अतिक्रमण पर खुद लखनऊ पुलिस, सेंट्रल बार ने की जांच की मांग

यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि संबंधित पुलिस को ही क्षेत्र अधिकार दिया जाता है तो सारे चालान का निस्तारण पुलिस विभाग ही करे, जबकि अभी तक वही चालान व सीजर न्यायालय में भेजे गए जिसमें वाहन स्वामी पुलिस को उचित सुविधा शुल्क उपलब्ध नहीं करा पाया है।

लखनऊः सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के महासचिव संजीव पाण्डेय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशऔर जनपद लखनऊ के न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा है कि नये मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वर्तमान समय में पुलिस द्वारा चालान किया जा रहा है, इसमें हजारों की संख्या में गाड़ियां पुलिस द्वारा सीज की जा रही हैं। आरोप है कि थाने में दो-तीन हजार रुपये देने पर गाड़ियां छोड़ दी जाती हैं। लेकिन जो सुविधा शुल्क नहीं दे पाते उनका चालान न्यायालय में आता है और उसका निस्तारण कराने में 10000 रुपये का जुर्माना होता है।

अधिवक्ता संजीव पाण्डेय का कहना है कि चालान पुलिस अधिनियम द्वारा किया जाता है तथा उन्हीं के द्वारा निस्तारण भी किया जाता है। यह भी अवगत कराया कि जिन मामलों में वाहन स्वामी थाने पर सुविधा शुल्क देने में अक्षम होता है, उन मामलों को न्यायालय के समक्ष भेज दिया जाता है। जिनका निस्तारण न्यायालय द्वारा किया जाता है।

इस मामले में यह तथ्य भी सामने आया है कि थाने में दो-तीन हजार रुपये देने पर गाड़ियां छोड़ दी जाती हैं। लेकिन जो चालान न्यायालय में आता है उसका निस्तारण कराने में 10000 रुपये का जुर्माना होता है।

सेंट्रल बार महासचिव ने कहा कि यह बहुत ही विषम और भयावह स्थिति उत्पन्न कर रहा है। उक्त तथ्यों के बारे में तमाम अधिवक्ताओं द्वारा सूचित किया गया है। इस अनियमितता को लेकर बहुत ही आक्रोश व्याप्त है।

स्पष्ट हो कि चालान व सीज वाहन का निस्तारण कौन करेगा

सेंट्रल बार एसोसिएशन ने कहा है की यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि मोटर व्हीकल एक्ट में चालान व सीज वाहन का निस्तारण न्यायालय करेगा या पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी। इस पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि अभी तक जांच कराए जाएं तो हजारों की संख्या में वाहन थाने से रिलीज किए गए हैं ऐसा किस परिस्थिति में हुआ यह जांच का विषय है। यह न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप है। न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार के विरुद्ध इस विषय में कई सक्षम अधिकारियों से वार्ता की गई लेकिन कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल रहा है।

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महासचिव ने कहा कि थाने की पुलिस द्वारा शमन शुल्क भी लिया जाता है तथा चालान भी किया जाता है निस्तारण के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसी दशा में न्यायालय से अनुरोध है कि आवश्यक आदेश व निर्देश जारी करें, जिससे समाज में न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार का विलोपन होने से रोका जा सके।

यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि संबंधित पुलिस को ही क्षेत्र अधिकार दिया जाता है तो सारे चालान का निस्तारण पुलिस विभाग ही करे, जबकि अभी तक वही चालान व सीजर न्यायालय में भेजे गए जिसमें वाहन स्वामी पुलिस को उचित सुविधा शुल्क उपलब्ध नहीं करा पाया है।

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