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जानिए क्यों निकलती है भोलेनाथ की बारात और क्या है मान्यता?

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AdminBy Admin

Published on 7 March 2016 2:49 PM GMT

जानिए क्यों निकलती है भोलेनाथ की बारात और क्या है मान्यता?
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वाराणसी: भोले शंकर की नगरी काशी तो मानों बाबा भोलेनाथ के अल्हड़पन और मस्ती में हमेशा सराबोर रहता है। काशी नगरी में विश्व के नाथ बाबा विश्वनाथ का भी दरबार है। ये माहौल है बाबा के बारात का, जहां सबकी जुबान पर बस बम-बम ही रहता है। काशी में हर शिवरात्रि पर बाबा की बारात निकलती है।

तो इसलिए निकलती है भोले-भंडारी की बारात

मान्यता है कि काफी तपस्या के बाद मां पार्वती ने भोले-भंडारी का वरन किया था और भोले से ही पाड़ीकर्म का संकल्प लिया था। मां जगदम्बका से भोले-भंडारी प्रसन्न होकर हिमालय की ओर बारात लेकर चल पड़े। वह शुभमुहूर्त शिवरात्रि का ही था जब भगवान शंकर अपनी बारात ले मां पार्वती के आंगन पहुंचे थे।

शिवालयों से निकलती है यह बारात

महाशिवरात्रि पर सातवार और नौ त्योहार के शहर बनारस में शिवरात्रि पर जगह-जगह शिवालय से शिव बारात निकालने की परंपरा है। बाबा के बारात में भूत, प्रेत, दानव, असुर, अड़भंगी, साधू-संयासी और देवी-देवता सभी बाराती बनते हैं। ऐसे ही सात समुंदर पार से आए शिव भक्त भी इस बार शिव बारात में शामिल होते हैं।

तिलभांडेश्वर मंदिर से निकलती है सबसे पहले बारात

महाशिवरात्रि के पावन मौके पर काशी में तमाम जगहों से शिव-बारात निकालने की परम्परा है। इन्ही में से एक भेलूपुर इलाके में स्थित तिलभांडेश्वर मंदिर है जहां कई वर्षों से सबसे पहले निकलती है। यह बारात शहर के विभिन्न इलाकों से हुए वापस तिलभांडेश्वर मंदिर पर आकर खत्म होती है।

क्या कहना है शिव बारात समिति के सदस्य का

शिव बारात समिति के सदस्य संजय गुप्ता बताते है कि इस साल भी शिव बारात के दौरान पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजो की गूंज से गुंजायमान हो उठा। सभी भक्त शिव की भक्ति में डूबे रहें। इस साल विदेशी मेहमानों का शिव बारात में शामिल होना भक्तों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।

सिर्फ श्रद्धालुओं की भक्ति-भाव देखते हैं भोले भंडारी

भोले भंडारी सिर्फ श्रद्धालुओं की भक्ति और भाव देखते हैं। भले ही चाहे वो किसी भी मुल्क का हो। शिव बारात का मतलब ही है सारे ऊंच-नीच, भेद-भाव मिटाकर सभी एक समान सिर्फ और सिर्फ शिव भक्त हैं।

नीचे स्लाइड में देखिये भोले भंडारी की बारात की कुछ तस्वीरे

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