Top

EXPOSE : बालिका गृह में लड़के लाते हैं सेनेटरी नेपकिन और अंडरगार्मेंट

Admin

AdminBy Admin

Published on 11 April 2016 4:08 PM GMT

EXPOSE : बालिका गृह में लड़के लाते हैं सेनेटरी नेपकिन और अंडरगार्मेंट
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

लखनऊ: मोतीनगर बालिका गृह की गुत्थी सुलझने का नाम ही नहीं ले रही। जहां एक तरफ यहां लड़कियां प्रेग्नेंट पाई गईं वहीं दूसरी तरफ संवासिनियों को अपनी प्राइवेसी लड़के से शेयर करनी पड़ती है। उन्हें अंडरगार्मेंट तक के लिए लड़के को कहना पड़ता है।

इस बालिका गृह में समस्याओं का अम्बार है, जिससे हर रोज लड़कियां दो-चार होती हैं। इसी हालात का जायजा Newztrack.com की टीम ने लिया। साथ ही यह जानने का प्रयास किया कि गृह के अंदर लड़कियों की जिंदगी किस तरह की है।

पुरुष गार्ड की तैनाती

-बालिका गृह में लड़कियों की सुरक्षा के लिए पुरुष गार्ड की तैनाती की गई है जिससे लड़कियां असहज महसूस करती हैं।

-एडवा यंग कमेटी की कार्यकर्ता शिवा मिश्रा ने कहा, कोई भी लड़की चाहे कितने ही खुले विचारों की हो, जितनी कम्फर्टेबल वो महिलाओं के साथ होती हैं उतना पुरुषों के साथ नहीं होती।

पर्सनल सामान भी लड़के ही लाते हैं

-शिवा मिश्रा ने Newztrack.com को बताया कि यहां की लड़कियों को अंडरगार्मेंट और सेनेटरी नेपकिन तक पुरुष कर्मचारी से मांगना पड़ता है।

-लड़कियों ने बताया कि अगर उन्हें अंडरगार्मेंट और सेनेटरी नेपकिन की जरूरत होती है तो आशीष नाम के लड़के से कहना पड़ता है।

शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे

-बालिका गृह में पढ़ाई की व्यवस्था भी भगवान भरोसे ही है।

-यहां पढ़ाने वाली टीचर्स का क्वालिफिकेशन सामान्य से भी कम है।

-शिक्षा के हालात को इस बात से समझा जा सकता है कि अब इंटर और हाई स्कूल की स्टूडेंट्स को ऐसी टीचर पढ़ाती हैं जिन्हें खुद ज्यादा कुछ आता नहीं है।

मांगी जाती है घूस

एक लड़की ने महिला समिति को पत्र भेजकर बताया था कि वह बालिग है और कोर्ट के आर्डर के बाद भी उसे उसके पति से नहीं मिलने दिया जाता। मिलने के लिए उसके पति से घूस मांगी जाती है।

लड़कियों का लिखा शिकायती पत्र लड़कियों का लिखा शिकायती पत्र

मिलता है बदबूदार खाना

-लड़कियों ने चिठ्ठी में बताया कि उन्हें खराब खाना दिया जाता है।

-दाल से फिनायल की बदबू आने के बावजूद उन्हें वही भोजन खाना पड़ता है।

-अगर बड़ी लड़कियां उसे खाने से मना करती हैं तो छोटी लड़कियों को वो जबरदस्ती वही खिलाया जाता है।

बिना मेडिकल जांच होता है ट्रांसफर

-जब भी किसी महिला संवासिनी का ट्रांसफर होता है तो उसके पूर्व उसकी मेडिकल जांच होना अनिवार्य है। लेकिन बालिका गृह इस नियम का पालन नहीं कर रहा है।

-जिस दिन ये खुलासा हुआ कि बालिका गृह में एक लड़की प्रेग्नेंट है, आनन-फानन में दो लड़कियां जिनकी उम्र 18 वर्ष से ऊपर थी उन्हें बिना मेडिकल चेकअप के रायबरेली ट्रांसफर कर दिया गया। जो नियम के विरुद्ध है।

क्या था मामला ?

-लखनऊ के मोतीनगर बालिका गृह में 22 साल की एक कुंवारी लड़की प्रेग्नेंट पाई गई थी।

-घबराए बालिका गृह कर्मियों ने आनन-फानन में दो लड़कियों को रायबरेली शिफ्ट कर दिया था।

-इसके बाद बालिका गृह की लड़कियों ने एक चिठ्ठी लिखी, जो उनके साथ हो रहे अत्याचार को बयां कर रही थी।

-इस पूरे मामले में फजीहत के बाद बालिका गृह की अधीक्षिका रुपिंदर कौर को निलंबित कर दिया गया था।

-वहीं कुछ दिन बाद बरेली महिला संरक्षण गृह से दो संवासिनियां को लखनऊ के मोती नगर स्थित बालिका गृह में ट्रांसफर किया गया। जांच के बाद पता चला कि वो दोनों भी गर्भवती हैं।

-ये लड़कियां प्रेग्नेंट कैसे हुई इस बात की जांच की जा रही है।

पूरे मामले में मंत्री नहीं ले रही थीं इंटरेस्ट

शिवा मिश्रा ने बताया कि पूरी घटना की जानकारी देने के लिए जब उन्होंने राज्य मंत्री महिला कल्याण विभाग सैय्यदा शादाब फातिमा को फोन किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मजबूरन उन्हें उनकी फेसबुक वॉल पर पोस्ट करना पड़ा। तब जाकर उन्होंने एक्शन लिया। उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश के बालिका गृह से ये सवाल किए हैं और उसका जवाब मांगा है।

पांच गंभीर सवाल, जिनके जवाब जरूरी

-पिछले पांच साल में कितनी लड़कियां बालिग हुईं?

-कितनी लड़कियों की शादी हो चुकी है?

-कितनी जॉब कर रही हैं?

-कितनी लड़कियों का ट्रांसफर हो चुका है?

-कितनी लड़कियों की मौत हो चुकी है?

Admin

Admin

Next Story