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बटलर पैलेस स्थित आवास को पांच सितारा होटल की तरह बनवाना चाहते थे लखनऊ कमिश्नर, लेकिन लग गया अडंगा !

Commissioner vs Chief Engineer: इस मकान का एरिया तक़रीबन 250 स्क्वायर मीटर है। अगर 81 लाख रुपये को इसके लिविंग एरिया पर खर्च किया जाए तो एक फुट पर करीब 3018 रुपये का खर्च आएगा। जो कि पांच सितारा होटल के खर्च के करीब बैठता है।

Rahul Singh Rajpoot
Updated on: 24 Jun 2022 2:40 PM GMT
बटलर पैलेस स्थित आवास को पांच सितारा होटल की तरह बनवाना चाहते थे लखनऊ कमिश्नर
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बटलर पैलेस स्थित आवास को पांच सितारा होटल की तरह बनवाना चाहते थे लखनऊ कमिश्नर (Image Credit: Newstrack Ashutsoh Tripathi)

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Commissioner vs Chief Engineer: राजधानी के पॉश इलाके स्थित बटलर पैलेस (Butler Palace) के क्वाटर नंबर ए-3 को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अफ़सर रंजन कुमार (ranjan Kumar) की चर्चा इन दिनों काफी है। इस क्वाटर में 81 लाख रुपये खर्च करने की जिस फाइल को लखनऊ के कमिशनर और एलडीए अध्यक्ष (LDA President) रंजन कुमार (Ranjan kumar) ने अमली जामा पहनाने की कोशिश की थी उसमें पिछले 10 सालों में भी इतना पैसा मेंटिनेंस व अन्य मद में खर्च नहीं हुआ है।

इस मकान का एरिया तक़रीबन 250 स्क्वायर मीटर है। अगर 81 लाख रुपये को इसके लिविंग एरिया पर खर्च किया जाए तो एक फुट पर करीब 3018 रुपये का खर्च आएगा। जो कि पांच सितारा होटल के खर्च के करीब बैठता है। ऐसे में न केवल प्रशासनिक, राजनीतिक हल्के बल्कि रंजन कुमार के कार्य पर बटलर पैलेस में भी हैरत जताने वाले कम नहीं है। इस मकान का करीब 20 लाख रुपये बिजली का बिल भी बकाया है। यह भुगतान भी बिजली विभाग को करके देना था। हालांकि इस फाइल के खुलासे के बाद बिजली विभाग की बांझे खिल गई हैं।

मकान पहले आईएएस रवींद्र सिंह के नाम पर आवंटित था

यह मकान पहले आईएएस रवींद्र सिंह के नाम पर आवंटित था। उनके रिटायर होने के बाद उनकी आईआरएस पत्नी के नाम पर आवंटित हो गया। जिसे अभी हाल फिलहाल उन्होंने खाली किया है। रंजन कुमार की महत्वाकांक्षा इस सरकारी मकान में एक करोड़ रुपये खर्च करने तक ही सीमित नहीं थी । उनकी तैनाती भले ही कमिश्नर के पद पर रही हो लेकिन नजरें हमेशा एलडीए पर जमीं रही। इस बात की पुष्टि प्राधिकरण में आने-जाने और उनके आवाभगत से की जा सकती है। हद तो यह है कि क्यूसीबीएस मार्कशीट पर उनकी मनचाही कंपनी को 24 नंबर मिल जाते हैं, जबकि बाकी दो प्रतिभागी कंपनियां दहाई में भी प्रवेश नहीं कर पाती हैं।

गुरुवार को हटाए जाने के बाद एलडीए के पूर्व मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह से न्यूजट्रैक ने पूरे प्रकरण को जानने की कोशिश की तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों पर उन्होंने ऑफ कैमरा जरुर जवाब दिया। पूर्व चीफ इंजीनियर ने कहा कि उनके ऊपर जो चार आरोप लगाए गए थे। वह 1 जुलाई, 2021 के हैं, जिसका जवाब उन्होंने 8 जुलाई, 2021 को शासन को भेज दिया था। इसके साथ ही एक विधायक द्वारा आरोप लगाकर शिकायत करने की बात कही गई थी ।लेकिन बाद में उन्होंने इस पर अपना बयान जारी कर शिकायत पत्र पर हुए हस्ताक्षर को फर्जी बताया था। इन सब मामले का जिक्र करते हुए बीते 23 जून को एकाएक शासन द्वारा उन्हें हटा दिया गया।




इंदुशेखर सिंह ने कहा कि अगर कोई मामला उन पर बनता है तो उन्हें नोटिस जारी की जाती, उच्च अधिकारी द्वारा उन्हें तलब किया जाता । लेकिन ऐसे कुछ भी नहीं हुआ और उन्हें सीधे हटाये जाने का आदेश जारी किया गया। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह मंडलायुक्त के सरकारी आवास की मरम्मत कराने के कार्य को स्वीकृति नहीं देना है। जिस पर करीब 81 लाख रुपये खर्च आता जो नियम विरुद था। साथ ही 20 लाख रुपये बिजली बिल जमा करने को भी कहा गया था। इसी बात को लेकर लखनऊ कमिश्रर उनसे नाराज हैं।

एलडीए करा सकता है ऐसे कार्य?

इंदुशेखर सिंह के मुताबिक कमिश्रर का सरकारी आवास राज्य संपत्ति विभाग के अधीन है। इसमें जो भी कार्य किए जाने थे वह राज्य संपत्ति करता या रंजन कुमार खुद कराते। एलडीए इसके लिए बाध्य नहीं है, मंडलायुक्त क्योंकि एलडीए अध्यक्ष होते हैं इसी वजह से वह इस बंगले में आने से पहले इसकी रंगत और रौनक को महलों जैसा कराना चाहते थे। उन्होंने इस पूरे कार्य को एलडीए के माथे पर थोप दिया। प्रस्ताव बन गया और फाइल आगे भी बढ़ गई। जब उनके पास आई तो उन्होंने ऐसा करना ठीक नहीं समझा। उनके मुताबिक एलडीए अपने मद से सिर्फ ड्रेनेज, सीवर, मार्ग प्रकाश, रोड, जलापूर्ति का कार्य करा सकता है।


मंडलायुक्त पर लगाए आरोप?

एलडीए में अफसरों के बीच अंदरुनी जंग कोई नई बात नहीं है। एलडीए पैसे वाला विभाग है और यहां जो बैठता है वह मोटी मलाई खाता है। फिलहाल इंदुशेखर सिंह ने कमिश्नर और एलडीए अध्यक्ष रंजन कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पहले ऐसे कमिश्नर हैं जो विकास प्राधिकरण के ऑफिस में बैठकर अपने चहेतों को कार्य दिलाने के लिए नंबरिंग करते हैं। इंदुशेखर सिंह के मुताबित ऐसे मामलों की फाइल उनके पास मौजूद है। जब वह बैठकर एक कंपनी को 25 में से 24 नंबर देकर कार्य दिलाना चाहते थे। इस पर भी उनके द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी। क्योंकि वह मानक और नियम के विपरीत था। इस वजह से भी वह मंडलायुक्त और वीसी के निशाने पर आ गए थे। उन्होंने कहा फेहरिस्त लंबी है अगर मुंह खोलूँगा तो कई पुराने अफसर भी लपेटे में आ जाएंगे। पिछले सालों का पूरा चिट्ठा खुलेगा तो मामला सैकड़ों करोड़ रूपये के गोलमाल तक जाएगा।


एलडीए में होता है बड़ा खेल?

लखनऊ विकास प्राधिकरण में पैसों का बड़ा बंदरबांट होता है। एक जोन से हर महीने 10-20 लाख रुपये तक की वसूली होती है। जो ऊपर से नीचे तक बंटता है। एलडीए में किसी कार्य को कराने और उसे रोकने का पूरा पावर उपाध्यक्ष के पास होता है। ऐसे में जब आरोप लगते हैं तो जिम्मेदारी कहीं ना कहीं उनकी भी बनती है क्या उन्हें यह सब मालूम नहीं था। इंदुशेखर सिंह ने एलडीए का घाटे का जिक्र करते हुए कहा कि कभी 2000 करोड़ रुपये के फायदे में रहने वाला विकास प्राधिकरण कैसे घाटे में आ गया। यह बड़ा सवाल है क्योंकि बिना पूरे प्लान के योजनाएं शुरू कर दी गईं, आज सैकड़ों फ़्लैट बने खड़ें हैं, उसे खरीददार नहीं मिल रहा है। एलडीए का ऐसे करीब 900 करोड़ रुपये फंसा है। इसे बनाकर कमीशन सब खा गए।


पूर्व वीसी से भी हुआ था विवाद?

ठेके को लेकर इंदुशेखर सिंह का लखनऊ के पूर्व डीएम और वीसी रहे अभिषेक प्रकाश से भी विवाद हुआ है। यह मामला काफी सुर्खियों में भी था और आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे। इस बारे में उनका कहना है कि तत्कालीन वीसी अभिषेक प्रकाश अपने चहेतों को ठेका दिलाने के लिए नियम विरुद्ध कार्य करने को कह रहे थे जिसे उन्होंने मना कर दिया था। उसके बाद से अभिषेक प्रकाश उनसे नाराज हो गए थे और बदले की भावना से उनके खिलाफ एक्शन शुरू कर दिए।

पत्नी बेटी पर लगे आरोप पर सफाई?

इंदुशेखर सिंह ने अपने ऊपर लगे चार आरोप पर सफाई तो दी है । साथ ही उनकी पत्नी और दोनों बेटियों के खिलाफ मामले पर उनका कहना है कि उनकी दोनों बेटियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर विदेश में नौकरी कर रही थीं। वहां से नौकरी छोड़कर लखनऊ में अपना बिजनेस शुरू करना चाहा । उन्होंने अपने पैसों से जमीन खरीदा। लेकिन उसे अवैध बताकर उसके खिलाफ डीएम अभिषेक प्रकाश ने कार्रवाई कराई। जिसके खिलाफ वह हाईकोर्ट गए है, उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट से जल्द ही इस मामले में उन्हें न्याय भी मिलेगा। क्योंकि उन्होंने इसमें कुछ भी ऐसा नहीं किया जो नियम विरुद्ध हो और उनके या उनकी पत्नी बेटियों पर आरोप लगे। उन्होंने कहा कि अब जब लोग पीछे पड़ ही गए हैं तो वह भी पीछे नहीं हटेंगे।

Rakesh Mishra

Rakesh Mishra

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