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जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को मिली उम्रकैद, 9 साल पहले चढ़े थे हत्थे

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NewstrackBy Newstrack

Published on 14 July 2016 2:46 PM GMT

जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को मिली उम्रकैद, 9 साल पहले चढ़े थे हत्थे
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लखनऊ: शहर की एक विशेष अदालत ने आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के नौ साल से जिला जेल में बंद तीन आतंकियो को गुरुवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने तीनों पर अलग-अलग एक लाख तीस हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है।

इन पर आरोप था कि वे अपने विदेशी साथियों को छुड़ाने के लिए देश में जम्मू-कश्मीर के रास्ते घुसे। लेकिन किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले एक मुठभेड़ में एसटीएफ के हत्थे चढ़ गए। ये तीनों आरेापी मोहम्मद आबिद उर्फ फत्ते मिर्जा राशिद बेग उर्फ राज कज्जाफी और शैफुर्ररहमान उर्फ यूसुफ हैं।

जेल में लगने वाली इस विशेष अदालत के जज आम प्रकाश मिश्रा ने पिछले 30 जून को दोष सिद्ध कर दिया था और सजा के बिंदु पर निर्णय गुरुवार को सुनाने का आदेश दिया था। सजा के बिंदु पर अभियोजन के वकील एमके सिंह ने तीनों को अधिकतम सजा देने की मांग की थी। तीनों आंतकियों की ओर से सजा में नरमी बरतने की मांग की गई और तर्क दिया गया कि यह उनका पहला अपराध है। अतः अदालत सभी के साथ नरमी से पेश आए।

अदालत ने अपने 64 पेज के निर्णय में तीनों के खिलाफ लगे ओरोपों को सही पाया और कहा कि अभियोजन अभियुक्तों के खिलाफ लगे आरेापो को साबित करने में सफल रहा। कोर्ट ने कहा कि तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाने से न्याय की पूर्ति हो जाएगी। तीनों को हत्या का प्रयास देशद्रोह विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और विधि विरुद्ध क्रिया कलाप निवारण और विदेशी अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई है।

तीनों को मेरठ और गाजियाबाद एसटीएफ ने 2007 में पकड़ा था। इन पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य होने का आरेाप है।कोर्ट ने मामले की सुनवाई 23 जून को पूरी कर ली थी। एसटीएफ टीम ने इन्हें मुठभेड़ के बाद सीतापुर रेाड से पकड़ने का दावा किया था। तीनों अभियुक्तों के पास से एक पिस्टल दो एके 47 रायफल 60 कारतूस 16 हैंड ग्रेनेड चार किलो आरडीएक्स और फर्जी आईकार्ड की बरामदगी दिखायी गई थी। मामले की रिपेार्ट गुड़म्बा थाने पर लिखायी गई थी। जेल की विशेष अदालत के जज प्रमोद कुमार मिश्रा ने तीनों के खिलाफ लगे अरेापों को सही पाया था।

अभियोजन अधिकारी एमके सिंह ने बताया कि ये तीनों आरोपित भारतीय जेलों में बंद विदेशी आंतकियों को छुड़ाने की मंशा से देश में घुसे थे। खुफिया विभाग को जानकारी मिली थी कि ये आंतकी किसी प्रभावशाली नेता या किसी महत्वपूर्ण संस्थान पर कब्जा कर अपनी मांगो के लिए दबाव बनाएंगे।

यूपी एसटीएफ के तत्कालीन एडीजी ने आपरेशन क्लीन नाम से एसटीएफ मेरठ के तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार राघव को कार्यवाही के निर्देश दिए। 15 नवंबर 2007 को एसटीएफ को खबर मिली कि कुछ आंतकी जम्मू कश्मीर के रास्ते देश में घुसे हैं। इनमें से कुछ लखनऊ पहुंचने वाले हैं। जानकारी पर मेरठ और गाजियाबाद एसटीएफ की टीमें लखनऊ पहुंची। बाद में सीतापुर रोड पर तीनों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

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