज इलाज को तड़पते नजर आ जाएंगे। ये हालात एक दिन का नहीं है। अमूमन डॉक्टर अनुपस्थित ही रहते हैं। ऐसे में मरीजों और तीमारदारों की हालत देखकर किसी का भी दिल पसीज जाएगा।

कौशांबी जिले के मूरतगंज ब्लॉक के लोकीपुर में स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की हालत दयनीय है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां नियुक्त डॉक्टर अकसर अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं। तीमारदारों की मानें तो चिकित्सक मरीजों को तड़पता छोड़ दिन-दिनभर गायब रहते हैं। फार्मासिस्ट भी अपनी ड्यूटी से नदारद रहते हैं। मरीज का इलाज करने से ज्यादा समय वो नौटंकी देखने में देते हैं। नतीजा, दिन में ड्यूटी वो सोते मिलते हैं। यूं कहें, तो 'अंधेर नगरी चौपट राजा'। डॉक्टर और फार्मासिस्ट अपनी जिम्मेदारी को छोड़ बाकी सभी काम करते हैं।

सरकार किसी भी पार्टी की, स्थिति वैसी ही

लोकीपुर में स्वास्थ्य केंद्र आने वाले लोगों की मानें तो यहां की हालत बेहद खराब है। यहां मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। सरकार के दावे भले आकर्षक लगते हैं। विज्ञापनों को देखकर लगता है कि काम बहुत हो रहा है, मगर हालात ये हैं कि 20 वर्षों के बाद भी यह सरकारी अस्पताल मरीजों का भरोसा जीत पाने में विफल रहा है। सरकार किसी भी पार्टी की हो, इस स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति वैसी ही रही।

जिम्मेदार डॉक्टरों की कारगुजारी से अनजान

मरीजों का कहना है कि, इस स्वास्थ्य केंद्र में वो नहीं आना चाहते हैं। यहां पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को निजी डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ता है। जहां उनकी भारी-भड़कम राशि खर्च हो जाती है। दरअसल, स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार चिकित्सकों की कारगुजारी से अनजान हैं। उन्हें पता ही नहीं कि, स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों की उपस्थित नहीं रहती है। बिना ड्यूटी किए ही वो प्रत्येक महीने मोटा वेतन उठा रहे हैं।


CMO की भूमिका भी संदिग्ध

स्थानीय लोगों का कहना है कि, इस पूरे घटनाक्रम में चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्योंकि, बिना सीएमओ की जानकारी के यहां कार्यरत डॉक्टर, फार्मासिस्ट इस तरह शिथिलता से पेश नहीं आ सकते। मरीजों का कहना है, यह अस्पताल कहने को सरकारी अभिलेखों में ही चल रहा है। बीमार लोगों के इलाज के लिए सक्षम नहीं है। मरीजों का उपचार नहीं होने से वो इधर उधर भटकने को विवश हैं। सच्चाई तो ये है कि यह अस्पताल केवल ताला खुलने तक सीमित रह गया है।

नहीं मिल रहा सरकारी सुविधाओं का लाभ

लोकीपुर स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार की नियुक्ति है। लेकिन, अस्पताल में उनकी उपस्थिति नहीं रहती। यह स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्ट संजय पटेल के सहारे चल रहा है। अस्पताल में मरीज तड़पते रहें, मगर फार्मासिस्ट चैन की नींद सोते दिख जाते हैं। यह उनकी प्रतिदिन की दिनचर्या है। उन्हें मरीजों की पीड़ा से कोई मतलब नहीं।ग्रामीणों का आरोप है कि यहां जो सुविधा सरकार ने उपलब्ध कराई है‌, वह ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही।

aman

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