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विधान परिषद में आजम खां प्रकरण की गूंज, सपा ने सदन त्यागा

लखनऊ। विधान परिषद में शून्य काल में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा उठा। सपा सदस्यों ने सरकार पर भेदभाव व विद्वेषपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। सपा सदस्यों का कहना था कि सरकार अनावश्यक प्रताड़ित करने के लिए फर्जी मुकदमें दर्ज कर रही है। सरकार ने विपक्ष के आरोप को खारिज कर दिया।

राम केवी

राम केवीBy राम केवी

Published on 23 July 2019 2:04 PM GMT

विधान परिषद में आजम खां प्रकरण की गूंज, सपा ने सदन त्यागा
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आजम खां
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लखनऊ। विधान परिषद में शून्य काल में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा उठा। सपा सदस्यों ने सरकार पर भेदभाव व विद्वेषपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया। सपा सदस्यों का कहना था कि सरकार अनावश्यक प्रताड़ित करने के लिए फर्जी मुकदमें दर्ज कर रही है। सरकार ने विपक्ष के आरोप को खारिज कर दिया।

शून्य प्रहर में सपा के अहमद हसन, वासुदेव यादव, श्रीराम सिंह यादव, राजेष यादव एवं अन्य सदस्यों ने जौहर विष्वविद्यालय रामपुर के कुलाधिपति के विरूद्ध फर्जी मुकदमें दर्ज किये जाने का मामला कार्य स्थगन के रूप में उठाया।

सपा सदस्यों राम सुन्दर दास निषाद, उदयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही आजम खां तथा उनके परिवार के सदस्यों पर फर्जी मुकदमें दर्ज होने शुरू हो गये हैं।

हाल ही में 20 जुलाई को सपा विधान मण्डल दल के 21 सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल, नेता विरोधी दल अहमद हसन के नेतृत्व में रामपुर गया था।

प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2003 में नियमानुसार की गयी थी और इसके लिए जिन जमीनों का बैनामा कराया गया था, उसका भुगतान चेकों के जरिये किया गया था।

जमीनों का दाखिल-खारिज हुए भी 13 वर्ष बीत चुके हैं। अब 16 वर्षो के बाद कुछ आपराधिक व्यक्तियों के सहारे सरकार के संरक्षण में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के राजनीतिक विरोधियों ने शिकायतें करना शुरू कर दिया।

प्रशासन ने बिना कोई जांच किये बगैर पुख्ता पैमाइश के दीवानी संबंधी मामलों में पहले 26 व्यक्तियों की ओर से संयुक्त रूप से एफआईआर दर्ज की गयी। उसके बाद जिन 26 व्यक्तियों के द्वारा अलग-अलग मुकदमें दर्ज कराये गये। जब सपा का प्रतिनिधिमंडल रामपुर गया तो उस दिन भी पुलिस मुकदमें दर्ज कर रही थी।

इस पर कार्य स्थगन हुआ अस्वीकार

नेता विपक्ष अहमद हसन ने कहा कि डीएम, एसएसपी और राजस्व विभाग के अधिकारी ने प्रोटोकाल नहीं निभाया व बुलाने पर भी नहीं आये, जबकि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी।

नेता सदन डा. दिनेश शर्मा ने कहा नेता विपक्ष ने साढ़े बारह बजे निरीक्षण भवन पहुंचने की जानकारी दी थी मगर वे वहां उस समय नहीं पहुंचे थे और स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ तय मार्ग के स्थान पर दूसरे मार्ग से सीधे विश्वविद्यालय पहुंच गये व वहां से चार बजे लौटे। प्रशासन ने पूरा प्रोटोकाल दिया। सभापति रमेश यादव ने कार्य स्थगन को अस्वीकार कर दिया।

इसी बीच पीठ पर अधिष्ठाता देवेन्द्र प्रताप सिंह आ गये व कार्य स्थगन की दूसरी सूचना बसपा के दिनेश चन्द्रा को पेष करने को कहा। हालांकि सपा के कुछ सदस्य पीठ पर आक्षेप करने लगे इस पर अधिष्ठाता ने कहा कि सभापति की एक व्यवस्था आ चुकी है।

नोकझोंक भी हुई

इस पर सपा सदस्य जोर-जोर से बोलने लगे अधिष्ठाता ने कहा कार्यवाही नियमों से चलती है। नियम के विपरीत आचरण करने पर पीठ को कठोर निर्णय लेना पड़ सकता है। इस पर नेता विपक्ष अहमद हसन ने कहा अधिष्ठाता धमकी दे रहे हैं और इसके साथ ही सपा के सदस्य सदन के बाहर चले गये फिर पूरे दिन नहीं लौटे।

इस तरह अधिष्ठाता की टिप्पणी से नाराज नेता विपक्ष समेत सपा के सभी सदस्यों ने पूरे दिन के लिए सदन का त्याग कर दिया।

राम केवी

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