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अधिग्रहित की गयी जमीनों के मुआवजे के नाम पर गोलमाल

raghvendra

raghvendraBy raghvendra

Published on 9 Feb 2018 6:45 AM GMT

अधिग्रहित की गयी जमीनों के मुआवजे के नाम पर गोलमाल
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संदीप अस्थाना

आजमगढ़। आजमगढ़ से होकर गुजरने वाली निर्माणाधीन फोरलेन सडक़ों के लिए अधिग्रहित की गयी जमीनों के मुआवजे के नाम पर करोड़ों रुपये का गोलमाल किया गया। जमीनों के अधिग्रहण की शुरूआत में किसान भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाने लगे थे। शुरुआती दौर में तो किसानों ने यह मुद्दा उठाया था कि उन्हें सर्किल रेट से मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। साथ ही मूल्यहीन जमीनों का मुआवजा अधिक दे दिया गया जबकि सडक़ के किनारे स्थित मूल्यवान जमीनों का मुआवजा कम दिया गया। जांच हुई तो सच्चाई सामने आ गयी। आनन-फानन में कुछ जगहों पर स्थितियों में सुधार किया गया।

जांच के दौरान यह भी बात सामने आई कि फोरलेन के लिए जो नक्शा बना, उन जमीनों के मालिकों से मिलकर भूमि अध्याप्ति कार्यालय के बाबुओं ने उनकी मूल्यहीन जमीन अधिक कीमत देकर खरीद ली। यह गोरखधंधा उजागर होने के बाद कार्रवाई भी हुई। दोषी बाबुओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी। यह अलग बात है कि निलंबित किए गए कर्मचारी जल्दी ही बहाली पा गए।

फिलहाल निलंबन के बाद जो नये कर्मचारी आए वह भी दूध के धुले हुए नहीं थे। उन्होंने भी अपने स्तर से किसानों को निचोडऩे का काम किया। साथ ही विवादित जमीनों में भी लेन-देन के बाद एक पक्ष को मुआवजे का भुगतान कर दिया गया। इन सारी चीजों को लेकर भी बराबर आवाज उठती रही है। अब जबकि फर्जी तरीके से दूसरे की जमीन का मुआवजा दूसरे व्यक्ति को दे देने का मामला सामने आया है तो प्रशासन के रोंगटे भी खड़े हो गये हैं। वैसे इन फर्जीवाड़ों की एक बार फिर नये सिरे से जांच शुरू हो गयी है।

लापता व्यक्ति के नाम हुआ भुगतान

पुरानी खतौनी पर लापता व्यक्ति के नाम पर दूसरे लोगों को फर्जी तरीके से अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का भुगतान कर दिया गया। भुगतान भी किसी छोटी रकम का नहीं किया गया है। आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा गांव स्थित इस जमीन के मुआवजे का भुगतान 96 लाख रुपये किया गया है। जमीन का वास्तविक मालिक सुग्रीव पुत्र धनई बीस साल से अधिक समय से लापता है। उसके लापता होने का समय 20 साल से ज्यादा हो जाने के कारण वर्ष 2016 में खतौनी में लापता सुग्रीव के भाई राजकुमार आदि का वरासत भी चढ़ चुका है।

फर्जी खतौनी पर यह भुगतान वर्ष 2017 में किया गया। मुआवजे का भुगतान हो जाने के बाद सुग्रीव के भाई राजकुमार को इस बात की जानकारी हुई। ऐसे में उसने शिकायत की कि उसकी अराजी नम्बर 86 की 0.1730 हेक्टेयर भूमि नेशनल हाइवे 233 में आई थी और उसके मुआवजे का भुगतान फर्जी तरीके से दूसरे लोगों को कर दिया गया। यह बात सामने आने के बाद हडक़ंप मच गया। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी गयी।

फर्जीवाड़े में दो लोग गिरफ्तार

यह फर्जीवाड़ा आखिर किसने किया, यह सच सामने आ चुका है। पुलिस ने दो आरोपियों रौनापार थाना क्षेत्र के खेतापुर गांव निवासी परशुराम दूबे पुत्र स्व. चन्द्रभान दूबे व अतरौलिया थाना क्षेत्र के मिश्रौलिया गांव निवासी विजय प्रकाश मिश्र पुत्र हरिद्वार मिश्र को गिरफ्तार करके मामले का खुलासा कर दिया है। इस मामले के तीन आरोपी अभी भी फरार हैं।

फरार आरोपियों में मिश्रौलिया गांव के ही वेदप्रकाश मिश्र पुत्र स्व. हरिद्वार मिश्र, अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा गांव निवासी दयानन्द तिवारी पुत्र विजय तिवारी व अजगरा की सुमन सिंह पत्नी रामअवतार सिंह फरार हैं। इस मामले में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। वजह यह कि भुगतान 2015 की खतौनी से किया गया। यदि विभाग ने नई खतौनी देखी होती तो जमीन का मालिक राजकुमार होता। इस तरह से भुगतान से पहले ही फर्जीवाड़ा पकड़ लिया गया होता।

बच गया 46 लाख

अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का 96 लाख का फर्जी भुगतान पकड़ में आने के बाद 46 लाख रुपया बच गया। हुआ यह था कि 20 साल से लापता सुग्रीव की जमीन के एक ही गाटे के 96 लाख रुपये का ही भुगतान हो पाया था। आरोपियों ने दूसरे गाटे के भुगतान के लिए भी क्लेम कर दिया था। इसी बीच इस फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया और दूसरे गाटे के मुआवजे का 46 लाख रुपया बच गया।

नपेगी कई लोगों की गर्दन

इस मामले में कई लोगों की गर्दन नपना अभी से तय माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि इस मामले का खुलासा करते समय पुलिस कप्तान अजय कुमार साहनी ने खुद यह बात स्वीकार की कि इस फर्जीवाड़े में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक के कर्मचारियों की भी संलिप्तता रही है। पकड़े गये आरोपियों ने भी कुछ लोगों के नाम उजागर किए हैं। ऐसी स्थिति में सभी की गर्दन नपना तय माना जा रहा है।

दलालों की सक्रियता नई बात नहीं

विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय में दलालों की सक्रियता कोई नई बात नहीं है। कार्यालय के आसपास दलाल हमेशा ही मंडराते रहते थे। यह अलग बात है कि जब से 96 लाख का यह गोलमाल सामने आया है, तभी से यह दलाल नदारत हैं। सच तो यह है कि यहां पर दलालों के बगैर कोई काम संभव ही नहीं था। इसकी वजह यह कि इन दलालों की विभाग के कर्मचारियों से डील रहती थी।

इसी डील से गोलमाल के सारे काम होते थे। 96 लाख के इस गोलमाल की आरोपी महिला सुमन सिंह हमेशा इस कार्यालय पर मौजूद रहती थी। उसकी विभाग में काफी पकड़ थी। जबसे इस गोलमाल में उसका नाम सामने आया है तभी से दलालों के साथ-साथ यह महिला भी लापता है।

बख्शे नहीं जाएंगे दोषी : डीएम

जिलाधिकारी चन्द्रभूषण सिंह का कहना है कि किसी भी दोषी को कतई नहीं बख्शा जाएगा। उनका कहना है कि अभी उन्हें पुलिस की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं बैंक कर्मियों की संलिप्तता मिलने के बाद सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उधर, सीआरओ आलोक वर्मा का कहना है कि फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से नकेल कसी जाएगी। इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गयी है। उनका कहना है कि 96 लाख का घपला पकड़ में आने के बाद विशेष सतर्कता बरती जा रही है। दलालों पर नकेल कसने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया जा चुका है। जल्दी ही कैमरा लगने का काम शुरू हो जाएगा।

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राघवेंद्र प्रसाद मिश्र जो पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद एक छोटे से संस्थान से अपने कॅरियर की शुरुआत की और बाद में रायपुर से प्रकाशित दैनिक हरिभूमि व भाष्कर जैसे अखबारों में काम करने का मौका मिला। राघवेंद्र को रिपोर्टिंग व एडिटिंग का 10 साल का अनुभव है। इस दौरान इनकी कई स्टोरी व लेख छोटे बड़े अखबार व पोर्टलों में छपी, जिसकी काफी चर्चा भी हुई।

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