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Lucknow News: कल शिक्षामित्रों का हल्ला बोल, लग सकता है भीषड़ जाम, निकलने से पहले देख लें रोड मैप
Lucknow News: सम्मेलन में शिक्षामित्र अपने पूरे परिवार के साथ सम्मिलित होंगे। कल से ही विधान मंडल सत्र भी शुरू हो रहा। जिससे शहर में भीषड़ जाम की आशंका है। इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है।
शिक्षामित्रों के सम्मेलन में कौशल किशोर (फोटो-आशुतोष त्रिपाठी)
Lucknow News: TET पास अभ्यर्थी सहायक अध्यापक बनाए जाने सहित कई मांगो को लेकर परिषदिय स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्र 20 फरवरी को लखनऊ में धरना देंगे। जनपद मुख्यालय पर लगभग आठ सौ शिक्षामित्र प्रतिभाग कर सकते हैं। इसके बाद रैली स्थल रमाबाई अंबेडकर मैदान के लिए रवाना होंगे। इस सम्मेलन में शिक्षामित्र अपने पूरे परिवार के साथ सम्मिलित होंगे। कल से ही विधान मंडल सत्र भी शुरू हो रहा। जिससे शहर में भीषड़ जाम की आशंका है। इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है।
विभागीय टेट पास कराकर सहायक अध्यापक बनाए जाने, टेट पास शिक्षामित्रों को को सहायक अध्यापक बनाए जाने, उत्तराखंड मॉडल लगू करने जैसे कई मांगो को लेकर शिक्षक संघ 20 फरवरी को राजधानी लखनऊ के रमाबाई अम्बेडकर मैदान में सम्मेलन आयोजित होगा। संघ जिलाधिकारी राम सिंह राठौर ने कहा कि सम्मेलन भाग लेने के लिए सभी शिक्षामित्रों को सूचित कर दिया गया है। 20 फरवरी को अवकाश के लिए आवेदन भी ऑनलाइन दे दिया गया है।
शिक्षामित्रों का महासम्मेलन (फोटो-आशुतोष त्रिपाठी)
बीएस को भी ज्ञापन देकर इस बात से अवगत करा दिया गया है। शिक्षामित्रों की समस्याओं को खठाकर उसके समाधान की बात रखी जाएगी। जबतक सहायक शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाने की प्रक्रिया चल रही है तबतक उनके जीवन निर्वाह के लिए तब तक उनके परिवार के पालन पोषम के लिए मानदेय दिये जाने की मांग की जाएगी। जनपद मुख्यालय से सुबह सात बसें व छोटे वाहनों से शिक्षामित्र रैली स्थल पहुंचेगे।
शिक्षामित्रों का महासम्मेलन (फोटो-आशुतोष त्रिपाठी)
शिक्षामित्रों का नहीं बढ़ेगा अनुबंध
शिक्षामित्रों भी अब सामान्य शिक्षकों की भांति 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाएंगे। सेवा निवृत्त होने के बाद वो किसी भी स्कूल में बच्चों को नहीं पढ़ा सकेंगे। प्रदेश सरकार उनका अनुबंद अब नहीं बढ़ाएगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने आदेश जारी कर कहा कि प्रदेश में अभी तक शिक्षामित्रों कि रिटायरमेंट की कोई आयु निर्धारित नहीं थी। प्रत्येक वर्ष अनुबंध के आधार पर ये शिक्षण कार्य करते थे।